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गांव में झील, फिर भी घरों में है पानी की कमी

Wed, 07 Apr 2021 01:40 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 01:40 AM IST
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water shortage in gadmau, even huge lake in area
पंचायत चुनावः गढ़मऊ ग्राम सभा वाली खबर के साथ --- गढ़मऊ गांव की खस्ताहाल सड़क - फोटो : REPORTERS
झांसी। बड़ागांव विकासखंड की चर्चित ग्राम सभाओं में से एक गढ़मऊ है। यह ग्राम सभा पर्यटन की असीम संभावनाओं से भरी है। यहां स्थित झील पूरे बुंदेलखंड में मशहूर है। बावजूद, गांव में पीने के पानी की कमी है। वहीं, यहां से निकली नहर में से पानी का रिसाव होता रहने की वजह से कई खेत जलमग्न बने रहते हैं। इसके अलावा सड़कों की दशा भी खराब है और गंदगी हर ओर नजर आती है। पंचायत चुनाव की डुगडुगी पिटने के साथ ही समस्याओं के समाधान के वादे के साथ दावेदार घर-घर दस्तक देने लगे हैं। मतदाता भी सभी दावेदारों को वोट देने का भरोसा देने में पीछे नहीं हैं।
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गढ़मऊ ग्राम सभा में गढ़मऊ और गांधी नगर दो गांव आते हैं। ग्राम सभा की आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है और इनमें मतदाताओं की संख्या 2337 है। पिछले पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधान की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित थी। जबकि, इस चुनाव में ये सीट अनारक्षित महिला के खाते में गई है। गढ़मऊ गांव में चारों ओर पहाड़ियों से घिरी हुई एक झील है। इसके पर्यटन विकास के लिए कई योजनाएं बनाई गईं और करोड़ों रुपये खर्च भी किए गए, परंतु कोई भी योजना अपने अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। झील के गांव के नाम से मशहूर इस ग्राम सभा में पानी की खासी कमी है। खासतौर पर आबादी के बीच भूगर्भ जल का स्तर बेहद नीचे है। गर्मी की शुरुआत के साथ ही हैंडपंप, बोरिंग साथ छोड़ देते हैं।
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लोगों को पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता है। गांव की सड़कों का बुरा हाल है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे नजर आते हैं। लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा गढ़मऊ के पास से निकली नहर में लगातार रिसाव होता रहता है। नहर का पानी आसपास के खेतों में भर जाने से खेती नहीं हो पाती है। ग्रामीणों की ओर से कई बार इस समस्या को उठाया जा चुका है। बावजूद, समाधान नहीं हो पाया है। इस चुनाव में प्रत्याशी इन्हीं सब समस्याओं के समाधान के वादे के साथ मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। हालांकि, मतदाताओं का कहना है कि हर चुनाव में ये समस्याएं मुद्दा बनती हैं। लेकिन, चुनाव के बाद इन्हें भुला दिया जाता है।
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पास में झील, फिर भी पानी की कमी
झांसी। गांव में पानी की कमी की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी का सामना महिलाओं को करना पड़ता है। घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें दूर से पानी लाना पड़ता है। महिलाओं का कहना है कि पास में झील होने के बाद भी पानी की कमी है। ये बेहद अफसोसजनक स्थिति है। झील का पानी पाइप लाइन के जरिये घरों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
हर चुनाव में नेता पानी की समस्या के समाधान का भरोसा दिलाते हैं। लेकिन, बाद में सब भूल जाते हैं। गांव में ही झील है। ऐसे में गांव के भीतर पानी का प्रबंध करना कोई मुश्किल काम नहीं है।
- रिंकी पाल
गर्मी की शुरुआत के साथ ही हैंडपंप साथ छोड़ जाते हैं। ऐसे में तीन - चार महीने बेहद मुसीबत में गुजरते हैं। पानी के लिए बहुत परेशान होना पड़ता है। बावजूद, ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
- मेवा झा
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प्रत्याशियों को परखने के बाद देंगे पहला वोट
झांसी। ग्राम सभा में 110 मतदाता ऐसे हैं, जो पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इसी चुनाव में उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ा गया है। इन युवा वोटरों का कहना है कि पहली बार उन्हें लोकतंत्र के यज्ञ में आहुति देने का मौका मिला है। ये महत्वपूर्ण अवसर है। परखने के बाद ही वो सही प्रत्याशी को अपना वोट देंगे।
पहली बार वोट देने का अवसर हासिल हुआ है। सभी प्रत्याशी बड़े - बड़े दावे और वादों के साथ मैदान में हैं। लेकिन, पहला वोट सही प्रत्याशी को ही जाएगा।
- विवेक भार्गव
वोट पार्टी या जाति को देखकर नहीं दिया जाएगा। क्षेत्र के विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पहली बार मतदान किया जाएगा। वोट उसे जाएगा, जिसके पास विकास की सोच होगी।
- रामनिवास
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खेतों में पानी की जरूरत न होने के बाद भी गढ़मऊ झील से निकलने वाली नहर लगातार चलती रहती है। इससे पानी की बर्बादी होती है। जबकि, जरूरत पर पानी नहीं मिल पाता है।
- कालका दुबे
गढ़मऊ झील को आसानी से बड़ा पर्यटक स्थल बनाया जा सकता है। इससे क्षेत्र का विकास होगा व रोजगार बढ़ेंगे। हालांकि, पहले योजना बनीं थीं, लेकिन पूरी नहीं हो पाईं।

- राजू
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गुप्त मतदान नहीं, खुलेआम होता था चुनाव
झांसी। पहले पंचायत चुनाव में गुप्त मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। बल्कि, खुलेआम प्रत्याशियों का चयन कर लिया जाता था। ये कहना है गढ़मऊ के बुजुर्ग कल्लू पाल का। उन्होंने कहा कि प्रधान के चयन के लिए गांव में चौपाल लगती थी। उसमें सभी वर्गों के लोग शामिल होते थे। प्रत्याशी भी पहुंचते थे। जिसके पक्ष में ज्यादा हाथ उठ जाते थे, उसे ही चुन लिया जाता है।
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