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Kannauj News: 86 लाख रुपये भी न बचा सकें 805 बेजुबान

Fri, 06 Jan 2023 10:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jan 2023 10:54 PM IST
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805 dumb people could not save even Rs 86 lakh
फोटो:03 - ब्लॉक सदर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सहजापुर में बने गोवंश आश्रय स्थल में खड़े कमजोर पशु। सं? - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। छुट्टा मवेशियों की संख्या कम करने और उनकी देखरेख के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना चल रही है। इसके तहत तीन सालों में पशुपालकों को 86 लाख रुपये दिया गया है। इसके बाद भी 50 फीसदी पशुओं की मौत हो गई है। 1587 में से अब 782 मवेशी ही बचे हैं।
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जनपद में दिसंबर 2019 से मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना शुरू हुई है। तब से नवंबर 2022 तक तीन सालों में पशुपालकों के खातों में धीरे-धीरे 85,89,630 रुपये भेजा जा चुका है। पशु पालन विभाग के मुताबिक पशु पालकों को 1587 निराश्रित मवेशी पालन-पोषण के लिए दिए गए थे। तीन सालों में 805 मवेशियों की अलग-अलग कारणों से मौत हो गई। अब 507 लोगों के पास कुल 782 पशु ही बचे हैं। इन्हे भी नवंबर 2022 में 6.74 लाख की किस्त भेजी जा चुकी है।
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ब्लॉकवार पशुपालकों, गोवंश मरने का आंकड़ा
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ब्लॉक पशुपालक गोवंश मृत
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कन्नौज 111 149 142
जलालाबाद 28 29 25
गुगरापुर 29 61 32
उमर्दा 145 266 326
छिबरामऊ 80 109 74
सौरिख 27 38 46
तालग्राम 20 32 54
हसेरन 67 98 106
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केस नंबर एक
ब्लॉक उमर्दा क्षेत्र के परसरामऊ के मदारीपुर निवासी सर्वेश कुमार ने बताया कि दो साल पहले उन्होंने चार मवेशी सहभागिता योजना के तहत प्रधान से लिए थे। दो मवेशियों की मौत एक साल पहले हो गई है। डॉक्टर आए थे, उन्होंने दवाएं दी, उसके बाद भी मवेशियों को नहीं बचाया जा सका। करीब छह महीने से रुपया भी नहीं आ रहा है।
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केस नंबर दो
तिर्वा तहसील क्षेत्र के मझरेठा निवासी रामप्रकाश बताते हैं कि दो साल पहले उन्होंने चार पशु लिए थे। एक साल बाद दो पशुओं की मौत हो गई। एक मवेशी के कीड़ा हो गए थे, जबकि दूसरे की सर्दी के चलते मौत हो गई थी। प्रधान से जब बीमारी के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि मवेशी को पालते हो तो खुद ही इलाज कराओ। प्राइवेट डॉक्टर से ही दवा कराते रहे।
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यह है नियम
सरकार ने मुख्यमंत्री बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना चला रखी है। इसके तहत कोई भी व्यक्ति अधिकतम चार निराश्रित पशुओं को देखरेख के लिए ले सकता है। उसके एवज में पशु पालन विभाग 30 रुपये प्रति पशु के हिसाब से देता है।

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बयान
फोटो:05- डॉ. कर्णवीर सिंह।
जो पशु सहभागिता पर दिए गए हैं, वह प्रथम श्रेणी के नहीं हैं। अगर अच्छे होते तो पशु पालक छोड़ते ही नहीं। मवेशी जब पॉलिथीन व कागज खाते हैं तो उनकी उम्र कम होती है। लाइलाज बीमारी होने पर भी मृत हो जाते हैं।
डॉ. कर्णवीर सिंह, सीवीओ
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