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Kannauj News: 21 लाख पर्यटकों ने किया इत्रनगरी का दीदार
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कन्नौज। विश्व पर्यटन दिवस पर इत्र नगरी की ऐतिहासिक विरासत एक बार फिर सुर्खियों में है। सम्राट हर्षवर्धन की राजधानी रहा कन्नौज आज अपने पांच हजार साल पुराने इत्र कारोबार और प्राचीन धरोहरों के दम पर पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।
जीटी रोड किनारे स्थित राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां, हर्ष टीला के अवशेष, राजा जयचंद्र का किला, अनोखा कांच मंदिर और बाबा गौरीशंकर मंदिर जिले की गौरवशाली गाथा कहते हैं। संगोष्ठी में पर्यटन अधिकारी ने बताया कि इन स्थलों को देखने के लिए साल 2025-26 में 21 लाख से अधिक पर्यटक कन्नौज आए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
पर्यटन विभाग अब इत्र को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी में है। इत्र पर्यटन सर्किट के तहत पर्यटक खेत से लेकर भट्ठी तक इत्र बनने की पूरी प्रक्रिया देख सकेंगे। मिट्टी का इत्र, केवड़ा, गुलाब और चमेली के इत्र की खुशबू पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचती है। अतर एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी बताते हैं कि विदेशी पर्यटक खासतौर पर प्राकृतिक इत्र देखने आते हैं। उनके आने से स्थानीय कारीगरों को रोजगार भी मिल रहा है।
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जिला प्रशासन भी पर्यटन स्थलों पर लाइट, रास्ते और गाइड की सुविधा बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐतिहासिक स्थलों का समुचित संरक्षण और प्रचार-प्रसार हुआ तो कन्नौज जल्द ही उत्तर प्रदेश का बड़ा पर्यटन हब बन सकता है। विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों ने इसी संभावनाओं को नया पंख दिया है।
विश्व पर्यटन दिवस पर इत्र नगरी की विरासत का प्रदर्शन
विश्व पर्यटन दिवस पर शनिवार को इत्र नगरी की ऐतिहासिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया गया। जीटी रोड स्थित राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में पर्यटन विभाग की संगोष्ठी में जिले के पांच हजार साल पुराने इत्र कारोबार और प्राचीन स्थलों की जानकारी दी गई। पर्यटन अधिकारी डॉ. मकबूल हसन ने बताया कि कन्नौज सम्राट हर्षवर्धन की राजधानी रहा है। यहां की मिट्टी का इत्र देश-विदेश में प्रसिद्ध है। हर्षवर्धन टीला, जयचंद्र किला और क्षेमकाली मंदिर जैसे स्थल पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इत्र उद्योग को पर्यटन से जोड़ने के लिए इत्र पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक इत्र बनते देख सकेंगे।
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जीटी रोड किनारे स्थित राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में रखी प्राचीन मूर्तियां, हर्ष टीला के अवशेष, राजा जयचंद्र का किला, अनोखा कांच मंदिर और बाबा गौरीशंकर मंदिर जिले की गौरवशाली गाथा कहते हैं। संगोष्ठी में पर्यटन अधिकारी ने बताया कि इन स्थलों को देखने के लिए साल 2025-26 में 21 लाख से अधिक पर्यटक कन्नौज आए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
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पर्यटन विभाग अब इत्र को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी में है। इत्र पर्यटन सर्किट के तहत पर्यटक खेत से लेकर भट्ठी तक इत्र बनने की पूरी प्रक्रिया देख सकेंगे। मिट्टी का इत्र, केवड़ा, गुलाब और चमेली के इत्र की खुशबू पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचती है। अतर एंड परफ्यूमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन त्रिवेदी बताते हैं कि विदेशी पर्यटक खासतौर पर प्राकृतिक इत्र देखने आते हैं। उनके आने से स्थानीय कारीगरों को रोजगार भी मिल रहा है।
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जिला प्रशासन भी पर्यटन स्थलों पर लाइट, रास्ते और गाइड की सुविधा बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि ऐतिहासिक स्थलों का समुचित संरक्षण और प्रचार-प्रसार हुआ तो कन्नौज जल्द ही उत्तर प्रदेश का बड़ा पर्यटन हब बन सकता है। विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों ने इसी संभावनाओं को नया पंख दिया है।
विश्व पर्यटन दिवस पर इत्र नगरी की विरासत का प्रदर्शन
विश्व पर्यटन दिवस पर शनिवार को इत्र नगरी की ऐतिहासिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया गया। जीटी रोड स्थित राजकीय पुरातत्व संग्रहालय में पर्यटन विभाग की संगोष्ठी में जिले के पांच हजार साल पुराने इत्र कारोबार और प्राचीन स्थलों की जानकारी दी गई। पर्यटन अधिकारी डॉ. मकबूल हसन ने बताया कि कन्नौज सम्राट हर्षवर्धन की राजधानी रहा है। यहां की मिट्टी का इत्र देश-विदेश में प्रसिद्ध है। हर्षवर्धन टीला, जयचंद्र किला और क्षेमकाली मंदिर जैसे स्थल पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इत्र उद्योग को पर्यटन से जोड़ने के लिए इत्र पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक इत्र बनते देख सकेंगे।