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1962 भारत-चीन युद्ध: पाकिस्तानी गतिविधि रोकने को डटे रहे जवाहर सिंह

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2020 03:39 PM IST
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1962 India-China war: Jawahar Singh is determined to stop Pakistani activity
17सीएचबीपी51: जानकारी देते जवाहर सिंह भदौरिया। 1962 भारत-चीन युद्ध: पाकिस्तानी गतिविधि रोकने को डटे रहे जवाहर सिंह - चीनी सेना के समर्थन की पाकिस्तान की मंशा को नहीं होने दिया पूरा - 1965 में रक्षा मेडल से नवाजे गए थे जवाहर सिंह भदौरिया संवाद न्यूज एजेंसी छिबरामऊ। विश्वासघात का खंजर भारत की पीठ में घोंपते हुए जब 58 साल पहले 1962 में चीनी सेना ने हमला किया तो पाकिस्तान की सेना भी गुपचुप ढंग से चीन की मदद करने आना चाहती थी। पर, अमृतसर में अपनी बटालियन के साथ मौजूद जवाहर सिंह भदौरिया ने पाकिस्तान की मंशा को नाकाम कर दिया था। उनकी बहादुरी को देखते हुए साल 1965 में उन्हें रक्षा मेडल से नवाजा गया। नगर के मोहल्ला छपट्टी निवासी जवाहर सिंह भदौरिया अक्टूबर 1960 में इंदौर से इंडियन आर्मी ईएमई (इलेक्ट्रिकल मैकेनिकल इंजीनियरिंग) में भर्ती हुए थे। सिकंदराबाद हैदराबाद में 1962 में जब उनकी ट्रेनिंग पूरी हुई तभी चीन में पंचशील के भाई-भाई के नारे को दरकिनार करते हुए भारत पर हमला कर दिया। सेना की कई टुकड़ियां चीन से युद्ध में लग गईं। पाकिस्तान के गुपचुप ढंग से पिछले दरवाजे से चीन की मदद करने की मंशा को भारत ने भांप लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत ने फर्स्ट आर्म्ड डिप बटालियन को पाकिस्तान की गतिविधि रोकने के लिए अमृतसर के भिकीभिंड में तैनात किया गया। चीन की मदद करने की पाकिस्तान की सेना की हर मंशा को भारतीय सेना ने यहां पर नाकाम कर दिया। यहां पर भारतीय सेना की यह बटालियन कई महीनों तैनात रही। इसी में शामिल थे जवाहर सिंह भदौरिया। इनकी ड्यूटी के प्रति समर्पण को देखते हुए साल 1965 में उन्हें रक्षा मेडल से नवाजा गया। 81 वर्ष की अवस्था को पूरी कर चुके जवाहर सिंह भदौरिया आज भी देश सेवा का जज्बा अपने सीने में रखते हैं। वह बताते हैं कि गद्दारी चीनी सेना की नीति में है लेकिन अब भारत 1962 वाला भारत नहीं है। चीन को 1967 का नाथुला भी याद कर लेना चाहिए। इनसेट... चार पीढ़ियों से देश व समाज की सेवा में जुटा है परिवार जवाहर सिंह भदौरिया का परिवार चार पीढ़ियों से देश व समाज की सेवा में जुटा हुआ है। वह बताते हैं कि उनके दादा राम सिंह व पिता हीरा सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में थे। इसके बाद वह सेना में गए और 24 साल 10 महीने व 15 दिन तक देश की सेवा की। उनके बाद उनके बेटे विनय कुमार सिंह ने इंडियन नेवी व विनोद कुमार सिंह ने इंडियन आर्मी ज्वाइन की। अब उनके दोनों बेटे भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ------------------------------------
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