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Jhansi News: मिला साथ तो बन गई बात... झांसी की तीन हजार दीदियां बनीं लखपति
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18,358 महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। घर के कामकाज में व्यस्त रहने वाली जिले की तीन हजार महिलाओं को अब लखपति दीदी के नाम से जाना जाने लगा है। इन महिलाओं की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
हालांकि, ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अभी जिले में 15 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति बनाया जाना है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े सात हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इनसे लगभग 80 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इन महिलाओं में से 15,458 को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य शासन की ओर से दिया गया है।
लखपति दीदी समूह की उस महिला को माना जाएगा, जिसकी सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक होगी। हालांकि, ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शासन की ओर से दिए गए लक्ष्य से अधिक 18,358 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से तीन हजार को लखपति दीदी का तमगा हासिल भी हो गया है। महिलाओं को इस मुकाम पर पहुंचाने में सरकार के कई विभागों की मदद मिली है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले में सरकारी राशन की 79 दुकानों का संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। बिजली के बिल वसूलने का काम महिलाएं कर रही हैं। विकास भवन और सरकारी अस्पताल में कैंटीन का संचालन भी समूह की महिलाओं की ओर से किया जा रहा है।
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इसके अलावा, फूलों की खेती, ऑर्गेनिक खेती समेत कई कुटीर उद्योग समूह की महिलाओं की ओर से संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण, उनके उत्पाद के विपणन, ऋण आदि में सहयोग किया जा रहा है।
आज सम्मानित होंगी लखपति बहनें
लखपति दीदियों को रविवार को महाराष्ट्र के जलगांव में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित करेंगे। इसी दरम्यान यहां जिला मुख्यालय, विकासखंड मुख्यालय और कलस्टर स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें जनपद की तीन हजार लखपति दीदियों को सम्मानित किया जाएगा।
फोटो-- --
स्टेशन पर स्टॉल मिलने से बदले हालात
मऊरानीपुर के स्यावनीखुर्द की रहने वाली सुनीता देवी सितारा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत उन्हें मऊरानीपुर रेलवे स्टेशन पर एक स्टॉल मिला है, जिस पर वह तौलिया, चादर, दरी आदि बेचती हैं। इस काम में उन्हें प्रतिमाह 10-12 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। जबकि पहले वह घर के कामकाज में ही व्यस्त रहती थीं। साल 2019 में वह समूह से जुड़ गईं। इसके बाद हालात बदल गए। अब वह अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं। इस बात का उन्हें गर्व है।
फोटो-- --
खूब पसंद किए जा रहे आकांक्षा के सजावटी सामान
बबीना के सिमरावारी की रहने वाली आकांक्षा साल 2018 से नव सृजन महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह कोई काम नहीं करती थीं। समूह की सदस्य बनने पर काम करने का मौका मिला। वे अब कागज से घर के सजावटी सामान बनाती हैं, जो खूब पसंद किए जा रहे हैं। इससे उन्हें खासी आमदनी हो जाती है। प्रदर्शनी में भी वह अपने सामान बेचती हैं, जिनकी खासी बिक्री हो जाती हैं। अपने काम से बेहद खुश हैं।
कैंटीन का कुशलता से संचालन कर रहीं मुन्नी
मऊरानीपुर के धमनापायक निवासी मुन्नी कुशवाहा साल 2017 से पार्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुईं हैं। शुरुआत में उन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह और संगठन बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसका उन्होंने कुशलता से निर्वहन किया। पिछले डेढ़ साल से वह महिला जिला अस्पताल में कैंटीन का संचालन करती आ रहीं हैं। मुन्नी देवी ने बताया कि कैंटीन से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। अपने समूह के माध्यम से वह अपने पैरों पर खड़ी हो गईं हैं। दूसरों को भी वह प्रेरित करती हैं।
शासन ने 15,458 लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया है, लेकिन यहां 18,358 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की तैयारी है। इनमें से तीन हजार महिलाओं की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक हो भी चुकी हैं। इन महिलाओं को रविवार को सम्मानित किया जाएगा। - बृजमोहन अंबेड, उपायुक्त स्वत: रोजगार
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। घर के कामकाज में व्यस्त रहने वाली जिले की तीन हजार महिलाओं को अब लखपति दीदी के नाम से जाना जाने लगा है। इन महिलाओं की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
हालांकि, ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अभी जिले में 15 हजार से अधिक महिलाओं को लखपति बनाया जाना है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में साढ़े सात हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। इनसे लगभग 80 हजार महिलाएं जुड़ी हुई हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में इन महिलाओं में से 15,458 को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य शासन की ओर से दिया गया है।
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लखपति दीदी समूह की उस महिला को माना जाएगा, जिसकी सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक होगी। हालांकि, ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत शासन की ओर से दिए गए लक्ष्य से अधिक 18,358 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से तीन हजार को लखपति दीदी का तमगा हासिल भी हो गया है। महिलाओं को इस मुकाम पर पहुंचाने में सरकार के कई विभागों की मदद मिली है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिले में सरकारी राशन की 79 दुकानों का संचालन स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है। बिजली के बिल वसूलने का काम महिलाएं कर रही हैं। विकास भवन और सरकारी अस्पताल में कैंटीन का संचालन भी समूह की महिलाओं की ओर से किया जा रहा है।
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इसके अलावा, फूलों की खेती, ऑर्गेनिक खेती समेत कई कुटीर उद्योग समूह की महिलाओं की ओर से संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण, उनके उत्पाद के विपणन, ऋण आदि में सहयोग किया जा रहा है।
आज सम्मानित होंगी लखपति बहनें
लखपति दीदियों को रविवार को महाराष्ट्र के जलगांव में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित करेंगे। इसी दरम्यान यहां जिला मुख्यालय, विकासखंड मुख्यालय और कलस्टर स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें जनपद की तीन हजार लखपति दीदियों को सम्मानित किया जाएगा।
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स्टेशन पर स्टॉल मिलने से बदले हालात
मऊरानीपुर के स्यावनीखुर्द की रहने वाली सुनीता देवी सितारा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत उन्हें मऊरानीपुर रेलवे स्टेशन पर एक स्टॉल मिला है, जिस पर वह तौलिया, चादर, दरी आदि बेचती हैं। इस काम में उन्हें प्रतिमाह 10-12 हजार रुपये की आमदनी हो जाती है। जबकि पहले वह घर के कामकाज में ही व्यस्त रहती थीं। साल 2019 में वह समूह से जुड़ गईं। इसके बाद हालात बदल गए। अब वह अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं। इस बात का उन्हें गर्व है।
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खूब पसंद किए जा रहे आकांक्षा के सजावटी सामान
बबीना के सिमरावारी की रहने वाली आकांक्षा साल 2018 से नव सृजन महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह कोई काम नहीं करती थीं। समूह की सदस्य बनने पर काम करने का मौका मिला। वे अब कागज से घर के सजावटी सामान बनाती हैं, जो खूब पसंद किए जा रहे हैं। इससे उन्हें खासी आमदनी हो जाती है। प्रदर्शनी में भी वह अपने सामान बेचती हैं, जिनकी खासी बिक्री हो जाती हैं। अपने काम से बेहद खुश हैं।
कैंटीन का कुशलता से संचालन कर रहीं मुन्नी
मऊरानीपुर के धमनापायक निवासी मुन्नी कुशवाहा साल 2017 से पार्वती स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुईं हैं। शुरुआत में उन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूह और संगठन बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसका उन्होंने कुशलता से निर्वहन किया। पिछले डेढ़ साल से वह महिला जिला अस्पताल में कैंटीन का संचालन करती आ रहीं हैं। मुन्नी देवी ने बताया कि कैंटीन से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। अपने समूह के माध्यम से वह अपने पैरों पर खड़ी हो गईं हैं। दूसरों को भी वह प्रेरित करती हैं।
शासन ने 15,458 लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य दिया है, लेकिन यहां 18,358 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की तैयारी है। इनमें से तीन हजार महिलाओं की सालाना आय एक लाख रुपये से अधिक हो भी चुकी हैं। इन महिलाओं को रविवार को सम्मानित किया जाएगा। - बृजमोहन अंबेड, उपायुक्त स्वत: रोजगार