फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Without fear daroga loco pilotRun train

डरे और न डिगे, संक्रमण के दौर में भी लोको पायलट दौड़ाते रहे ट्रेन

Thu, 10 Jun 2021 01:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 01:06 AM IST
विज्ञापन
Without fear daroga loco pilotRun train
झांसी। कोरोना की दूसरी लहर ने हर वर्ग को अपनी चपेट में लिया। ट्रेनों का संचालन करने वाले लोको पायलट भी इससे अछूते नहीं रहे। हालात यह रहे कि मंडल में दूसरी लहर में 313 लोको पायलट संक्रमित हुए। इसके बाद भी उनका हौसला कम नहीं हुआ। संक्रमण के भयावह हालात में भी मंडल के लोको पायलटों ने 794 डीजल और 5313 इलेक्ट्रिक इंजन से संचालित मेल और पैसेंजर ट्रेनों का संचालन कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया।
विज्ञापन

कोरोना की दूसरी लहर में रेलवे के फ्रं ट लाइन स्टाफ लोको पायलट ने जान हथेली पर लेकर रेलों के निर्बाध संचालन किया। अप्रैल माह में मंडल के 126 और मई माह में 187 स्टाफ को संक्रमण ने जकड़ा। जिसमें 34 अभी भी बीमार हैं। इसके बाद भी देश के एक कोने से दूसरे कोने तक माल परिवहन और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने का काम लोको पायलटों ने किया। इस दौरान मंडल के स्टाफ ने अप्रैल में 526 डीजल और 2787 इलेक्ट्रिक, मई में 268 डीजल और 2526 इलेक्ट्रिक इंजन द्वारा संचालित पैसेंजर और मेल एक्सप्रेस गाड़ियों का संचालन किया। वहीं ऑक्सीजन संकट के दौर में झांसी मंडल से गुजरीं 51 ऑक्सीजन एक्सप्रेस के संचालन में अहम भूमिका अदा की। सवारी गाड़ियों के साथ ही लोको पायलटों ने अप्रैल में 1188 डीजल इंजन और 4234 इलेक्ट्रिक, मई में 1568 डीजल और 4622 इलेक्ट्रिक इंजन द्वारा संचालित माल गाड़ियों का संचालन भी किया। इसके जरिए रेलवे ने अप्रैल में 11135 वैगन पर 619091 टन वजन लदान करते हुए 56,54,72,225 रुपये और मई में 10839 वैगन लोड करते हुए 596514 टन का माल लदान किया। मंडल रेल प्रबंधक संदीप माथुर ने लोको पायलटों के उत्साह और साहस की सराहना की है। उन्होंने कहा कि डरे बिना लोको पायलटों ने अपने काम को बखूबी अंजाम दिया है।
विज्ञापन

कोविड के दौर में काम आया रायरू गुड्स शेड
ग्वालियर के पास बने रायरू गुड्स शेड ने कोविड के दौर में रेलवे को बड़ी सफलता दिलाई। यहां से 2019-20 में जहां एक रैक की लोडिंग हुई, तो अब आंकड़ा 14 तक पहुंच चुका है। गुड्स शेेड से रेलवे को पिछले साल 11.08 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। जबकि मौजूदा साल के अप्रैल और मई में ही 4.95 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है। रायरू गुड्स शेड में देश के विभिन्न इलाकों से व्यापारियों द्वारा विभिन्न वस्तुओं को मंगाया जाता है। शेड में अब तक 399 रैकों की अनलोडिंग हो चुकी है। रायरू गुड्स शेड के प्रारंभ होने से पहले ग्वालियर स्टेशन से ही माल लदान व अनलोडिंग की जाती थी। क्रॉसिंग और शहर में ट्रैफि क के दबाव के कारण ट्रकों के आवागमन में दिक्कत हो रही थी। जिसके चलते ग्वालियर से माल लदान न के बराबर होता था। मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि रायरू गुड्स शेड के शुरू होने से लोडिंग और अनलोडिंग में बढ़ोतरी के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के सृजन के अवसर भी बढ़े हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed