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आचार संहिता के फेर में फंसा जल संकट

Thu, 02 May 2019 12:56 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Thu, 02 May 2019 12:56 AM IST
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wattter problems not solve til loksabha election resuls
tankar - फोटो : demo
झांसी। मंगलवार को महापौर रामतीर्थ सिंघल ने भीषण गर्मी में शहरी क्षेत्र में होनी वाली वाली समस्या को दूर करने के लिए जल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक की। उसमें कई मुद्दे उठे पर निष्कर्ष कोई नहीं निकला। जल संस्थान के जीएम ने बजट न होने की दलील दी। वहीं जल निगम के अधिशासी अभियंता ने जल संकट को देखते हुए आपूर्ति बढ़ाने से इंकार कर दिया। पानी की समस्या को लेकर जनता को आचार संहिता हटने तक इंतजार करना होगा। क्योंकि, उसके बाद ही नगर निगम बजट जारी कर सकेगा।
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ज्यों-ज्यों पारा चढ़ रहा है वैसे-वैसे जल संकट बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि जो हैंडपंप अभी तक पानी उगल रहे थे वह भी लोगों को अब तरसा रहे हैं। लोग अभी से दूर दराज से पानी लाने को मजबूर हैं। इन्हीं समस्याओं पर महापौर ने जल निगम और जल संस्थान के अधिकारियों को बैठक में शामिल कर संकट से उबारने के लिए हाथ आगे बढ़ाए पर दोनों विभागों ने जनता की समस्या छोड़ अपने-अपने विभाग की समस्या गिनाना शुरू कर दीं। कुल मिलाकर अंत में यह निर्णय हुआ कि सप्लाई के पानी पर जनता को आधारित रहना होगा। क्योंकि, नगर निगम आचार संहिता हटने के बाद ही विभागों को जल संकट दूर करने के लिए बजट उपलब्ध करा सकेगा। तब तक जनता के पास जो वैकल्पिक व्यवस्था है उस पर निर्भर रहना होगा। बैठक में जल संस्थान के जीएम आरएस यादव, जल निगम से अधिशासी अभियंता नरेंद्र वर्मा मौजूद रहे।
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पर्याप्त पानी की हो रही आपूर्ति
जल निगम के अधिकारियों की मानें तो शहर में सप्लाई को लेकर किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। बबीना फिल्टर से शहर की आपूर्ति के लिए 111 एमएलडी पानी सप्लाई किया जा रहा है पर 90-93 एमएलडी पानी शहर की टंकियों तक पहुंच रहा है। जो कि शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा 37 एमएलडी की एक लाइन एमईएस क्षेत्र में सप्लाई के लिए है, जिससे आपूर्ति सुचारु रूप से हो रही है।
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सुविधा के नाम पर दिखाया ठेंगा
जल संस्थान के अधिकारियों ने पानी के संकट को दूर करने के लिए शहर भर के लीकेज से लेकर खराब हैंडपंपों को सुधारने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। जीएम आरएस यादव ने बताया कि लीकेज ठीक करने के लिए उनके पास मजदूर नहीं हैं तो दूसरी ओर हैंडपंप सुधारने के लिए बजट नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें दिसंबर वर्ष 2018 में बजट के रूप में पांच करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे पर वह मंडल के कर्मचारियों के वेतन पर ही खर्च हो गए। अब नगर निगम की ओर से प्रदान किए गए बजट से ही शहर की प्यास बुझाई जा सकेगी।


तकनीक नहीं, अंदाजे पर ही होगी बोरिंग
पिछले साल प्रत्येक वार्ड में दो-दो हैंडपंप लगाए गए थे। उन पर नगर निगम ने लाखों रुपये व्यय किए थे। लेकिन, आलम यह हुआ कि उन नई बोरिंगों में कई ड्राई निकली तो कई कुछ दिन पानी देने के बाद सूख गए। इस बार भी जल निगम तकनीक अपनाने को तैयार नहीं है। अगर हैंडपंप लगाने का आर्डर नगर निगम से मिलता है तो जल निगम पार्षदों के द्वारा चिह्नित स्थानों पर ही बोरिंग करेगी।


पिछले साल 26,79,600 रुपये गए थे बर्बाद
नगर निगम ने पिछली गर्मियों ने 60 वार्डों में 120 हैंडपंप लगाए गए थे। पार्षदों को प्रत्येक वार्ड में दो-दो हैंडपंपों के लिए स्थान चिह्नित किए थे। हैंडपंप लगाने का काम एक निजी बोरिंग कंपनी को सौंपा गया था। एक हैंडपंप की बोरिंग पर जल निगम को 81,200 रुपये दिए गए थे। उनमें से 32 बोरिंग ड्राई निकली थीं। जबकि, कुछ ऐसी भी बोरिंग थीं जिसमें कुछ दिन तक क्षेत्रवासियों को उसका पानी नसीब हुआ। उसके बाद वह भी दगा दे गए थे। इनमें प्रमुख क्षेत्र जहां हैंडपंप ड्राई निकले थे उनमें वार्ड क्रमांक चार खुशीपुरा, वार्ड नंबर 19 बंग्लाघाट, वार्ड नंबर 32 पिछोर, वार्ड नंबर 34 नई बस्ती द्वितीय, वार्ड नंबर 38 अलीगोल द्वितीय और वार्ड नंबर 42 सागर गेट शामिल थे। इन 32 ड्राई हैंडपंपों की कीमत आंकी जाए तो कुल 26,79,600 रुपये होती है, जो बर्बाद गए थे।


इलाहबाद बैंक चौराहा के पास दूर होगा संकट
इलाहाबाद बैंक चौराहे के पास रहने वाले लोग तकरीबन दस दिन से पानी को तरस रहे हैं। सप्लाई का पानी न मिलने से उन्हें यहां-वहां से व्यवस्था करनी पड़ रही है। इस पर जल निगम के अधिशासी अभियंता नरेंद्र वर्मा ने आश्वासन दिया है कि उस क्षेत्र में आपूर्ति के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। पांच इंच की लाइन को आठ इंच की लाइन से जोड़ा जाएगा। ताकि, उस क्षेत्र में रहने वालों को पानी मिल सके।


शहर में गहराए जल संकट को दूर करने के लिए जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों से समाधान मांगा गया है। दोनों विभागों के अधिकारियों ने सहयोग देने का आश्वासन दिया है। जल्द ही सूखेग्रस्त इलाकों तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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