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ठेके की मियाद के साथ पानी की सप्लाई भी ठप
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Sat, 26 Aug 2017 01:10 AM IST
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बीती 31 जुलाई को तय समय सीमा खत्म होने के बाद जल संस्थान ने पेयजल संकट से ग्रस्त इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाना बंद कर दिया है। साथ ही गिरते भूगर्भ जलस्तर के कारण इन इलाकों में ज्यादातर हैंडपंप भी ठप हो गए हैं। इससे 29 मोहल्लों की कोई दो लाख की आबादी प्रभावित है। इस बड़े संकट पर न तो जलसंस्थान का ध्यान है और न ही किसी नेता का।
महानगर में 29 से अधिक जल संकटग्रस्त क्षेत्र हैं, जिनमें गर्मी की शुरूआत होते ही हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगता है। अधिकांश निजी बोरिंग भी साथ छोड़ देती हैं। इसके बाद इक्का- दुक्का चालू सरकारी हैंडपंप ही लोगों का सहारा बनते हैं। इस संकट से निपटने के लिए जल संस्थान 15 अप्रैल से 30 जुलाई तक क्षेत्रों में टैंकर भेजकर पानी की आपूर्ति करता है। आमतौर पर जुलाई में बारिश होने पर जलस्तर बढ़ जाता है और सूखे हैंडपंपों से पानी निकलना शुरू हो जाता है। मगर, इस बार मौसम की बेरुखी से 25 फीसदी भी बारिश अभी तक नहीं हुई है। इससे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के हैंडपंपों की स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। गर्मी और उमस ने भी पानी की जरूरत को कम नहीं किया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
शुक्रवार को इस समस्या को लेकर गुमनावारा और महाराणा प्रतापनगर के लोगों ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता से मुलाकात कर दोबारा पानी के टैंकरों का संचालन शुरू करने की मांग की। इस मौके पर जल निर्माण समिति के अध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान, विनय उपाध्याय, क्रांति कुमार शर्मा, बृजबिहारी पटैरिया, कोमल चंद्र वर्मा मौजूद थे। लेकिन जलसंस्थान ने हाथ खड़े कर दिए। खास बात यह कि जलसंस्थान संकट को देख अपनी नीति भी नहीं बदल रहा। दरअसल टैंकरों से पानी की सप्लाई का काम निजी ठेकेदारों के जरिए करवाया जाता है और इसके लिए लंबी टेंडर प्रक्रिया होती है। ठेका 31 जुलाई तक ही था और इसी कारण अब टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई ठप है। अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया में समय लग सकता है। शासन और प्रशासन चाहे तो आदेश जारी कर टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई तत्काल शुरू की जा सकती है।
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समाधान करेंगे
टैंकरों का से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद से संकटग्रस्त क्षेत्रों से शिकायतें आ रही हैं। मैं शीघ्र ही महाप्रबंधक से वार्ता कर दोबारा टैंकर संचालन की योजना बना रहा हूं। जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद टैंकरों का संचालन शुरू किया जाएगा
गजानंद उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जल संस्थान।
संकटग्रस्त इलाके
इनमें करगुवांजी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रतापनगर, मयूर विहार कालोनी, सराय, सिलवटगंज, डड़ियापुरा, मद्रासी कालोनी, सत्यम कालोनी, अन्नपूर्णा कालोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, गढ़िया गांव, वीरांगना नगर, पाल कालोनी, सिद्धेश्वर नगर, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट, मुकरयाना, मैला की टौरिया, मसीहागंज, लहरगिर्द, करारी, राजपूत नगर, प्रेमनगर क्षेत्र की कृष्णा नगर कालोनी, खैरा शामिल हैं।
फोटो
दूर से ला रहे पानी
मुझे एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। जिस हैंडपंप में पानी आ रहा है, उस पर भी रात दो बजे से लोग पानी भरने के लिए पहुंचना शुरू हो जाते हैं। इस उम्र में पानी भरना बहुत पीड़ादायक बना हुआ है।
ग्याप्रसाद प्रजापति, महाराणा प्रताप नगर।
फोटो
पानी खरीदने की आ रही नौबत
क्षेत्र में एक ही हैंडपंप से पानी निकल रहा है। अगर, उसका भी जलस्तर गिर गया तो पानी खरीदने की नौबत आ जाएगी। मैं पानी की कमी से दो दिन में नहा रहा हूं।
अंबिका प्रसाद गुप्ता, महाराणा प्रताप नगर।
फोटो
शोपीस बनी पानी की टंकी
मेरे घर की छत पर पानी की टंकी है, लेकिन आज तक वह पानी से नहीं भर सकी। शोपीस बनकर रह गई है। बाल्टियों में पानी लाते हैं, उसी से काम चलाना पड़ता है। कॉलोनी के सभी घरों में एक सी ही स्थिति है।
श्याम सुंदर मिश्रा, महाराणा प्रताप नगर।
फोटो
हर बार मिलता है आश्वासन
मैं क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर कई बार जिलाधिकारी, जलसंस्थान और जल निगम अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन हर बार समस्या को जल्द दूर करने का आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है।
प्रदीप सिंह चौहान, गुमनावारा।
फोटो
दो घंटे में निकलता दो बाल्टी पानी
हैंडपंप से दो घंटे में दो बाल्टी पानी निकल रहा है। पानी की समस्या का विकल्प भी पास में नहीं है। इस समस्या ने मेरा जीना मुहाल कर दिया है। घर का माहौल भी खराब हो रहा है।
राजू सोनी
फोटो
खुले में शौचालय जाने को मजबूर
केंद्र सरकार खुले में शौचालय जाने से रोक रही है। वहीं, हम लोग पानी की कमी के कारण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। पूरी दिनचर्या बिगड़ चुकी है।
राहुल बिजौैलिया, गुमनावारा।
फोटो
पाइप लाइन क्यों नहीं बिछाते
हर साल जल संस्थान टैंकरों के संचालन में 50 से 60 लाख रुपये का खर्चा दिखाता है। जिला प्रशासन अगर उतनी राशि में क्षेत्र में पाइप लाइन डाल दे तो समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
बृजबिहारी पटैरिया, गुमनावारा।
पलायन कर रहे लोग
पानी न होने से क्षेत्र के कई परिवार खुद के घर छोड़कर दूसरी जगह किराए पर रहे हैं। मेरा परिवार भी मुश्किल से दिन काट रहा है। लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
सीएल तिवारी, गुमनावारा।
तात्कालिक पेयजल व्यवस्था ठंडे बस्ते में
फरवरी 2016 में उक्त क्षेत्रों की परेशानी देखते हुए तत्कालीन डीएम ने जल निगम को तात्कालिक पेयजल व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। जल निगम ने नलकूप लगाने, पाइप लाइन बिछाने, पंप हाउस बनाने, क्लोरीनेटिंग प्लांट, विद्युत संयोजन समेत अन्य कार्य के लिए 33.29 लाख की कार्य योजना बनाकर शासन को भेज दी थी। लेकिन बजट न मिलने से योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
आंकड़े दुरुस्त करने में जुटे
जल संस्थान इस बार टैंकर संचालन में 70 लाख रुपये खर्च दिखाने की तैयारी कर रहा है। पिछले वर्षों तक 50 लाख रुपये की खर्च दिखाया जाता है। पता चला है कि पहले एक दिन में डेढ़ सौ तक ही टैंकरों के चक्कर लगते थे, लेकिन इस बार 250 से 300 एक दिन में चक्कर लगे। जलसंस्थान यह आंकड़े कागजों फिट करने में लगा हुआ है। सवाल यह भी है कि जल संस्थान के पास पानी भरने के चार ही प्वाइंट हैं और एक टैंकर को भरने में कम से कम आधे घंटे का समय लग जाता है तो ऐसे में चक्कर कैसे बढ़ गए? इसका जवाब देने से अधिकारी बच रहे हैं।
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बीती 31 जुलाई को तय समय सीमा खत्म होने के बाद जल संस्थान ने पेयजल संकट से ग्रस्त इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाना बंद कर दिया है। साथ ही गिरते भूगर्भ जलस्तर के कारण इन इलाकों में ज्यादातर हैंडपंप भी ठप हो गए हैं। इससे 29 मोहल्लों की कोई दो लाख की आबादी प्रभावित है। इस बड़े संकट पर न तो जलसंस्थान का ध्यान है और न ही किसी नेता का।
महानगर में 29 से अधिक जल संकटग्रस्त क्षेत्र हैं, जिनमें गर्मी की शुरूआत होते ही हैंडपंपों से पानी निकलना बंद होने लगता है। अधिकांश निजी बोरिंग भी साथ छोड़ देती हैं। इसके बाद इक्का- दुक्का चालू सरकारी हैंडपंप ही लोगों का सहारा बनते हैं। इस संकट से निपटने के लिए जल संस्थान 15 अप्रैल से 30 जुलाई तक क्षेत्रों में टैंकर भेजकर पानी की आपूर्ति करता है। आमतौर पर जुलाई में बारिश होने पर जलस्तर बढ़ जाता है और सूखे हैंडपंपों से पानी निकलना शुरू हो जाता है। मगर, इस बार मौसम की बेरुखी से 25 फीसदी भी बारिश अभी तक नहीं हुई है। इससे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के हैंडपंपों की स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। गर्मी और उमस ने भी पानी की जरूरत को कम नहीं किया है। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है।
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शुक्रवार को इस समस्या को लेकर गुमनावारा और महाराणा प्रतापनगर के लोगों ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता से मुलाकात कर दोबारा पानी के टैंकरों का संचालन शुरू करने की मांग की। इस मौके पर जल निर्माण समिति के अध्यक्ष प्रदीप सिंह चौहान, विनय उपाध्याय, क्रांति कुमार शर्मा, बृजबिहारी पटैरिया, कोमल चंद्र वर्मा मौजूद थे। लेकिन जलसंस्थान ने हाथ खड़े कर दिए। खास बात यह कि जलसंस्थान संकट को देख अपनी नीति भी नहीं बदल रहा। दरअसल टैंकरों से पानी की सप्लाई का काम निजी ठेकेदारों के जरिए करवाया जाता है और इसके लिए लंबी टेंडर प्रक्रिया होती है। ठेका 31 जुलाई तक ही था और इसी कारण अब टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई ठप है। अब दोबारा टेंडर प्रक्रिया में समय लग सकता है। शासन और प्रशासन चाहे तो आदेश जारी कर टैंकरों के जरिए पानी की सप्लाई तत्काल शुरू की जा सकती है।
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टैंकरों का से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद से संकटग्रस्त क्षेत्रों से शिकायतें आ रही हैं। मैं शीघ्र ही महाप्रबंधक से वार्ता कर दोबारा टैंकर संचालन की योजना बना रहा हूं। जिलाधिकारी की स्वीकृति के बाद टैंकरों का संचालन शुरू किया जाएगा
गजानंद उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जल संस्थान।
संकटग्रस्त इलाके
इनमें करगुवांजी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रतापनगर, मयूर विहार कालोनी, सराय, सिलवटगंज, डड़ियापुरा, मद्रासी कालोनी, सत्यम कालोनी, अन्नपूर्णा कालोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, गढ़िया गांव, वीरांगना नगर, पाल कालोनी, सिद्धेश्वर नगर, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट, मुकरयाना, मैला की टौरिया, मसीहागंज, लहरगिर्द, करारी, राजपूत नगर, प्रेमनगर क्षेत्र की कृष्णा नगर कालोनी, खैरा शामिल हैं।
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दूर से ला रहे पानी
मुझे एक किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। जिस हैंडपंप में पानी आ रहा है, उस पर भी रात दो बजे से लोग पानी भरने के लिए पहुंचना शुरू हो जाते हैं। इस उम्र में पानी भरना बहुत पीड़ादायक बना हुआ है।
ग्याप्रसाद प्रजापति, महाराणा प्रताप नगर।
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पानी खरीदने की आ रही नौबत
क्षेत्र में एक ही हैंडपंप से पानी निकल रहा है। अगर, उसका भी जलस्तर गिर गया तो पानी खरीदने की नौबत आ जाएगी। मैं पानी की कमी से दो दिन में नहा रहा हूं।
अंबिका प्रसाद गुप्ता, महाराणा प्रताप नगर।
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शोपीस बनी पानी की टंकी
मेरे घर की छत पर पानी की टंकी है, लेकिन आज तक वह पानी से नहीं भर सकी। शोपीस बनकर रह गई है। बाल्टियों में पानी लाते हैं, उसी से काम चलाना पड़ता है। कॉलोनी के सभी घरों में एक सी ही स्थिति है।
श्याम सुंदर मिश्रा, महाराणा प्रताप नगर।
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हर बार मिलता है आश्वासन
मैं क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर कई बार जिलाधिकारी, जलसंस्थान और जल निगम अधिकारियों को ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन हर बार समस्या को जल्द दूर करने का आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है।
प्रदीप सिंह चौहान, गुमनावारा।
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दो घंटे में निकलता दो बाल्टी पानी
हैंडपंप से दो घंटे में दो बाल्टी पानी निकल रहा है। पानी की समस्या का विकल्प भी पास में नहीं है। इस समस्या ने मेरा जीना मुहाल कर दिया है। घर का माहौल भी खराब हो रहा है।
राजू सोनी
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खुले में शौचालय जाने को मजबूर
केंद्र सरकार खुले में शौचालय जाने से रोक रही है। वहीं, हम लोग पानी की कमी के कारण खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। पूरी दिनचर्या बिगड़ चुकी है।
राहुल बिजौैलिया, गुमनावारा।
फोटो
पाइप लाइन क्यों नहीं बिछाते
हर साल जल संस्थान टैंकरों के संचालन में 50 से 60 लाख रुपये का खर्चा दिखाता है। जिला प्रशासन अगर उतनी राशि में क्षेत्र में पाइप लाइन डाल दे तो समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
बृजबिहारी पटैरिया, गुमनावारा।
पलायन कर रहे लोग
पानी न होने से क्षेत्र के कई परिवार खुद के घर छोड़कर दूसरी जगह किराए पर रहे हैं। मेरा परिवार भी मुश्किल से दिन काट रहा है। लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
सीएल तिवारी, गुमनावारा।
तात्कालिक पेयजल व्यवस्था ठंडे बस्ते में
फरवरी 2016 में उक्त क्षेत्रों की परेशानी देखते हुए तत्कालीन डीएम ने जल निगम को तात्कालिक पेयजल व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। जल निगम ने नलकूप लगाने, पाइप लाइन बिछाने, पंप हाउस बनाने, क्लोरीनेटिंग प्लांट, विद्युत संयोजन समेत अन्य कार्य के लिए 33.29 लाख की कार्य योजना बनाकर शासन को भेज दी थी। लेकिन बजट न मिलने से योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
आंकड़े दुरुस्त करने में जुटे
जल संस्थान इस बार टैंकर संचालन में 70 लाख रुपये खर्च दिखाने की तैयारी कर रहा है। पिछले वर्षों तक 50 लाख रुपये की खर्च दिखाया जाता है। पता चला है कि पहले एक दिन में डेढ़ सौ तक ही टैंकरों के चक्कर लगते थे, लेकिन इस बार 250 से 300 एक दिन में चक्कर लगे। जलसंस्थान यह आंकड़े कागजों फिट करने में लगा हुआ है। सवाल यह भी है कि जल संस्थान के पास पानी भरने के चार ही प्वाइंट हैं और एक टैंकर को भरने में कम से कम आधे घंटे का समय लग जाता है तो ऐसे में चक्कर कैसे बढ़ गए? इसका जवाब देने से अधिकारी बच रहे हैं।