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इनकी बेढंगी चाल क्यों नहीं दुरुस्त करते नेताजी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2017 12:17 AM IST
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इनकी बेढंगी चाल क्यों नहीं दुरुस्त करते नेताजी
- फोटो : demo
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ऑटो चालकों की अराजकता से हर कोई परेशान है। इस बार विधानसभा चुनाव में यह भी बड़ा मुद्दा है। लोगों का कहना है कि इनकी बेढंगी चाल की दुरुस्त करना तो दूर, इन ओर किसी जनप्रतिनिधि या नेता ने ध्यान ही नहीं दिया। अब चुनावी बेला में सभी प्रत्याशी अपने जनसंपर्क में ऑटो चालकों के लिए स्टैंड बनवाने और स्टॉपेज निर्धारित करने का वादा कर रहे हैं।
शहर में आठ हजार से अधिक ऑटो दौड़ रहे हैं, इनके लिए अभी तक न तो स्थायी स्टैंड बनाए गए हैं और न ही स्टापेज तय हैं। नगर निगम ने इन्हें सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करना प्रारंभ किए। इसमें चार महीनों के दौरान पंद्रह सौ रजिस्ट्रेशन हो सके। इसके बाद नगर निगम ने भी कार्रवाई करना उचित नहीं समझा। एक सवारी देखते ही चार-चार ऑटो सड़क घेरकर खड़े हो जाते हैं। इस कारण जाम की स्थिति पैदा होती है। एक सवारी देखते ही कई ऑटो रोड घेरकर खड़े हो जाते हैं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सवारियों को अपनी ऑटो में बैठाने की होड़ में यात्रियों से खींचतान भी शुरू कर देते हैं। समय के साथ ऑटो चालकों की मनमानी बढ़ती गई। प्रशासन ने भी इनकी मनमानी रोकने और नियमों में बांधने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
ऑटो चालकों की हरकतों से नाराज लोग अब प्रत्याशियों से सवाल कर रहे हैं, कि इनकी हरकतों को कैसे रुकवाओगे? प्रत्याशी भी वादा कर रहे हैं कि चुनाव के बाद स्टैंड और स्टॉपेज तय होंगे तथा प्रतिबंधित बाजारों में प्रवेश पर प्रभावी तरीके से रोक लगाकर ऑटो चालकों पर लगाम लगाई जाएगी।
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यहां होती है परेशानी
- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सीपरी बाजार स्थित ओवरब्रिज के नीचे, सिंधी तिराहा, बड़ाबाजार स्थित रामलीला मैदान, खंडेराव गेट, कोतवाली, इलाइट चौराहा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, मेडीकल कॉलेज, जेल चौराहा, कचेहरी चौराहा, बीकेडी चौराहा वह स्थान हैं, जहां लोगों को ऑटो चालकों की हरकतों के कारण परेशान होना पड़ता है।
मनमानी
- तेज आवाज में गाने बजाना
- निर्धारित संख्या से अधिक सवारियां बैठाना
- मनमाना किराया वसूलना
- जहां मन हो वहां ऑटो रोकना
- निर्धारित गति सीमा से तेज ऑटो दौड़ाना
- ऑटो की फिटनेस पर ध्यान न देना
रात में हो जाता दोगुना किराया
रात में किराया दोगुना कर देते हैं। विरोध करने पर मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं। इनकी मनमानी पर कोई रोक लगाने के लिए प्रयास ही नहीं करना। प्रशासन को इनका किराया निर्धारित करना चाहिए।
अंकुर मिश्रा, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव
स्टैंड व स्टापेज नहीं
शहर में स्टैंड और स्टापेज ने होने के कारण लोगों को बीच रोड पर खड़े होकर ऑटो का इंतजार करना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और महानगर में अच्छी यातायात व्यवस्था के लिए प्रयास करें।
संजय, छात्र
महिलाओं के लिए समस्या
ऑटो में क्षमता से अधिक सवारियां बैठा लेते हैं। सफर के दौरान सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, महिलाओं के आसपास पुरुष भी बैठा लेते हैं। तब असहज हो जाती हूं। तेज आवाज में फूहड़ गाने बजाते हैं।
प्रगति, ग्रहणी
शहर में ऑटो की संख्या अधिक होने के कारण दिक्कत है। मैं समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाता हूं। नियम विरुद्घ चल रहे ऑटो का चालान करता हूं। कोशिश है कि किसी तरह इन पर अंकुश लगे।
सुभाष चंद्र यादव, यातायात उप निरीक्षक
ऑटो को रोजगार का साधन मानते हुए इनके लिए लगातार लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। इस कारण इनकी संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। कुछ शहरों में इनकी संख्या पर रोक लगा दी है। ऐसा यहां भी हो जाए तो दिक्कत खत्म हो जाएगी।
आरके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
अब कर रहे ये वादे
बनेंगे स्टैंड और स्टॉपेज
स्कूली ऑटो को ही बाजारों में प्रवेश की इजाजत है। चुनाव बाद ऑटो खड़े करने के लिए शहर में स्टैंड और स्टॉपेज बनवाए जाएंगे। प्रयास होगा कि इनके लिए नियम बनाए जाएं। प्रशासन के साथ मिलकर नियमों का पालन कराया जाएगा।
रवि शर्मा, सिटिंग विधायक, भाजपा प्रत्याशी
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता
ऑटो चालकों और यात्रियों को सुविधा न मिलने का कारण नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता है। चुनाव बाद नगर निगम पर दबाव बनाकर यात्रियों के लिए छायादार यात्री शेड और ऑटो के लिए स्टैंड की व्यवस्था कराई जाएगी।
राहुल राय, कांग्रेस प्रत्याशी
संख्या निर्धारित कराई जाएगी
शहर में ऑटो की संख्या अधिक हो गई है। इस कारण जाम और अतिक्रमण की समस्या होती है। चुनाव बाद ऑटो यूनियन और प्रशासन के साथ मिलकर इनकी संख्या, नियम और किराया निर्धारित करने का प्रयास किया जाएगा।
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शहर में आठ हजार से अधिक ऑटो दौड़ रहे हैं, इनके लिए अभी तक न तो स्थायी स्टैंड बनाए गए हैं और न ही स्टापेज तय हैं। नगर निगम ने इन्हें सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए रजिस्ट्रेशन करना प्रारंभ किए। इसमें चार महीनों के दौरान पंद्रह सौ रजिस्ट्रेशन हो सके। इसके बाद नगर निगम ने भी कार्रवाई करना उचित नहीं समझा। एक सवारी देखते ही चार-चार ऑटो सड़क घेरकर खड़े हो जाते हैं। इस कारण जाम की स्थिति पैदा होती है। एक सवारी देखते ही कई ऑटो रोड घेरकर खड़े हो जाते हैं। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सवारियों को अपनी ऑटो में बैठाने की होड़ में यात्रियों से खींचतान भी शुरू कर देते हैं। समय के साथ ऑटो चालकों की मनमानी बढ़ती गई। प्रशासन ने भी इनकी मनमानी रोकने और नियमों में बांधने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
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ऑटो चालकों की हरकतों से नाराज लोग अब प्रत्याशियों से सवाल कर रहे हैं, कि इनकी हरकतों को कैसे रुकवाओगे? प्रत्याशी भी वादा कर रहे हैं कि चुनाव के बाद स्टैंड और स्टॉपेज तय होंगे तथा प्रतिबंधित बाजारों में प्रवेश पर प्रभावी तरीके से रोक लगाकर ऑटो चालकों पर लगाम लगाई जाएगी।
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यहां होती है परेशानी
- बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, सीपरी बाजार स्थित ओवरब्रिज के नीचे, सिंधी तिराहा, बड़ाबाजार स्थित रामलीला मैदान, खंडेराव गेट, कोतवाली, इलाइट चौराहा, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, मेडीकल कॉलेज, जेल चौराहा, कचेहरी चौराहा, बीकेडी चौराहा वह स्थान हैं, जहां लोगों को ऑटो चालकों की हरकतों के कारण परेशान होना पड़ता है।
मनमानी
- तेज आवाज में गाने बजाना
- निर्धारित संख्या से अधिक सवारियां बैठाना
- मनमाना किराया वसूलना
- जहां मन हो वहां ऑटो रोकना
- निर्धारित गति सीमा से तेज ऑटो दौड़ाना
- ऑटो की फिटनेस पर ध्यान न देना
रात में हो जाता दोगुना किराया
रात में किराया दोगुना कर देते हैं। विरोध करने पर मारपीट करने पर उतारू हो जाते हैं। इनकी मनमानी पर कोई रोक लगाने के लिए प्रयास ही नहीं करना। प्रशासन को इनका किराया निर्धारित करना चाहिए।
अंकुर मिश्रा, मेडिकल रिप्रजेंटेटिव
स्टैंड व स्टापेज नहीं
शहर में स्टैंड और स्टापेज ने होने के कारण लोगों को बीच रोड पर खड़े होकर ऑटो का इंतजार करना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और महानगर में अच्छी यातायात व्यवस्था के लिए प्रयास करें।
संजय, छात्र
महिलाओं के लिए समस्या
ऑटो में क्षमता से अधिक सवारियां बैठा लेते हैं। सफर के दौरान सांस लेने में दिक्कत होने लगती है, महिलाओं के आसपास पुरुष भी बैठा लेते हैं। तब असहज हो जाती हूं। तेज आवाज में फूहड़ गाने बजाते हैं।
प्रगति, ग्रहणी
शहर में ऑटो की संख्या अधिक होने के कारण दिक्कत है। मैं समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाता हूं। नियम विरुद्घ चल रहे ऑटो का चालान करता हूं। कोशिश है कि किसी तरह इन पर अंकुश लगे।
सुभाष चंद्र यादव, यातायात उप निरीक्षक
ऑटो को रोजगार का साधन मानते हुए इनके लिए लगातार लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। इस कारण इनकी संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। कुछ शहरों में इनकी संख्या पर रोक लगा दी है। ऐसा यहां भी हो जाए तो दिक्कत खत्म हो जाएगी।
आरके सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
अब कर रहे ये वादे
बनेंगे स्टैंड और स्टॉपेज
स्कूली ऑटो को ही बाजारों में प्रवेश की इजाजत है। चुनाव बाद ऑटो खड़े करने के लिए शहर में स्टैंड और स्टॉपेज बनवाए जाएंगे। प्रयास होगा कि इनके लिए नियम बनाए जाएं। प्रशासन के साथ मिलकर नियमों का पालन कराया जाएगा।
रवि शर्मा, सिटिंग विधायक, भाजपा प्रत्याशी
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता
ऑटो चालकों और यात्रियों को सुविधा न मिलने का कारण नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता है। चुनाव बाद नगर निगम पर दबाव बनाकर यात्रियों के लिए छायादार यात्री शेड और ऑटो के लिए स्टैंड की व्यवस्था कराई जाएगी।
राहुल राय, कांग्रेस प्रत्याशी
संख्या निर्धारित कराई जाएगी
शहर में ऑटो की संख्या अधिक हो गई है। इस कारण जाम और अतिक्रमण की समस्या होती है। चुनाव बाद ऑटो यूनियन और प्रशासन के साथ मिलकर इनकी संख्या, नियम और किराया निर्धारित करने का प्रयास किया जाएगा।