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World Book Day: पहले पढ़ा फिर लिखा, तब दुनिया को दिखा; इंटरनेट के दौर में युवा Books से सीख रहे जिंदगी का सबक

Tue, 23 Apr 2024 02:48 PM IST
शाहरुख खान प्रशांत शर्मा, अमर उजाला, झांसी
प्रशांत शर्मा, अमर उजाला, झांसी Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 23 Apr 2024 02:48 PM IST
सार

इंटरनेट के दौर में युवा किताबों से जिंदगी का सबक सीख रहे हैं। खुद भी पढ़ते है पुस्तकें और दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

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World Book Day 2024 youth are learning life lessons from books In era of internet
World Book Day - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उम्मीद की कहानियों से यह खबर रोशन है। पन्नों पर उभरे अक्षर और उनसे बने वाक्य फिर इनसे गूंथकर बनाया गया जिंदगी का फलसफा हमारे लिए कितना जरूरी है। यह नौजवान पीढ़ी खूब समझती है। कुछ ऐसे ही युवा हैं, जिन्हें किताबों से लगाव है... बेइंतहा लगाव है। उन्होंने पहले पढ़ा... खूब पढ़ा और फिर जब लिखा तो दुनिया को भी दिखा। यह यहीं नहीं रुके अपने घरों में जेबखर्च से किताबें सजाईं। आज यही युवा दूसरों को भी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। विश्व पुस्तक दिवस पर प्रस्तुत हैं चंद कहानियां...
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जेबखर्च से अनमोल ने खरीदीं किताबें...दो लिखीं

टहरौली के अनमोल दुबे (22) पॉलिटिकल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से इसी साल मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। अनमोल अब तक दो किताबें लिख चुके हैं। बताया कि रेडियो पर कहानियां सुनकर किताबें पढ़ने में रुचि जगी। जेबखर्च से किताबें खरीदीं। फिर लिखने की रुचि जागी। पहली किताब 19 साल की उम्र में लिखी। कारवां गुलाम लोगों का तीन कहानियों का संग्रह है। 2022 में दूसरी किताब जीवन परत-दर-परत प्रकाशित हुई। घर पर एक पुस्तकालय बनाया है। यहां करीब 1200 किताबें हैं। वह दूसरों को भी
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पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। 

किताबों ने दिखाई दुनिया... मुश्किलों से लड़ना सिखाया
हंसारी के रहने वाले पुष्पेंद्र सिंह ने 2018 में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। वह किताबें पढ़ने और लिखने के शौकीन हैं। 2021 में काव्य संग्रह ‘मानस’ और 2023 में कहानी संग्रह ‘ड्रीम मदर’ लिखी है। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल से ही किताब पढ़ने में रुचि जग गई थी। 2013 से ही छोटी-छोटी कहानियां लिखने लगे थे। करीब आठ साल बाद उनकी पहली पुस्तक प्रकाशित हुई। उन्होंने भी घर पर पुस्तकालय बना रखा है, जिसमें करीब ढाई सौ किताबें हैं। कहा कि किताबें पढ़ने से बहुत सीख मिलती हैं। व्यक्ति में मानवता, दया विकसित होती है।
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हाईस्कूल के बाद ही वंशिका ने लिख दी थी पहली किताब
आवास विकास कॉलोनी की वंशिका मिश्रा ने हाईस्कूल करते ही अपनी पहली किताब ‘योसावा द प्रिंसेस ऑफ मून’ लिखी। इस साल उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। उनकी मां सीमा शुक्ला मिश्रा साहित्यकार हैं। उन्होंने बताया कि मां से ही पुस्तकें पढ़ने और लिखने की प्रेरणा मिली। लघु कहानियों पर आधारित उन्होंने ट्विस्टर्स किताब भी लिखी है। वह ‘हमार चा’ की सह लेखिका भी हैं। इसकी मुख्य लेखिका उनकी मां हैं। 

बीयू में हर साल लगता है पुस्तक मेला
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में पुस्तक प्रेमियों के लिए किताबें खरीदने के लिए हर साल पुस्तक मेला लगता है। पुस्तक मेला के आयोजक डॉ. मुन्ना तिवारी ने बताया कि इस साल लगे पुस्तक मेले में 56 प्रकाशक आए थे। मेले में किताबों की अच्छी खासी बिक्री भी हुई। साथ ही लेखक से मिलिए कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें युवाओं ने पुस्तक लेखन से संबंधित बारीकियों को भी जाना। दो पुस्तकालयों में भी किताबें पढ़ने की सुविधा जेडीए और स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा राजकीय जिला पुस्तकालय का पुनर्निर्माण कराया गया है।

इसमें 46 हजार किताबें हैं। साहित्य, शोधपत्र, पांडुलिपि, महापुरुषों की जीवनी समेत तरह-तरह की किताबें हैं। एक साथ बैठकर सौ लोग पढ़ सकते हैं। लाइब्रेरी इंचार्ज देवेंद्र सिंह ने बताया कि मासिक शुल्क 600 रुपये है। इसमें 500 रुपये सिक्योरिटी मनी है, जो बाद में वापस हो जाती है। वहीं, अटल एकता पार्क में बनी अटल स्मृति लाइब्रेरी में 15800 किताबें हैं। 500 रुपये मासिक सदस्यता शुल्क जमा करके यहां किताबें पढ़ सकते हैं। एक साथ 105 लोग बैठकर पुस्तक पढ़ सकते हैं। वाईफाई की सुविधा भी उपलब्ध है।
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