झांसी। आपदा को अवसर में बदलते हुए युवा आत्मनिर्भर बनें और रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि देने वाले बनें, सरकार में बैठे नुमाइंदों की ओर से कही जाने वाली ये बात सुनने में तो बहुत अच्छी लगती है, लेकिन हकीकत से इसका कोई सरोकार नहीं है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक युवा चिकित्सक आयुर्वेदिक औषधि निर्माण का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पिछले आठ महीनों से विभाग के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक उसे ये हासिल नहीं हो पाया है।
दतिया गेट बाहर फिल्टर रोड निवासी डॉ. लोकेश भामा ने मंडलायुक्त को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण के लिए एक जनवरी 2020 को आयुर्वेद एवं यूनानी संस्थान में आवेदन किया था। इसके बाद विभागीय लोगों ने कार्यस्थल का निरीक्षण किया और उनके द्वारा बताई गईं कमियों को दूर भी कर लिया गया। विभागीय टीम ने दुबारा निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं से संतुष्ट नजर आईं। बावजूद, लाइसेंस जारी नहीं किया। बताया गया कि रिपोर्ट हेड ऑफिस भेज दी गई है। मुख्यालय में संपर्क करने पर बताया कि आपने फीस जमा नहीं की, जबकि इसके बारे में मुझे विभाग के स्थानीय लोगों ने कोई जानकारी ही नहीं दी थी। चिकित्सक ने बेवजह परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए मंडलायुक्त से लाइसेंस जारी कराने की मांग की है।