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जब चोट खाई, तब हेलमेट की याद आई

Tue, 08 Dec 2015 12:05 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Tue, 08 Dec 2015 12:05 AM IST
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Bridging the injury , then missed helmet

कहते हैं कि जीवन अनमोल है और यदि सावधानी हटी तो

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समझो दुर्घटना घटी। तमाम लोग यह बात खतरे का सामना करने के बाद समझ पाते हैं। हेलमेट के मामले में भी कई लोगों के साथ ऐसा ही वाकया हुआ। बाइक फिसलने एवं टक्कर के दौरान चोट लगने के बाद तमाम लोगों ने हेलमेट के महत्व को समझा।

अब उन्होंने अपनी आदत बदल ली है और हेलमेट लगाने के बाद ही दोपहिया वाहन चलाते हैं। कन्नौज में कार्यरत लोकनिर्माण विभाग के कर्मचारी भारत पाल ने बताया कि वह काफी समय पहले एक बार बाइक असंतुलित होने पर गिर पड़े थे। तब उनके सिर में चोटें आई थीं।

इलाज कराने के बाद उनकी हालत में सुधार तो हुआ, पर जख्म के निशान आज तक हैं। दर्द भी झेलना पड़ा और पैसे की बर्बादी भी हुई। हादसे के बाद उन्होंने हेलमेट खरीदा और उसे नियमित रूप से पहनकर ही सफर करने का संकल्प लिया। जरा सी दूरी पर जाना होता है तो भी वे बिना हेलमेट के नहीं निकलते हैं।

रितुकाला के निकट निर्माणाधीन आसरा आवास योजना में ठेकेदार के तौर पर कार्यरत बिहार निवासी गौतम शर्मा का कहना है कि बाइक चलाने के दौरान वह आज तक दुर्घटनाग्रस्त तो नहीं हुए, लेकिन उन्होंने बाइक सवारों को दुर्घटना का शिकार होते देखा है। यही नहीं मौके पर ही दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मौत होते भी देखी।

तब से उन्होंने निर्णय लिया कि बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन नहीं चलाएंगे। रितुकाला से सरायमीरा आते समय भी हेलमेट लगाकर ही निकलते हैं। हेलमेट के फायदे ही फायदे हैं। मोहन दुबे का कहना है कि व्यापार के सिलसिले में अक्सर जिले के कई क्षेत्रों का भ्रमण करते हैं और बाइक चलाने के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट अवश्य लगाते हैं।

कहा कि हेलमेट लगाकर बाइक आदि चलाने से बरसात, गरमी, सरदी से भी जहां बचाव होता है, वहीं आंखों में धूल, धुआं और गंदगी नहीं पहुंच पाती है। इसके अलावा शरीर के सबसे संवेदनशील और नाजुक हिस्से सिर की सुरक्षा भी बनी रहती है। हेलमेट लगाकर बाइक चलाने में कार जैसा आनंद आता है। थकान भी नहीं होती है।

अनिल कुमार का कहना है कि एक बार बाइक चलाने के दौरान बाइक समेत संतुलन बिगड़ जाने पर गिरे थे। इस हादसे में तब उनके माथे पर चोट लगी थी। उपचार कराकर ठीक होने के बाद हेलमेट को उन्होंने अब अपना साथी बना लिया। बताया कि दोपहिया वाहन घर से निकालते समय पहले हेलमेट अवश्यक पहनते हैं और इसके बाद ही वाहन को घर के बाहर खड़ा करते हैं।

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