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साढ़े तीन लाख का पैकेज ठुकरा बना किसान, बदल गई किस्मत

Thu, 21 Feb 2019 12:07 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 21 Feb 2019 12:07 AM IST
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साढ़े तीन लाख का पैकेज ठुकरा बना किसान, बदल गई किस्मत
कन्नौज। गणित से बीएससी करने के बाद जलालाबाद ब्लाक के बैसावारी गांव निवासी आदित्य राज ने नौकरी तलाश की। लखनऊ में साढ़े तीन लाख के पैकेज की नौकरी का ऑफर भी मिला। उन्होंने नौकरी की जगह खेती किसानी को महत्व दिया। इसी में पूरी ताकत से जुट गए। नतीजा भी सकारात्मक आया। पिछली आलू की सीजन में 70 बीघा में फसल की। करीब आठ लाख रुपये कमाए। जिला उद्यान विभाग में संपर्क किया तो तकनीक की जानकारी हुई। अब ड्रिप सिंचाई विद मलचिंग विधि से टमाटर और खीरे की खेती कर रहे हैं। फसल तैयार है और मार्च के पहले सप्ताह में बाजार में पहुंच जाएगी। पैदावार देखने के बाद कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरागत तरीके से होने वाले टमाटर-खीरे और नई विधि से हुई फसल की गुणवत्ता में काफी अंतर है। पैदावार भी करीब चार गुना ज्यादा होने की उम्मीद है।
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आदित्य राज जिले के एकमात्र किसान हैं, जिन्होंने ड्रिप सिंचाई विद मलचिंग विधि से खेती शुरू की है। आदित्य राज ने बताया कि पिछले वर्ष जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी से मिलकर उन्नत तकनीक से खेती करने पर बात की तो उन्होंने इस विधि की जानकारी दी। पंरपरागत खेती से यदि टमाटर किया जाए तो उसमें पानी और खाद की ज्यादा खपत होती है। वहीं इस विधि से करने में 70 फीसदी तक कमी होती है। इसके अलावा टमाटर की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। पैदावार में भी कई गुना तक बढ़ोतरी हो जाती है। खीरे की स्थिति भी लगभग ऐसी ही है।
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क्या है ड्रिप सिंचाई विद मलचिंग विधि
इस विधि में खेत पर क्यारियां तैयार कर उस पर पॉलिथीन को बिछा दिया जाता है। इसके बाद तय दूरी पर छेद कर टमाटर और खीरे की पौध लगाई जाती है। मिट्टी के नीचे पाइप लाइन बिछाकर सीधे पौधों की जड़ों को पानी के साथ ही खाद दी जाती है। परंपरागत खेती में जिस तरह से पौधों को खाद और पानी दिया जाता है उससे इसकी मात्रा बढ़ जाती है। इस विधि में क्यारियों पर पॉलिथीन बिछाने से नमी बाहर नहीं निकल पाती है। गर्मी में भी ज्यादा पानी लगाने की जरूरत नहीं होती। पॉलिथीन बिछी होने से बांस लगाकर पौधे को ऊपर ले जाने से फल जमीन के संपर्क में नहीं आता है। इसलिए इसमें रोग नहीं लगता है। गुणवत्ता बेहतर होती है। इस बार उन्होंने आठ बीघे में टमाटर और चार बीघे में खीरा बोया है। फसल तैयार है। मार्च के पहले सप्ताह से यह बाजार में पहुंच जाएगी।
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सवा दो लाख आया खर्च, 1.16 लाख मिलेगा अनुदान
ड्रिप सिंचाई विद मलचिंग विधि को तैयार करने में आदित्य राज का करीब सवा दो लाख रुपये खर्च आया है। सरकार की ओर से अनुदान के रूप में 1.16 लाख रुपये मिलेंगे।


किसानों के लिए फायदेमंद है तकनीक
आदित्य राज के यहां सालों से परंपरागत आलू की खेती हो रही थी। किसी ने इससे हटकर दूसरी फसल करने की नहीं सोची। आलू में कभी नुकसान तो कभी फायदा होता था। मौसम बिगड़ने से फसल खराब होने का डर भी रहता था। नई तकनीक के इस्तेमाल से आदित्य राज ने लोगों की सोच भी बदली है। कई किसान अब इस ओर आकर्षित हो रहे हैं।

बोले जिम्मेदार
जिले में आदित्य राज ने इस विधि से फसल की शुरुआत की है। टमाटर और खीरे की गुणवत्ता अन्य से बेहतर तो होगी ही साथ ही पैदावार में भी करीब चार गुना बढ़ोतरी होगी। मार्च के पहले सप्ताह में तैयार फसल मई तक चलेगी। यानी लागत से करीब चार गुना तक लाभ मिलेगा।

- मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी, कन्नौज।


साढ़े तीन लाख का पैकेज ठुकरा खेती की, बदल गई किस्मत
आलू की फसल से एक सीजन में कमाए करीब आठ लाख रुपये,अब ड्रिप सिंचाई विद मलचिंग तकनीक के इस्तेमाल से तैयार कर रहे टमाटर और खीरा, इस तकनीक को अपनाने वाले जिले के पहले किसान बने आदित्य राज, लागत में आई कमी, फसल की गुणवत्ता और पैदावार भी बढ़ी
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