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कानूनी दांव-पेंच में फिर फंसी टेंडर प्रक्रिया
Updated Mon, 19 Jun 2017 12:19 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कन्नौज।
प्रदेश में योगी सरकार को सत्ता संभाले तीन माह का समय गुजर चुका है, लेकिन अभी तक खनन के पट्टे शुरू न होने से घरेलू से लेकर सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बालू का रेट तीन हजार के पार पहुंच गया है। यही हाल मौरंग की ट्राली का है। 3500 रुपये ट्राली बिकने वाली मौरंग बारह हजार में बिक रही है। जिले में नौ घाटों के लिए दूसरी बार निकाले गए बालू खनन पट्टे फिर कानूनी दांवपेच में फंसने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि बालू खनन के लिए पड़े पट्टे निरस्त हो सकते हैं।
प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद अवैध बालू के खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। खनन की परमीशन जिला प्रशासन ई-टेंडरिंग के माध्यम से पट्टे आवंटित करके ही प्रदान करेगा। नतीजा जिले में विभिन्न स्थानों पर बालू, मौरंग, गिट्टी मैटेरियल की बिक्री करने वाले दुकानदार बेरोजगार हो गए हैं। सरकारी व गैर सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे। प्रशासन व नेताओं के बीच छिड़े द्वंद्व युद्ध का नतीजा है कि करीब दो माह से ई-टेंडरिंग के माध्यम से खनन पट्टों के लिए कवायद जारी है। अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। नेताओं की खींचतान में जनता बुरी तरह से पिस रही है। मजबूरी में निर्माण कराने वालों को बालू, मौरंग दोगुने दाम में खरीदनी पड़ रही है।
प्रशासन की ओर से दूसरी बार नौ घाटों के लिए निकाले गए बालू खनन के पट्टे को लेकर सभी को उम्मीद थी कि इस बार टेंडर प्रक्रिया हो जाने के बाद घाटों से बालू की उठान शुरू हो जाएगी, लेकिन शनिवार को हुए बवाल ने सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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विभागीय सूत्रों का कहना है कि पिछली बार दूसरे जिलों से कम रेट व नौ घाटों में दो घाटों के लिए एक-एक टेंडर पड़ने के कारण टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। इस बार भी महज तीन घाटों में एक-एक फर्म ने टेंडर डाला है। इस कारण टेंडर पास होने की उम्मीद कम है।
जिलाधिकारी जगदीश प्रसाद का कहना है कि टेंडर खुलने के बाद कंपेरिंग लिस्ट बनती है। तीनों घाटों के लिए डाले गए टेंडर में रेट का अनुपात सहित अन्य चीजों का परीक्षण किया जा रहा है। यह सबकुछ देखने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
-- ठेकेदारों की आपसी खींचतान से पिस रही जनता
-- खनन के पट्टे चालू न होने से निर्माण कार्य हो रहे प्रभावित
-- बालू ट्राली तीन हजार, मौरंग ट्राली का बारह हजार रुपये पहुंची
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कन्नौज।
प्रदेश में योगी सरकार को सत्ता संभाले तीन माह का समय गुजर चुका है, लेकिन अभी तक खनन के पट्टे शुरू न होने से घरेलू से लेकर सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। बालू का रेट तीन हजार के पार पहुंच गया है। यही हाल मौरंग की ट्राली का है। 3500 रुपये ट्राली बिकने वाली मौरंग बारह हजार में बिक रही है। जिले में नौ घाटों के लिए दूसरी बार निकाले गए बालू खनन पट्टे फिर कानूनी दांवपेच में फंसने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि बालू खनन के लिए पड़े पट्टे निरस्त हो सकते हैं।
प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद अवैध बालू के खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। खनन की परमीशन जिला प्रशासन ई-टेंडरिंग के माध्यम से पट्टे आवंटित करके ही प्रदान करेगा। नतीजा जिले में विभिन्न स्थानों पर बालू, मौरंग, गिट्टी मैटेरियल की बिक्री करने वाले दुकानदार बेरोजगार हो गए हैं। सरकारी व गैर सरकारी निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे। प्रशासन व नेताओं के बीच छिड़े द्वंद्व युद्ध का नतीजा है कि करीब दो माह से ई-टेंडरिंग के माध्यम से खनन पट्टों के लिए कवायद जारी है। अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। नेताओं की खींचतान में जनता बुरी तरह से पिस रही है। मजबूरी में निर्माण कराने वालों को बालू, मौरंग दोगुने दाम में खरीदनी पड़ रही है।
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प्रशासन की ओर से दूसरी बार नौ घाटों के लिए निकाले गए बालू खनन के पट्टे को लेकर सभी को उम्मीद थी कि इस बार टेंडर प्रक्रिया हो जाने के बाद घाटों से बालू की उठान शुरू हो जाएगी, लेकिन शनिवार को हुए बवाल ने सभी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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विभागीय सूत्रों का कहना है कि पिछली बार दूसरे जिलों से कम रेट व नौ घाटों में दो घाटों के लिए एक-एक टेंडर पड़ने के कारण टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई थी। इस बार भी महज तीन घाटों में एक-एक फर्म ने टेंडर डाला है। इस कारण टेंडर पास होने की उम्मीद कम है।
जिलाधिकारी जगदीश प्रसाद का कहना है कि टेंडर खुलने के बाद कंपेरिंग लिस्ट बनती है। तीनों घाटों के लिए डाले गए टेंडर में रेट का अनुपात सहित अन्य चीजों का परीक्षण किया जा रहा है। यह सबकुछ देखने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
-- ठेकेदारों की आपसी खींचतान से पिस रही जनता
-- खनन के पट्टे चालू न होने से निर्माण कार्य हो रहे प्रभावित
-- बालू ट्राली तीन हजार, मौरंग ट्राली का बारह हजार रुपये पहुंची