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मक्का की रोटी, बैगन का भरता था पसंद...दूध भी पीते थे
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कन्नौज। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव भोजन में मक्का की रोटी बहुत पंसद करते थे। साथ में बैगन का भरता व अरहर की दाल भी खाते थे।
सुबह दूध पीना हर रोज की आदत थी। नहाने के बाद हनुमान चालीसा का भी पाठ करते थे।
शहर के मोहल्ला आनंदीदास निवासी 68 वर्षीय बृजेंद्र नारायण उर्फ गुड्डू सक्सेना नेताजी से लेकर डिंपल तक के चुनाव में प्रस्तावक रहे हैं।
गुड्डू बताते हैं कि छिबरामऊ निवासी छोटे सिंह यादव का भांजा अजय सिंह उनके साथ पढ़ता था। इसी वजह से छोटे सिंह यादव को वह भी मामा कहते थे।
गुड्डू सक्सेना बताते हैं कि वर्ष 1980 में लोकदल नेता छोटे सिंह यादव ने मुलायम सिंह यादव से उनका परिचय कराया। इसके बाद नेताजी का उनके घर आंनदीदास मोहल्ले में आना-जाना शुरू हो गया था।
गुड्डू सक्सेना का कहना है कि एक रात घर में रुकने के दौरान मुलायम सिंह यादव ने मक्का की रोटी, बैगन का भरता, अरहर की दाल खाई थी।
अगले दिन सुबह चार बजे उठने के दौरान अपने हाथों से ही घर पर दाढ़ी बनाई थी। इस दौरान अखबार भी पढ़ा था। सुबह एक गिलास दूध भी नेताजी की आदत में शुमार था।
वर्ष 1989 में मुलायम सिंह यादव क्रांति रथ लेकर कन्नौज पहुंचे थे, उस दौरान वह अपोजिशन लीडर थे। रात में कन्नौज में रुकने के बाद अगले दिन बिल्हौर में जनसभा की थी।
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सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का शहर के जीटी रोड किनारे रहने वाले दरोगा कटियार से भी गहरा लगाव रहा है। कन्नौज आने पर सपा संरक्षक उनसे जरूर मिलते थे।
कोआपरेटिव बैंक की मानीमऊ व कन्नौज शाखा में करीब 15 साल तक दरोगा कटियार की पत्नी दमयंती कटियार डायरेक्टर रहीं हैं।
इसके अलावा साधन सहकारी समिति तिखवा में तीन बार दरोगा कटियार अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने बताया कि रक्षामंत्री बनने के बाद मुलायम सिंह यादव कन्नौज आए थे।
वर्ष 2016 में पार्टी कार्यालय से फोन आया और दमयंती कटियार को लखनऊ बुलाकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य भी बनाया।
- तीनों सीटें जितवाने की अपील की थी
मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज से हमेशा भावनात्मक रिश्ता रखा। वर्ष 2012 के विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में जब वह जनसभा को संबोधित करने आए तो केके इंटर कॉलेज बोर्डिंग ग्राउंड में उन्होंने कहा था कि तीनों सीटें जितवा देना, नहीं तो लोग कहेंगे कि कन्नौज में ही हार गए। इस मार्मिक अपील का असर वोटरों में गया और तीनों सीटें सपा की झोली में गईं थीं।
- राजनीति में भी अजमाए अखाड़े के दांव-पेंच
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव दंगल के अलावा राजनीति के अखाड़े में भी माहिर थे। उनके दांव-पेंच राजनीति में विजय दिलाते थे। बात उस समय की है, जब वर्ष 1999 में मुलायम सिंह यादव कन्नौज और संभल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और दोनों ही सीटें जीते। कन्नौज सीट से इस्तीफा देने के बाद अखिलेश यादव को सपा से वर्ष 2000 में उपचुनाव लड़ाया था। उस दौरान बसपा से अकबर अहमद डंपी ने कड़ी टक्कर दी थी। माहौल को भांपते हुए मुलायम सिंह यादव ने कानपुर के अरौल में ब्राह्मणों को रिझाने के लिए सम्मेलन किया। यहां उन्होंने कहा था कि अगर उनसे कोई गलती हुई हो तो अखिलेश को सजा न देना। अंगौछा उठाकर उन्होंने अपने पुत्र के लिए लोकसभा कन्नौज क्षेत्र के लिए चुनाव जिताने की मार्मिक अपील की थी, उसके बाद अखिलेश यादव यह चुनाव जीत भी गए थे।
- कन्नौज के लोग बुलाते ही नहीं हैं
अक्तूबर वर्ष 2014 में मुलायम सिंह यादव कन्नौज में अंतिम बार आए थे। उस दौरान निवर्तमान सपा जिलाध्यक्ष कलीम खां के भाई व बहन के निकाह में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि अब तो कन्नौज के लोग बुलाते ही नहीं हैं। अगर किसी कार्यक्रम में बुलाएंगे, तो वह जरूर आएंगे। उससे पहले वर्ष 2006 में पुष्पराज जैन पंपी के यहां पांच पीढ़ियों वाले कार्यक्रम स्वर्ग सीढ़ी में भी शामिल हुए थे।
- दूर से देखकर रोक देते थे काफिला
सपा संरक्षक के करीबी अवधेश कुशवाहा बताते हैं कि जब भी कभी कन्नौज से नेताजी गुजरते थे, तो दूर से ही पहचान लेते थे। काफिला रुकने के बाद नाम लेकर पुकारते थे। इसके वह खुद बताते थे कि कितने दिनों बाद मुलाकात हो रही है। मुलायम सिंह के करीबी रामभजन पाल, अख्तर अली अंसारी, विजय मिश्रा और पूर्व ब्लाक प्रमुख राधेश्याम बताते हैं कि नेता जी एक बार जिसे देख लें, फिर कभी भी उसका चेहरा और नाम नहीं भूलते थे।
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सुबह दूध पीना हर रोज की आदत थी। नहाने के बाद हनुमान चालीसा का भी पाठ करते थे।
शहर के मोहल्ला आनंदीदास निवासी 68 वर्षीय बृजेंद्र नारायण उर्फ गुड्डू सक्सेना नेताजी से लेकर डिंपल तक के चुनाव में प्रस्तावक रहे हैं।
गुड्डू बताते हैं कि छिबरामऊ निवासी छोटे सिंह यादव का भांजा अजय सिंह उनके साथ पढ़ता था। इसी वजह से छोटे सिंह यादव को वह भी मामा कहते थे।
गुड्डू सक्सेना बताते हैं कि वर्ष 1980 में लोकदल नेता छोटे सिंह यादव ने मुलायम सिंह यादव से उनका परिचय कराया। इसके बाद नेताजी का उनके घर आंनदीदास मोहल्ले में आना-जाना शुरू हो गया था।
गुड्डू सक्सेना का कहना है कि एक रात घर में रुकने के दौरान मुलायम सिंह यादव ने मक्का की रोटी, बैगन का भरता, अरहर की दाल खाई थी।
अगले दिन सुबह चार बजे उठने के दौरान अपने हाथों से ही घर पर दाढ़ी बनाई थी। इस दौरान अखबार भी पढ़ा था। सुबह एक गिलास दूध भी नेताजी की आदत में शुमार था।
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वर्ष 1989 में मुलायम सिंह यादव क्रांति रथ लेकर कन्नौज पहुंचे थे, उस दौरान वह अपोजिशन लीडर थे। रात में कन्नौज में रुकने के बाद अगले दिन बिल्हौर में जनसभा की थी।
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सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का शहर के जीटी रोड किनारे रहने वाले दरोगा कटियार से भी गहरा लगाव रहा है। कन्नौज आने पर सपा संरक्षक उनसे जरूर मिलते थे।
कोआपरेटिव बैंक की मानीमऊ व कन्नौज शाखा में करीब 15 साल तक दरोगा कटियार की पत्नी दमयंती कटियार डायरेक्टर रहीं हैं।
इसके अलावा साधन सहकारी समिति तिखवा में तीन बार दरोगा कटियार अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने बताया कि रक्षामंत्री बनने के बाद मुलायम सिंह यादव कन्नौज आए थे।
वर्ष 2016 में पार्टी कार्यालय से फोन आया और दमयंती कटियार को लखनऊ बुलाकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य भी बनाया।
- तीनों सीटें जितवाने की अपील की थी
मुलायम सिंह यादव ने कन्नौज से हमेशा भावनात्मक रिश्ता रखा। वर्ष 2012 के विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में जब वह जनसभा को संबोधित करने आए तो केके इंटर कॉलेज बोर्डिंग ग्राउंड में उन्होंने कहा था कि तीनों सीटें जितवा देना, नहीं तो लोग कहेंगे कि कन्नौज में ही हार गए। इस मार्मिक अपील का असर वोटरों में गया और तीनों सीटें सपा की झोली में गईं थीं।
- राजनीति में भी अजमाए अखाड़े के दांव-पेंच
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव दंगल के अलावा राजनीति के अखाड़े में भी माहिर थे। उनके दांव-पेंच राजनीति में विजय दिलाते थे। बात उस समय की है, जब वर्ष 1999 में मुलायम सिंह यादव कन्नौज और संभल लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े और दोनों ही सीटें जीते। कन्नौज सीट से इस्तीफा देने के बाद अखिलेश यादव को सपा से वर्ष 2000 में उपचुनाव लड़ाया था। उस दौरान बसपा से अकबर अहमद डंपी ने कड़ी टक्कर दी थी। माहौल को भांपते हुए मुलायम सिंह यादव ने कानपुर के अरौल में ब्राह्मणों को रिझाने के लिए सम्मेलन किया। यहां उन्होंने कहा था कि अगर उनसे कोई गलती हुई हो तो अखिलेश को सजा न देना। अंगौछा उठाकर उन्होंने अपने पुत्र के लिए लोकसभा कन्नौज क्षेत्र के लिए चुनाव जिताने की मार्मिक अपील की थी, उसके बाद अखिलेश यादव यह चुनाव जीत भी गए थे।
- कन्नौज के लोग बुलाते ही नहीं हैं
अक्तूबर वर्ष 2014 में मुलायम सिंह यादव कन्नौज में अंतिम बार आए थे। उस दौरान निवर्तमान सपा जिलाध्यक्ष कलीम खां के भाई व बहन के निकाह में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा था कि अब तो कन्नौज के लोग बुलाते ही नहीं हैं। अगर किसी कार्यक्रम में बुलाएंगे, तो वह जरूर आएंगे। उससे पहले वर्ष 2006 में पुष्पराज जैन पंपी के यहां पांच पीढ़ियों वाले कार्यक्रम स्वर्ग सीढ़ी में भी शामिल हुए थे।
- दूर से देखकर रोक देते थे काफिला
सपा संरक्षक के करीबी अवधेश कुशवाहा बताते हैं कि जब भी कभी कन्नौज से नेताजी गुजरते थे, तो दूर से ही पहचान लेते थे। काफिला रुकने के बाद नाम लेकर पुकारते थे। इसके वह खुद बताते थे कि कितने दिनों बाद मुलाकात हो रही है। मुलायम सिंह के करीबी रामभजन पाल, अख्तर अली अंसारी, विजय मिश्रा और पूर्व ब्लाक प्रमुख राधेश्याम बताते हैं कि नेता जी एक बार जिसे देख लें, फिर कभी भी उसका चेहरा और नाम नहीं भूलते थे।