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कांग्रेस के डूबते जहाज पर अखिलेश सवार

Sat, 11 Feb 2017 11:01 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज Updated Sat, 11 Feb 2017 11:01 PM IST
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Akhilesh Yadav aboard the sinking ship of Congress
नसीमुद्दीन सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा पर चुटकी लेते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में विकास का ढिंढोरा पीटने वालों को आखिर गठबंधन की जरूरत क्यों पड़ गई। कांग्रेस तो डूबता जहाज है, इस पर जो सवार हुआ उसका डूबना तय है। नोटबंदी को बिना सोचे, समझे का फैसला बताया। बसपा एक ऐसी पार्टी है, जिसके पास अपना बेस वोट है, यदि मुस्लिम समाज पूरी तरीके से मिल जाए तो विरोधी दल के लोग अपने प्रत्याशियों की जमानत भी नहीं बचा पाएंगे। सुरक्षित सीट के प्रत्याशी अनुराग सिंह के समर्थन में जनता से अपील की।

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कहा कि सबका साथ, सबका विकास का नारा देने वाली भाजपा ने पूरे प्रदेश में एक भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं बनाया। नोटबंदी को बिना सोचे, समझे का फैसला बताया। जनता के तेवर को देखते हुए प्रधानमंत्री अब गलती छिपाने के लिए कभी सीना पीटने लगते हैं तो कभी ताली बजाने लगते हैं और ताली कौन बजाता है यह सभी जानते। मोदी अब तक सात बार रोए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि मंदिर-मस्जिद के नाम पर वोट नहीं मांगेंगे, भाजपा के घोषणापत्र में मंदिर बनाना शामिल है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ चुनाव आयोग मुकदमा दर्ज कर जेल भेजे।
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 भाजपा तीन तलाक को लेकर राजनीति गरमाए हुए है। यह हमारा मामला हम स्वयं सुलझा लेंगे। इसमें किसी को पड़ने की जरूरत नहीं है। सपा ने कहा था कि वह सत्ता में आने पर अल्पसंख्यकों को आबादी के हिसाब से रिजर्वेशन देगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया। जेल में बंद बेगुनाह लोगों को छोड़ेंगे। हां सपा ने दोबारा नौ लोगों को जेल में डलवा दिया।

प्रदेश में काम का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। सपा ने पांच वर्ष में पांच सौ दंगे, सीओ जियाउल हक व तंजीर अहमद, इखलाख खां का मर्डर जरूर कराया है। यह इनके प्रमुख कामों में है, जो अपने पिता का न हुआ तो वह जनता का क्या होगा। उनके पिता स्वयं कहते हैं कि अखिलेश मुसलमान विरोधी है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष अजय भारती, सतीश चंद्र जाटव, अनुराग सिंह, तहसीन सिद्दीकी, नरेंद्र कुशवाहा, शिवांक बाजपेयी, कमलेश कटियार आदि रहे।


सरकार के निर्णय को ठहराया गलत
मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं पहले मदरसों में आयोजित होती रही, लेकिन तीन वर्षों से यह परीक्षाएं अब इंटर कालेजों में कराई जाती। नसीमुद्दीन ने इस मामले में कहा कि इन परीक्षाओं के दूसरी जगह होने से प्रदेश में बड़ी संख्या में लड़कियों ने आगे की पढ़ाई बंद कर दी है। यह फैसला गलत है।

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