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नहीं रहे आजादी के पुरोधा अनंत श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
Updated Wed, 28 Dec 2016 11:01 PM IST
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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देश को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनंत श्रीवास्तव (96) का बुधवार को निधन हो गया। वह एक माह से बीमार चल रहे थे। गुरुवार को महादेवी गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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मौत की खबर मिलते ही एसडीएम सदर अरुण कुमार सहित कई आला अधिकारियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि पौत्र गोपेश श्रीवास्तव चेन्नई में वैज्ञानिक और पौत्री दीपशिखा गजरौला में डाक्टर है। दोनों के आने के आने के बाद गुरुवार को महादेवी गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका एक पुत्र उमेश श्रीवास्तव है।
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कानपुर सेंट्रल बम ब्लास्ट मामले में मिली थी मौत की सजा
पुत्र उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि 1942 में कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर क्रांतिकारियों ने बम ब्लास्ट किया था। जिसमें अंग्रेजी हुकूमत ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी। स्वतंत्रता मिल जाने पर सरकार ने उनकी फांसी की सजा माफ कर दी थी।
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दो बार गए थे जेल
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अनंत श्रीवास्तव अंग्रेजों से लोहा लेते हुए दो बार जेल गए। एक बार तीन माह के लिए तो दूसरी बार तीन साल कानपुर सेंट्रल जेल में रहे।
कानपुर के मूल निवासी थे अनंत
अनंत श्रीवास्तव मूलत: कानपुर के दर्शनपुरवा के निवासी थे। आजादी के बाद वह सुल्तानपुर में सेंट्रल बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत रहे। उसके बाद वह इलाहाबाद चले गए। वहां वह राजरूपपुर में रहकर नील पैकिंग का काम करते थे। उसके बाद वह कन्नौज आ गए। जहां प्राइवेट नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करने लगे।