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निर्माणाधीन तहसील भवन पर कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 26 Feb 2015 11:51 PM IST
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तहसील प्रशासन ने निर्माणाधीन सदर तहसील भवन पर कब्जा कर लिया है। इसकी वजह से भवन हैंडओवर नहीं हो सका। तहसील के महत्वपूर्ण अभिलेख जर्जर भवनों में रखे हैं।
सदर तहसील भवन का निर्माण सितंबर 2009 में शुरू कराया गया था। इसका निर्माण दो वर्ष में पूरा कराने का लक्ष्य बनाया गया था। अभी तक भवन पूरा नहीं बना है। इसे हैंडओवर कराने के बजाय तहसील प्रशासन भवन के कमरों में ताला डालकर मनमाने तरीके से उपयोग करने में जुटा है। सूत्रों की मानें तो भवन का निर्माण अभी 70 फीसदी हुआ है। भवन निर्माण में हो रही देरी पर तहसील प्रशासन चुप्पी साधे हैं।
कई लेखपालों ने निर्माणाधीन भवन के कमरों में ताला डालकर आवासीय परिसर बना रखा है। यहीं नहीं अधिकारी व कर्मचारी कमरों में बैठकर काम निपटा रहे हैं। जबकि कई महत्वपूर्ण पत्रावलियों को सुरक्षित रखने के लिए जर्जर भवन का उपयोग किया जा रहा है। आरके दफ्तर का भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। दीवारें दरार दे चुकी हैं। इस कार्यालय को नए भवन में शिफ्ट कराने में अधिकारी हैंडओवर न होने का हवाला दे रहे हैं।
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नए भवन में कर्मचारियों ने कटिया डालकर बिजली ले ली है। उधर कार्यदायी संस्था उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम लि. के अभियंता हरीलाल का कहना है कि शेष बजट शासन से मिल चुका है। जल्द काम पूरा कराकर मार्च के अंत तक भवन को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
फाइलें गुम होने से वादकारियों को दिक्कतें
कन्नौज। सदर तहसील के लायर्स बार एसोसियेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार पांडेय का कहना है कि प्रत्येक माह में दो बार तहसील दिवस निर्माणाधीन भवन में लगता है। आला अफसर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि रजिस्ट्रार दफ्तर को जर्जर भवन में संचालित है।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष केसी शर्मा का कहना है कि भूलेख कंप्यूटरीकरण कक्ष भी जर्जर भवन में संचालित हैं। इससे किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कई घंटे दफ्तर के सामने जमीन पर बैठकर गुजारने पड़ते हैं। कूड़ा-कचरा से मच्छरों के हमले से वादकारियों व किसानों को जूझना पड़ता है। जल्द ही इस बारे में कोई पहल न हुई तो मुख्यमंत्री को मामले से अवगत कराया जाएगा।
लेखपालों ने बना डाला आशियाना
कन्नौज। अधिवक्ता रामबाबू राठौर, अजय कुमार यादव, नईम खां, नाजिम अख्तर, आछेलाल की मानें तो काफी लेखपालों ने निर्माणाधीन भवन पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया है। कमरों में ताला डालकर निजी उपयोग में ला रहे हैं। दिनभर उनके कक्ष में ताला लटकता रहता है। सदर तहसील आने वाले वादकारियों को लेखपाल ढूंढना मुश्किल हो जाता है। जबकि रात को संबंधित लेखपाल आराम करने को तहसील भवन पहुंच जाते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
-सदर तहसील भवन का निर्माण कार्य बजट के अभाव में प्रभावित हुआ था। स्वीकृत लागत से अधिक धनराशि के लिए अतिरिक्त बजट शासन से मांगा गया था। इसका पैसा आ चुका है। अब काम को जल्द पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
...रमेशचंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी कन्नौज।
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सदर तहसील भवन का निर्माण सितंबर 2009 में शुरू कराया गया था। इसका निर्माण दो वर्ष में पूरा कराने का लक्ष्य बनाया गया था। अभी तक भवन पूरा नहीं बना है। इसे हैंडओवर कराने के बजाय तहसील प्रशासन भवन के कमरों में ताला डालकर मनमाने तरीके से उपयोग करने में जुटा है। सूत्रों की मानें तो भवन का निर्माण अभी 70 फीसदी हुआ है। भवन निर्माण में हो रही देरी पर तहसील प्रशासन चुप्पी साधे हैं।
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कई लेखपालों ने निर्माणाधीन भवन के कमरों में ताला डालकर आवासीय परिसर बना रखा है। यहीं नहीं अधिकारी व कर्मचारी कमरों में बैठकर काम निपटा रहे हैं। जबकि कई महत्वपूर्ण पत्रावलियों को सुरक्षित रखने के लिए जर्जर भवन का उपयोग किया जा रहा है। आरके दफ्तर का भवन भी जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। दीवारें दरार दे चुकी हैं। इस कार्यालय को नए भवन में शिफ्ट कराने में अधिकारी हैंडओवर न होने का हवाला दे रहे हैं।
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नए भवन में कर्मचारियों ने कटिया डालकर बिजली ले ली है। उधर कार्यदायी संस्था उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम लि. के अभियंता हरीलाल का कहना है कि शेष बजट शासन से मिल चुका है। जल्द काम पूरा कराकर मार्च के अंत तक भवन को हैंडओवर कर दिया जाएगा।
फाइलें गुम होने से वादकारियों को दिक्कतें
कन्नौज। सदर तहसील के लायर्स बार एसोसियेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार पांडेय का कहना है कि प्रत्येक माह में दो बार तहसील दिवस निर्माणाधीन भवन में लगता है। आला अफसर भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि रजिस्ट्रार दफ्तर को जर्जर भवन में संचालित है।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष केसी शर्मा का कहना है कि भूलेख कंप्यूटरीकरण कक्ष भी जर्जर भवन में संचालित हैं। इससे किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कई घंटे दफ्तर के सामने जमीन पर बैठकर गुजारने पड़ते हैं। कूड़ा-कचरा से मच्छरों के हमले से वादकारियों व किसानों को जूझना पड़ता है। जल्द ही इस बारे में कोई पहल न हुई तो मुख्यमंत्री को मामले से अवगत कराया जाएगा।
लेखपालों ने बना डाला आशियाना
कन्नौज। अधिवक्ता रामबाबू राठौर, अजय कुमार यादव, नईम खां, नाजिम अख्तर, आछेलाल की मानें तो काफी लेखपालों ने निर्माणाधीन भवन पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया है। कमरों में ताला डालकर निजी उपयोग में ला रहे हैं। दिनभर उनके कक्ष में ताला लटकता रहता है। सदर तहसील आने वाले वादकारियों को लेखपाल ढूंढना मुश्किल हो जाता है। जबकि रात को संबंधित लेखपाल आराम करने को तहसील भवन पहुंच जाते हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
-सदर तहसील भवन का निर्माण कार्य बजट के अभाव में प्रभावित हुआ था। स्वीकृत लागत से अधिक धनराशि के लिए अतिरिक्त बजट शासन से मांगा गया था। इसका पैसा आ चुका है। अब काम को जल्द पूरा कराने के लिए कार्यदायी संस्था को कड़े निर्देश दिए गए हैं।
...रमेशचंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी कन्नौज।