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भाजपा के बंद से जनजीवन ठहरा

Fri, 04 Dec 2015 12:21 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Fri, 04 Dec 2015 12:21 AM IST
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BJP put off life

जुलाई व अक्तूबर महीने में हुए सांप्रदायिक दंगों के

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मामलों में नामजद भाजपा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुब्रत पाठक के जेल जाने के विरोध में गुरुवार को भाजपा के कन्नौज बंद के दौरान शहर में सुबह के वक्त जहां अधिकतर दुकानें बंद रहीं। वहीं दोपहर के बाद कई स्थानों पर कुछ दुकानें खोल दी गई।

बंदी के चलते शहर के ज्यादातर बाजारों में सन्नाटे की स्थिति रही। बंदी को देखते हुए ग्राहक भी घरों से कम मात्रा में ही निकले। बंदी के चलते जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। लाखन चौराहा पर जहां दुकानें रोज की तरह खुलीं वहीं अन्य मोहल्लों में भी जगह-जगह इक्का-दुक्का दुकानें खुली रहीं। वहीं बंदी को लेकर प्रशासन भी चौकन्ना रहा।

जगह-जगह सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस व आईटीबीपी के जवान बैरियरों पर तैनात रहे। खुफिया तंत्र के अधिकारी भी घूम-घूमकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। वहीं देर शाम बंदी के दौरान पूरी तरह से शांति कायम रहने पर प्रशासन व अफसरों ने भी राहत की सांस ली।

ज्ञात हो कि बुधवार को भाजपा नेता सुब्रत पाठक और भाजयुमो जिलाध्यक्ष सौरभ कटियार ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में सरेंडर कर दिया था। दंगा प्रकरण में सुब्रत पाठक समेत अन्य भाजपाइयों पर लिखाए गए मुकदमों को फर्जी करार देते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बुधवार को तहसील में धरना समाप्त होने के बाद गुरुवार को कन्नौज बंद का आह्वान किया था।

इसके मद्देनजर गुरुवार की तड़के से ही भाजपाई सक्रिय हो गए। नगर पालिका के सभासदों, दि अतर्स एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष समेत अन्य पदाधिकारियों ने भी सरायमीरा, मकरंदनगर, ग्वालमैदान, पठकाना, तिर्वा-कन्नौज रोड, सरायमीरा-कन्नौज रोड, सब्जी मंडी रोड, तलैया चौकी, बड़ा बाजार, मिठाई वाली गली, मकरंदनगर-कन्नौज रोड पर एक-दो की संख्या में घूमकर दुकानदारों से संपर्क किया और मार्केट बंद रखने का आह्वान किया।

कहीं हाथ जोड़कर तो कहीं संबंधों का हवाला देकर दुकानें बंद भी कराई गईं। वहीं कई मोहल्लों में लोगों ने खुद ही दुकानें बंद कर दीं। यही वजह रही कि इन क्षेत्रों में सुबह से लेकर दोपहर बाद तक ज्यादातर मार्केट में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति रही। ग्रामीण क्षेत्र से भी कम लोग आए। जो लोग निकले भी उनमें से ज्यादातर को बैरंग लौटना पड़ा।

अधिकांश मेडिकल स्टोर भी बंद रहे, जिस कारण दवा लेने के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा। उधर, दि अतर्स एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश पाठक की अगुवाई में अधिकांश इत्र कारखानों में भी बंदी रही। डेग व भभके ठंडे पड़े रहे। इत्र से जुड़े अगरबत्ती, धूपबत्ती, गुलाब जब आदि से जुड़ी दुकानें भी नहीं खुलीं।

फूलों की आढ़त पर भी कामकाज ठप रहा। बंदी की जानकारी मिलते ही गुरुवार को ज्यादातर किसानों ने गुलाब समेत अन्य फूलों की आज तुड़ाई नहीं की। मिठाई वाली गली में ग्रामीण क्षेत्र से आए दूधिये घंटों दुकान के बाहर पीपे रखकर इंतजार करते नजर आए।

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