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पानी चोरों पर लगेगी लगाम, सूची में चढ़ेगा नाम
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झांसी। महानगर में बिना कनेक्शन लिए पानी का उपयोग करने वालों का सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे फरवरी में पूरा होगा। इसके बाद दो तरह की अलग-अलग सूचियां बनाई जाएंगी। इसमें से एक सूची में ऐसे लोगों को रखा जाएगा, जिनके मकान पाइपलाइन से आसपास सौ मीटर की दूरी पर हैं और पानी का कनेक्शन नहीं लिया है और दूसरे उन लोगों की अलग सूची बनाई जाएगी, जो अवैध तरीके से पाइपलाइन में कट करके अपने घर में पानी का उपयोग कर रहे हैं।
महानगर में जलसंस्थान के 42 हजार कनेक्शन हैं। माताटीला बांध से पर्याप्त पानी आता है। इसके बाद भी पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है। कई क्षेत्रों में एक टाइम तो कई जगहों पर दोनों टाइम पानी की आपूर्ति की जाती है। लोग पानी की मांग करते रहते हैं। लोगों को पानी नहीं मिलने की मुख्य वजह अवैध कनेक्शन हैं, जो पानी को खींच लेते हैं और कनेक्शनधारक पानी के लिए परेशान होते रहते हैं। ऐसे में विभाग ने ऐसे अवैध कनेक्शनों का सर्वे करने का निर्णय लिया है।
इसके अलावा कई लोग ऐसे हैं, जिनके घरों के आसपास सौ मीटर के दायरे में पानी की पाइपलाइन निकली हुई, लेकिन लोगों के घरों में कनेक्शन नहीं हैं। लोगों का तर्क है कि उनके घरों में बोरिंग से पानी आता है, इसलिए कनेक्शन की जरूरत नहीं है। जबकि विभाग का मानना है कि यदि मकान के सौ मीटर के आसपास से पाइपलाइन निकली है तो आप नल के पानी का उपयोग करते हैं, भले ही कनेक्शन हो या नहीं।
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इसलिए सर्वे करने वाली एजेंसी दो अलग- अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं का रिकार्ड तैयार करेगी। सर्वे पूरा हो जाने के बाद उपभोक्ताओं का पूरा रिकार्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा और सभी से पानी का पैसा लिया जाएगा।
जलसंस्थान उपभोक्ताओें से बिल वसूलने के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल करता है। इसमें से एक जलमूल्य और दूसरा जलकर। जलमूल्य का आशय पानी का बिल होता है, जो 1318 रुपये है। दूसरी ओर, हाउस टैक्स का 12.5 प्रतिशत जलमूल्य जमा कराया जाता है। इस कारण बिल अलग- अलग आते हैं। इन बिलों की वजह से उपभोक्ता अक्सर विवाद करते हैं। नियमत: पाइपलाइन के आसपास सौ मीटर दूरी पर यदि आपका मकान है तो जलकर देना अनिवार्य है।
सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे के लिए कंपनी को 75 दिन का समय दिया गया है। सर्वे समय पर पूरा कर लिया जाएगा।
- कुलदीप सिंह्र, महाप्रबंधक जल संस्थान
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महानगर में जलसंस्थान के 42 हजार कनेक्शन हैं। माताटीला बांध से पर्याप्त पानी आता है। इसके बाद भी पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती है। कई क्षेत्रों में एक टाइम तो कई जगहों पर दोनों टाइम पानी की आपूर्ति की जाती है। लोग पानी की मांग करते रहते हैं। लोगों को पानी नहीं मिलने की मुख्य वजह अवैध कनेक्शन हैं, जो पानी को खींच लेते हैं और कनेक्शनधारक पानी के लिए परेशान होते रहते हैं। ऐसे में विभाग ने ऐसे अवैध कनेक्शनों का सर्वे करने का निर्णय लिया है।
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इसके अलावा कई लोग ऐसे हैं, जिनके घरों के आसपास सौ मीटर के दायरे में पानी की पाइपलाइन निकली हुई, लेकिन लोगों के घरों में कनेक्शन नहीं हैं। लोगों का तर्क है कि उनके घरों में बोरिंग से पानी आता है, इसलिए कनेक्शन की जरूरत नहीं है। जबकि विभाग का मानना है कि यदि मकान के सौ मीटर के आसपास से पाइपलाइन निकली है तो आप नल के पानी का उपयोग करते हैं, भले ही कनेक्शन हो या नहीं।
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इसलिए सर्वे करने वाली एजेंसी दो अलग- अलग श्रेणी के उपभोक्ताओं का रिकार्ड तैयार करेगी। सर्वे पूरा हो जाने के बाद उपभोक्ताओं का पूरा रिकार्ड पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा और सभी से पानी का पैसा लिया जाएगा।
जलसंस्थान उपभोक्ताओें से बिल वसूलने के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल करता है। इसमें से एक जलमूल्य और दूसरा जलकर। जलमूल्य का आशय पानी का बिल होता है, जो 1318 रुपये है। दूसरी ओर, हाउस टैक्स का 12.5 प्रतिशत जलमूल्य जमा कराया जाता है। इस कारण बिल अलग- अलग आते हैं। इन बिलों की वजह से उपभोक्ता अक्सर विवाद करते हैं। नियमत: पाइपलाइन के आसपास सौ मीटर दूरी पर यदि आपका मकान है तो जलकर देना अनिवार्य है।
सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे के लिए कंपनी को 75 दिन का समय दिया गया है। सर्वे समय पर पूरा कर लिया जाएगा।
- कुलदीप सिंह्र, महाप्रबंधक जल संस्थान