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बैंक ने वसूली का दबाव बनाया, किसान ने जहर खा दी जान
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मृतक के रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : KANNAUJ
इंदरगढ़(कन्नौज)। 2007 में भूमि विकास बैंक से लिया गया 35 हजार रुपये का कर्ज किसान नहीं चुका सका। इससे बकाया बढ़कर 90 हजार हो गया। गुरुवार को बैंक की टीम ने किसान पर वसूली का दबाव बनाया तो वह टूट गया। सल्फास खाकर जान दे दी। बेटे का आरोप है कि बैंक की टीम ने पिता को अपमानित किया था। इससे वह आहत हो गए। उन्होंने जहर खा लिया। इंदरगढ़ थाने में चार लोगों के खिलाफ किसान के बेटे ने तहरीर दी है। अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
इंदरगढ़ थानाक्षेत्र के भगवंतापुर गांव निवासी किसान रतिराम यादव (55) के पास तीन एकड़ खेती है। परिवार में दो विवाहित बेटे राकेश और राजू हैं। पत्नी नहीं है। रतिराम ने 2007 में भूमि विकास बैंक की तिर्वा शाखा से ट्यूबवेल लगाने के लिए 35 हजार रुपये का लोन लिया था। कर्ज न चुकाने के कारण यह 90 हजार हो गया। गुरुवार को भूमि विकास बैंक के चार लोग रिकवरी करने के लिए रतिराम के घर पहुंचे। बड़े बेटे राकेश का आरोप है कि बैंक की टीम ने पिता को जबरन उठाकर गाड़ी में बैठा लिया। इन्होंने अपमानित किया। वह लोग रक म जल्द चुकाने की दुहाई देते रहे। वह नहीं माने। किसी तरह 15 हजार रुपये दिए, तब पिता को छोड़ा। ली गई रकम की रसीद भी नहीं दी गई। बैंक कर्मियों के जाने के बाद पिता आहत हो गए। गुरुवार शाम करीब चार बजे सल्फास खा ली। हालत बिगड़ने पर मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। हालत में सुधार न होने पर कानपुर रेफर कर दिया गया। कानपुर ले जाते समय शिवराजपुर के पास पिता की मौत हो गई। देर रात करीब दो बजे इंदरगढ़ थाने में मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बैंक मैनेजर जगजीवन राम ने बताया कि मुख्यालय से आदेश होने के कारण रिकवरी की जा रही है। किसी को पकड़ने का अधिकार नहीं है। गुरुवार को बैंक की टीम इंदरगढ़ में नहीं बल्कि उमर्दा में थी। शुक्रवार को भी कोई टीम इंदरगढ़ नहीं गई है। बैंक की रिकवरी टीम पर जो भी आरोप लगाए गए, वह पूरी तरह से गलत हैं। पुलिस की जांच में हकीकत खुद सामने आ जाएगी। उधर, इंदरगढ़ थानाध्यक्ष सुजीत वर्मा ने बताया कि किसान रतिराम के बेटे राकेश ने बैंक की रिकवरी टीम के चार सदस्यों के खिलाफ तहरीर दी है। मामले की जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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इंदरगढ़ थानाक्षेत्र के भगवंतापुर गांव निवासी किसान रतिराम यादव (55) के पास तीन एकड़ खेती है। परिवार में दो विवाहित बेटे राकेश और राजू हैं। पत्नी नहीं है। रतिराम ने 2007 में भूमि विकास बैंक की तिर्वा शाखा से ट्यूबवेल लगाने के लिए 35 हजार रुपये का लोन लिया था। कर्ज न चुकाने के कारण यह 90 हजार हो गया। गुरुवार को भूमि विकास बैंक के चार लोग रिकवरी करने के लिए रतिराम के घर पहुंचे। बड़े बेटे राकेश का आरोप है कि बैंक की टीम ने पिता को जबरन उठाकर गाड़ी में बैठा लिया। इन्होंने अपमानित किया। वह लोग रक म जल्द चुकाने की दुहाई देते रहे। वह नहीं माने। किसी तरह 15 हजार रुपये दिए, तब पिता को छोड़ा। ली गई रकम की रसीद भी नहीं दी गई। बैंक कर्मियों के जाने के बाद पिता आहत हो गए। गुरुवार शाम करीब चार बजे सल्फास खा ली। हालत बिगड़ने पर मेडिकल कालेज में भर्ती कराया। हालत में सुधार न होने पर कानपुर रेफर कर दिया गया। कानपुर ले जाते समय शिवराजपुर के पास पिता की मौत हो गई। देर रात करीब दो बजे इंदरगढ़ थाने में मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
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बैंक मैनेजर जगजीवन राम ने बताया कि मुख्यालय से आदेश होने के कारण रिकवरी की जा रही है। किसी को पकड़ने का अधिकार नहीं है। गुरुवार को बैंक की टीम इंदरगढ़ में नहीं बल्कि उमर्दा में थी। शुक्रवार को भी कोई टीम इंदरगढ़ नहीं गई है। बैंक की रिकवरी टीम पर जो भी आरोप लगाए गए, वह पूरी तरह से गलत हैं। पुलिस की जांच में हकीकत खुद सामने आ जाएगी। उधर, इंदरगढ़ थानाध्यक्ष सुजीत वर्मा ने बताया कि किसान रतिराम के बेटे राकेश ने बैंक की रिकवरी टीम के चार सदस्यों के खिलाफ तहरीर दी है। मामले की जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
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