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आशा से सेटिंग कर नर्सिंग होम भर रहे जेब
Fri, 22 Feb 2019 12:35 AM IST
gaurav gaurav
kannauj
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Published by: gaurav gaurav
Updated Fri, 22 Feb 2019 12:35 AM IST
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स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने और प्रसूताओं को इलाज मुहैया कराने के लिए तैनात आशा कार्यकर्ता विभाग से ज्यादा निजी अस्पतालों पर मेहरबान हैं। प्रसूताओं को सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव बताकर नर्सिंग होम में भर्ती कराया जा रहा है। इसके बदले नर्सिंग होम संचालक इन्हें मोटा कमीशन देते हैं।
जिले में कुल 1360 आशा कार्यकर्ता और 80 संगिनी बतौर स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्य कर रही हैं। सरकारी अस्पतालों में जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव कराने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से 600 रुपये मिलते हैं। अधिकांश आशा कार्यकर्ताओं को सरकार की ओर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि रास नहीं आ रही है।
वह प्रसूताओं को गुमराह कर सरकारी अस्पतालों के बजाय नर्सिंग होम में ले जाती हैं। अप्रैल 2018 से अब तक जिले में 26 हजार 552 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें जिले के दो जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज, 11 सीएचसी और 34 पीएचसी में 19 हजार 466 प्रसूताओं ने संस्थागत प्रसव कराया। वहीं जिले के 25 नर्सिंग होमों में सात हजार 86 प्रसूताओं ने प्रसव कराया है।
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सूत्रों की मानें तो नर्सिंग होम में प्रसूताओं को आशा कार्यकर्ता भी पहुंचा रही हैं। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इसकी शिकायतें भी होती रही हैं। बताया जाता है कि अधिकांश आशा कार्यकर्ता निजी अस्पतालों के संपर्क रहती हैं। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव बताकर उन्हें निजी अस्पतालों में पहुंचा देती हैं। इसके बदले उन्हें अधिक कमीशन मिलता है। सीएमओ डा. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि नर्सिंग होम में प्रसूताओं को भर्ती कराने वाली आशाओं को चिन्ह्ति किया जा रहा है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में कुल 1360 आशा कार्यकर्ता और 80 संगिनी बतौर स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्य कर रही हैं। सरकारी अस्पतालों में जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव कराने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से 600 रुपये मिलते हैं। अधिकांश आशा कार्यकर्ताओं को सरकार की ओर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि रास नहीं आ रही है।
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वह प्रसूताओं को गुमराह कर सरकारी अस्पतालों के बजाय नर्सिंग होम में ले जाती हैं। अप्रैल 2018 से अब तक जिले में 26 हजार 552 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें जिले के दो जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज, 11 सीएचसी और 34 पीएचसी में 19 हजार 466 प्रसूताओं ने संस्थागत प्रसव कराया। वहीं जिले के 25 नर्सिंग होमों में सात हजार 86 प्रसूताओं ने प्रसव कराया है।
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सूत्रों की मानें तो नर्सिंग होम में प्रसूताओं को आशा कार्यकर्ता भी पहुंचा रही हैं। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से इसकी शिकायतें भी होती रही हैं। बताया जाता है कि अधिकांश आशा कार्यकर्ता निजी अस्पतालों के संपर्क रहती हैं। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव बताकर उन्हें निजी अस्पतालों में पहुंचा देती हैं। इसके बदले उन्हें अधिक कमीशन मिलता है। सीएमओ डा. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि नर्सिंग होम में प्रसूताओं को भर्ती कराने वाली आशाओं को चिन्ह्ति किया जा रहा है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।