{"_id":"8d907948c42a8f134eae1bbec2897a5f","slug":"156-villages-stalled-in-development-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"156 गांवों में ठप विकास कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
156 गांवों में ठप विकास कार्य
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Mon, 15 Feb 2016 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वीवीआईपी जिले में एक ओर जहां विकास कार्यों की गंगा
विज्ञापन
बह रही है, वहीं दूसरी तरफ नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों के सौतेले व्यवहार
के कारण मनरेगा पटरी से उतरी चल रही है। इसका खामियाजा गांव के गरीबों को
घर बैठे रोजगार की सुविधा से वंचित होकर चुकाना पड़ रहा है।
बेदम मनरेगा के सूरतेहाल की पोल खुद सरकारी आंकड़े खोल रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर ग्राम सभा में कम से कम एक कार्य निरंतर चलते रहने चाहिए, लेकिन कन्नौज की 156 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां मनरेगा से कोई काम नहीं हो रहा है। ज्ञात हो कि जिले में कुल आठ विकास खंड और 504 ग्राम पंचायतें हैं।
इंटरनेट पर फीड मनरेगा की प्रगति आंकड़ों के अनुसार, इस समय 348 ग्राम पंचायतों में कोई न कोई विकास कार्य पर मनरेगा से काम हो रहा है, पर छिबरामऊ में 25, गुगरापुर में तीन, हसेरन में सात, कन्नौज में 35, सौरिख में 27, तालग्राम में 27, उमर्दा में 20 और जलालाबाद में 12 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कोई भी कार्य इन दिनों नहीं कराया जा रहा है। इस वजह से इन गांवों के गरीबों को काम का मौका नहीं मिल पा रहा है।
इतना ही नहीं मनरेगा से हर गांव में कम से कम एक विकास कार्य रोजाना जारी रहने के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन अफसर केवल कोरी चेतावनी एवं निर्देश पत्र ही जारी कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी उदासीन बने हुए हैं। ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी से लेकर अन्य जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन हैं।
सूत्रों की मानें तो नेताओं की अनदेखी के कारण बीडीओ भी सुस्ती बरत रहे हैं। इस कारण खातों में बजट बेकार पड़ा है। धन होने के बावजूद उसका उपयोग कर न तो विकास कार्य हो पा रहे और न ही रोजगार सृजित हो रहे हैं। उधर, इस बाबत उप श्रमायुक्त (डीसी) मनरेगा इंद्रपाल सिंह का कहना है कि लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है।
आठों ब्लाकों के बीडीओ को निर्देश दिए गए कि तत्काल सचिवों, प्रधानों व रोजगार सेवकों पर शिकंजा कसें। कहा कि आदेश दिए गए हैं कि हर ग्राम सभा में कम से कम एक कार्य मनरेगा से अवश्य शुरू कराना सुनिश्चित कराएं। ऐसा न करने वालों को अब दंडित कराया जाएगा।
बेदम मनरेगा के सूरतेहाल की पोल खुद सरकारी आंकड़े खोल रहे हैं। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर ग्राम सभा में कम से कम एक कार्य निरंतर चलते रहने चाहिए, लेकिन कन्नौज की 156 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां मनरेगा से कोई काम नहीं हो रहा है। ज्ञात हो कि जिले में कुल आठ विकास खंड और 504 ग्राम पंचायतें हैं।
इंटरनेट पर फीड मनरेगा की प्रगति आंकड़ों के अनुसार, इस समय 348 ग्राम पंचायतों में कोई न कोई विकास कार्य पर मनरेगा से काम हो रहा है, पर छिबरामऊ में 25, गुगरापुर में तीन, हसेरन में सात, कन्नौज में 35, सौरिख में 27, तालग्राम में 27, उमर्दा में 20 और जलालाबाद में 12 ग्राम पंचायतों में मनरेगा से कोई भी कार्य इन दिनों नहीं कराया जा रहा है। इस वजह से इन गांवों के गरीबों को काम का मौका नहीं मिल पा रहा है।
इतना ही नहीं मनरेगा से हर गांव में कम से कम एक विकास कार्य रोजाना जारी रहने के आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन अफसर केवल कोरी चेतावनी एवं निर्देश पत्र ही जारी कर रहे हैं। जनप्रतिनिधि भी उदासीन बने हुए हैं। ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और बीडीसी से लेकर अन्य जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन हैं।
सूत्रों की मानें तो नेताओं की अनदेखी के कारण बीडीओ भी सुस्ती बरत रहे हैं। इस कारण खातों में बजट बेकार पड़ा है। धन होने के बावजूद उसका उपयोग कर न तो विकास कार्य हो पा रहे और न ही रोजगार सृजित हो रहे हैं। उधर, इस बाबत उप श्रमायुक्त (डीसी) मनरेगा इंद्रपाल सिंह का कहना है कि लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है।
आठों ब्लाकों के बीडीओ को निर्देश दिए गए कि तत्काल सचिवों, प्रधानों व रोजगार सेवकों पर शिकंजा कसें। कहा कि आदेश दिए गए हैं कि हर ग्राम सभा में कम से कम एक कार्य मनरेगा से अवश्य शुरू कराना सुनिश्चित कराएं। ऐसा न करने वालों को अब दंडित कराया जाएगा।