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जितिन प्रसाद को कन्नौज से चुनाव मैदान में उतार सकती है कांग्रेस
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कन्नौज। कांग्रेस पार्टी कन्नौज लोकसभा से इस बार चुनाव लड़ने की तैयारी में जुट गई है। पिछले दिनों लखनऊ कार्यालय में पश्चिम यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में हुई 39 जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक में कन्नौज सीट से प्रत्याशी उतारने पर मंथन हुआ। मजबूत और ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाने के लिए जितिन प्रसाद का नाम सामने आया। बैठक में मौजूद जितिन प्रसाद ने भी सहमति दे दी। संभावना है कि जितिन प्रसाद धौरहरा के साथ ही कन्नौज यानी दो सीटों से लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। इस सीट से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव सांसद हैं। इस बार भी उनके या फिर अखिलेश के चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है।
पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बयान आया था कि पार्टी यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कन्नौज के कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय मिश्रा के साथ ही कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस सीट से प्रत्याशी उतारने की मांग करते हुए राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को पत्र भेजा था। 14 फरवरी को लखनऊ के मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी कार्यालय में पश्चिमी यूपी के सभी 39 जिलों के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। यहां लोकसभा चुनाव की तैयारियों और मजबूत प्रत्याशियों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कन्नौज लोकसभा सीट से भी प्रत्याशी उतारने की मांग उठी। पश्चिम यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मजबूत प्रत्याशी का नाम सुझाने के लिए कहा। कुछ नाम सामने रखे गए लेकिन पार्टी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जो जाना पहचाना हो और जिले से दमदारी से चुनाव लड़ सके। बैठक में मौजूद जितिन प्रसाद का नाम कुछ लोगों ने सुझाया।
इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सहमत हो गए। चूंकि जितिन प्रसाद की धौरहरा लोकसभा सीट पर अच्छी पकड़ है, ऐसे में पार्टी के प्रमुख लोगों ने धौरहरा के साथ ही कन्नौज लोकसभा सीट से भी उन्हें चुनाव मैदान में उतराने की इच्छा व्यक्त की। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभी की इच्छाओं से पार्टी प्रमुख राहुल गांधी को अवगत कराने की बात कही।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक पहले माना जा रहा था कि पिछले दो लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट छोड़ सकती है। सपा और बसपा के गठबंधन के बाद जिस तरह राहुल गांधी का यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का बयान सामने आया तो उम्मीद है कि इस बार कांग्रेस कन्नौज सीट पर प्रत्याशी उतार सकती है। जिले के पदाधिकारियों की भी प्रबल इच्छा है कि इस सीट से पार्टी दमदारी के साथ चुनाव लड़े।
पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय मिश्रा ने बताया कि लखनऊ में 14 फरवरी को हुई बैठक में कन्नौज सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने पर चर्चा हुई है। कुछ लोगों ने जितिन प्रसाद का नाम सुझाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बैठक में मौजूद सभी लोगों ने इस पर सहमति जताई है। पार्टी का रुख देखकर लग रहा है कि इस बार कन्नौज सीट से कांग्रेस उम्मीदवार उतारेगी। राहुल गांधी को इस पर अंतिम निर्णय लेना है।
जिला बनने के बाद कांग्रेस को नहीं मिली जीत
1996 में कन्नौज जिला बनने के बाद कुल आठ बार लोकसभा चुनाव हुए। इनमें मध्यावधि और उपचुनाव भी शामिल हैं। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह को जीत मिली थी। उन्होंने सपा प्रत्याशी छोटे सिंह यादव को 54880 वोटों से मात दी थी। कांग्रेस प्रत्याशी राम अवतार दीक्षित को 9957 वोट मिले थे। यह 1.71 प्रतिशत वोट थे। 1998 में मध्यावधि चुनाव हो गए। तब इस सीट पर सपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार यादव ने जीत दर्ज की। 1999 में इस सीट पर मुलायम सिंह यादव ने बतौर सपा प्रत्याशी जीत दर्ज की। तब कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय नारायण सिंह चौथे नंबर पर रहे थे। उन्हें मात्र 27,082 यानी 3.96 प्रतिशत वोट मिले थे। सन 2000 में हुए लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी पहले चार स्थानों से भी नीचे पहुंच गया। 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव फिर विजयी हुए। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विनय कुमार शुक्ला को 10,501 यानी 1.38 प्रतिशत वोट मिले। 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं उतारा।
जितिन प्रसाद को कन्नौज से चुनाव लड़ा सकती कांग्रेस
कांग्रेस के पश्चिम यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में लखनऊ कार्यालय में हुई बैठक में हुई चर्चा
ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाने की तैयारी, जिले के पदाधिकारियों ने भी किया स्वागत
पिछले दिनों कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का बयान आया था कि पार्टी यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कन्नौज के कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजय मिश्रा के साथ ही कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस सीट से प्रत्याशी उतारने की मांग करते हुए राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को पत्र भेजा था। 14 फरवरी को लखनऊ के मॉल एवेन्यू स्थित पार्टी कार्यालय में पश्चिमी यूपी के सभी 39 जिलों के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। यहां लोकसभा चुनाव की तैयारियों और मजबूत प्रत्याशियों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान कन्नौज लोकसभा सीट से भी प्रत्याशी उतारने की मांग उठी। पश्चिम यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मजबूत प्रत्याशी का नाम सुझाने के लिए कहा। कुछ नाम सामने रखे गए लेकिन पार्टी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जो जाना पहचाना हो और जिले से दमदारी से चुनाव लड़ सके। बैठक में मौजूद जितिन प्रसाद का नाम कुछ लोगों ने सुझाया।
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इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी सहमत हो गए। चूंकि जितिन प्रसाद की धौरहरा लोकसभा सीट पर अच्छी पकड़ है, ऐसे में पार्टी के प्रमुख लोगों ने धौरहरा के साथ ही कन्नौज लोकसभा सीट से भी उन्हें चुनाव मैदान में उतराने की इच्छा व्यक्त की। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सभी की इच्छाओं से पार्टी प्रमुख राहुल गांधी को अवगत कराने की बात कही।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक पहले माना जा रहा था कि पिछले दो लोकसभा चुनावों की तरह इस बार भी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के लिए यह सीट छोड़ सकती है। सपा और बसपा के गठबंधन के बाद जिस तरह राहुल गांधी का यूपी की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने का बयान सामने आया तो उम्मीद है कि इस बार कांग्रेस कन्नौज सीट पर प्रत्याशी उतार सकती है। जिले के पदाधिकारियों की भी प्रबल इच्छा है कि इस सीट से पार्टी दमदारी के साथ चुनाव लड़े।
पार्टी के जिलाध्यक्ष विजय मिश्रा ने बताया कि लखनऊ में 14 फरवरी को हुई बैठक में कन्नौज सीट से ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने पर चर्चा हुई है। कुछ लोगों ने जितिन प्रसाद का नाम सुझाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बैठक में मौजूद सभी लोगों ने इस पर सहमति जताई है। पार्टी का रुख देखकर लग रहा है कि इस बार कन्नौज सीट से कांग्रेस उम्मीदवार उतारेगी। राहुल गांधी को इस पर अंतिम निर्णय लेना है।
जिला बनने के बाद कांग्रेस को नहीं मिली जीत
1996 में कन्नौज जिला बनने के बाद कुल आठ बार लोकसभा चुनाव हुए। इनमें मध्यावधि और उपचुनाव भी शामिल हैं। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह को जीत मिली थी। उन्होंने सपा प्रत्याशी छोटे सिंह यादव को 54880 वोटों से मात दी थी। कांग्रेस प्रत्याशी राम अवतार दीक्षित को 9957 वोट मिले थे। यह 1.71 प्रतिशत वोट थे। 1998 में मध्यावधि चुनाव हो गए। तब इस सीट पर सपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार यादव ने जीत दर्ज की। 1999 में इस सीट पर मुलायम सिंह यादव ने बतौर सपा प्रत्याशी जीत दर्ज की। तब कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय नारायण सिंह चौथे नंबर पर रहे थे। उन्हें मात्र 27,082 यानी 3.96 प्रतिशत वोट मिले थे। सन 2000 में हुए लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने जीत दर्ज की। कांग्रेस प्रत्याशी पहले चार स्थानों से भी नीचे पहुंच गया। 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव फिर विजयी हुए। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विनय कुमार शुक्ला को 10,501 यानी 1.38 प्रतिशत वोट मिले। 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने प्रत्याशी ही नहीं उतारा।
जितिन प्रसाद को कन्नौज से चुनाव लड़ा सकती कांग्रेस
कांग्रेस के पश्चिम यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में लखनऊ कार्यालय में हुई बैठक में हुई चर्चा
ब्राह्मण प्रत्याशी पर दांव लगाने की तैयारी, जिले के पदाधिकारियों ने भी किया स्वागत