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आपको कौन सी बीमारियां हो सकती हैं अब एप बताएगा
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायोमेडिकल साइंस विभाग अब एक ऐसी एप तैयार कर रहा है, जो आपको भविष्य में होने वाली बीमारी के बारे में पहले ही संकेत दे सकती है। ये परियोजना प्रदेश सरकार द्वारा वित्त पोषित है। 40 फीसदी तक एप बनाने का काम भी पूरा हो चुका है।
इस एप में कोडिंग प्रोग्रामिंग की जा रही है। साथ ही बायो कैलकुलेटर का उपयोग किया जा रहा है, जिसके डाटा का विश्लेषण होगा। जितने भी यूजर इस एप से जुड़ते जाएंगे, उनका डाटा बेस तैयार होता जाएगा। प्रोजेक्ट के समन्वयक डॉ. लवकुश द्विवेदी ने बताया कि एप लोगों की स्वास्थ्य कुंडली तैयार करेगा। सबसे पहले यूजर से कुछ सवाल पूछे जाएंगे। जैसे कि उनका वजन, लंबाई क्या है। हाई बीपी या फिर दिल की बीमारी तो नहीं है। परिवार में किसी को आनुवांशिक बीमारी तो नहीं है आदि। डेटा संग्रह होने के बाद बायो कैलकुलेटर आधारित डेटा विश्लेषण होगा। अंत में व्यक्ति को भविष्य में हो सकने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही बीमारियों से कैसे निपटा जा सकता है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी। कहा कि एप के आधार पर तैयार डेटा बेस का उपयोग सरकार, नीति निर्माता आम जन के लिए स्वास्थ्य नीतियां बनाने के लिए भी कर सकेंगे।
कामकाम के दौरान होने वाले खतरों से भी करेगा अलर्ट
ये एप व्यवसाय या फिर नौकरी के चलते जो बीमारियां हो सकती हैं, इसको लेकर भी एलर्ट करेगा। जैसे कि ट्रैफिक पुलिस, क्रशर के कर्मचारी, वेल्डर, रिक्शा चालकर या फ्लैक्स बनाने वाले को किन-किन बीमारियों का खतरा है, इसकी जानकारी भी मिलेगी।
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बीयू छात्रों ने एयरक्राफ्ट से लेकर ड्रोन तक किया तैयार
झांसी। नई-नई तकनीकी सीखकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र कुछ न कुछ नवाचार करते रहते हैं। बीयू के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर इंजी. राहुल शुक्ला ने बताया कि 2019 में आईआईटी कानपुर में एरोडायनमिक्स सिखाने के उद्देश्य से कार्यशाला हुई। इस कार्यशाला में हिस्सा लेने के बाद छात्र अमित कुमार ने बायोफोरम से हल्का एयरक्राफ्ट बनाना सीखा। इसके अलावा छात्रों ने ड्रोन तकनीकी भी सीखी और एक ड्रोन बनाया। जो कि हेक्साकॉप्टर मैनुअल अथवा ऑटोमेटिक पेस्टिसाइड ड्रोन है। उन्होंने बताया कि इस ड्रोन को कोई मिशन भी दे सकते हैं। फिर ये बिना रेडियो कंट्रोल के ऑटोमेटिक उड़ता रहेगा।
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इस एप में कोडिंग प्रोग्रामिंग की जा रही है। साथ ही बायो कैलकुलेटर का उपयोग किया जा रहा है, जिसके डाटा का विश्लेषण होगा। जितने भी यूजर इस एप से जुड़ते जाएंगे, उनका डाटा बेस तैयार होता जाएगा। प्रोजेक्ट के समन्वयक डॉ. लवकुश द्विवेदी ने बताया कि एप लोगों की स्वास्थ्य कुंडली तैयार करेगा। सबसे पहले यूजर से कुछ सवाल पूछे जाएंगे। जैसे कि उनका वजन, लंबाई क्या है। हाई बीपी या फिर दिल की बीमारी तो नहीं है। परिवार में किसी को आनुवांशिक बीमारी तो नहीं है आदि। डेटा संग्रह होने के बाद बायो कैलकुलेटर आधारित डेटा विश्लेषण होगा। अंत में व्यक्ति को भविष्य में हो सकने वाली बीमारियों के बारे में बताया जाएगा। साथ ही बीमारियों से कैसे निपटा जा सकता है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी। कहा कि एप के आधार पर तैयार डेटा बेस का उपयोग सरकार, नीति निर्माता आम जन के लिए स्वास्थ्य नीतियां बनाने के लिए भी कर सकेंगे।
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कामकाम के दौरान होने वाले खतरों से भी करेगा अलर्ट
ये एप व्यवसाय या फिर नौकरी के चलते जो बीमारियां हो सकती हैं, इसको लेकर भी एलर्ट करेगा। जैसे कि ट्रैफिक पुलिस, क्रशर के कर्मचारी, वेल्डर, रिक्शा चालकर या फ्लैक्स बनाने वाले को किन-किन बीमारियों का खतरा है, इसकी जानकारी भी मिलेगी।
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बीयू छात्रों ने एयरक्राफ्ट से लेकर ड्रोन तक किया तैयार
झांसी। नई-नई तकनीकी सीखकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र कुछ न कुछ नवाचार करते रहते हैं। बीयू के मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर इंजी. राहुल शुक्ला ने बताया कि 2019 में आईआईटी कानपुर में एरोडायनमिक्स सिखाने के उद्देश्य से कार्यशाला हुई। इस कार्यशाला में हिस्सा लेने के बाद छात्र अमित कुमार ने बायोफोरम से हल्का एयरक्राफ्ट बनाना सीखा। इसके अलावा छात्रों ने ड्रोन तकनीकी भी सीखी और एक ड्रोन बनाया। जो कि हेक्साकॉप्टर मैनुअल अथवा ऑटोमेटिक पेस्टिसाइड ड्रोन है। उन्होंने बताया कि इस ड्रोन को कोई मिशन भी दे सकते हैं। फिर ये बिना रेडियो कंट्रोल के ऑटोमेटिक उड़ता रहेगा।