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अब पहले चरण का काम एक ही कंपनी को दिया जाएगा
jhansi
Updated Fri, 13 Oct 2017 01:10 AM IST
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- फोटो : demo pic
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मुख्य सचिव के आदेश पर पेयजल महायोजना की टेंडर प्रक्रिया दूसरी बार भी निरस्त कर दी गई है। ताजा निर्देश है कि पहले चरण की योजना का ठेका एक ही कंपनी को दिया जाए। ऐसा इसलिए कि काम तेजी से हो और कंपनी की जवाबदेही भी रहे। अब नई प्रक्रिया के तहत 27 अक्तूबर को टेंडर डाले जाएंगे और 30 अक्तूबर को खोले जाएंगे।
वर्ष 2010 में बनी यह योजना 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पर पहुंच गई हैं, जिसका तीन चरणों में काम पूरा होना है। इस योजना के तहत झांसी में पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम किया जाना है। इसके लिए केंद्र सरकार पचास प्रतिशत, प्रदेश सरकार तीस प्रतिशत और नगर निगम बीस प्रतिशत बजट देगा। जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 180 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसमें 36 करोड़ रुपये जल निगम को काम शुरू करने के लिए मिल चुके हैं।
गौरतलब है कि नवंबर 2016 इस काम का ठेका एलएंडटी कंपनी को दिया गया था, मगर कंपनी द्वारा रेट ज्यादा डाले जाने के कारण बात नहीं बन सकी और टेंडर को निरस्त कर दिया गया। जल निगम मुख्यालय के आदेश पर दूसरी दफा पहले चरण के काम को पांच भागों में बांट दिया गया। 14 जुलाई को दोबारा टेंडर डाले गए थे। इस बार बांदा, चित्रकूट, आगरा, कानपुर, लखनऊ और मेरठ की नौ कंपनियों ने टेंडर डाले थे। बाद में इस प्रक्रिया को भी लेकर सवाल खड़े होने लगे। इस कारण मुख्य सचिव ने इस प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए है कि पहले चरण के काम के लिए एक ही कंपनी को ठेका दिया जाए। नई प्रक्रिया के लिए टेंडर नोटिस जारी कर दिया गया है। पहले 16 अक्तूबर को टेंडर डलने थे। मगर, अब इस तिथि को बढ़ाकर 27 अक्तूबर कर दिया गया है। हालांकि, नए सिरे से प्रक्रिया शुरू होने से यह योजना छह महीने और पीछे चली गई है।
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टेंडर खुलने के बाद की अब आगे की स्थिति साफ हो गई है। नई टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम छह माह का वक्त तो लग की जाएगा। इसके बाद ही योजना पर काम शुरू हो सकेगा।
एपी यादव, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
अभी सिर्फ पहले चरण को मंजूरी
अभी केवल पहले चरण के काम को मंजूरी मिली है। दूसरे चरण के काम स्टेट लेवल कमेटी ने तो स्वीकृति दे दी है, लेकिन व्यय वित्त समिति ने मंजूरी नहीं है। तीसरे चरण के लिए अभी फाइल ही आगे नहीं बढ़ी है। अगर तीनों चरणों के काम एक साथ शुरू नहीं हुए तो इस योजना को पूरा होने में दस साल लग सकते हैं।
इन क्षेत्रों में जबरदस्त संकट
महानगर मेें सबसे प्रभावित सिलवटगंज, गढ़ियागांव, लहरगिर्द, आईटीआई, सिद्धेश्वर नगर, करगुवांजी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रतापनगर, मयूर विहार कॉलोनी सराय, डड़ियापुरा, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, वीरांगना नगर, पाल कॉलोनी, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट, मुकरयाना, मैला की टौरिया, मसीहागंज, लहरगिर्द, करारी, राजपूत नगर क्षेत्र में पानी का जबरदस्त संकट है।
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वर्ष 2010 में बनी यह योजना 264 करोड़ से बढ़कर 916 करोड़ पर पहुंच गई हैं, जिसका तीन चरणों में काम पूरा होना है। इस योजना के तहत झांसी में पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम किया जाना है। इसके लिए केंद्र सरकार पचास प्रतिशत, प्रदेश सरकार तीस प्रतिशत और नगर निगम बीस प्रतिशत बजट देगा। जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 180 करोड़ का एस्टीमेट तैयार किया है। इसमें 36 करोड़ रुपये जल निगम को काम शुरू करने के लिए मिल चुके हैं।
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गौरतलब है कि नवंबर 2016 इस काम का ठेका एलएंडटी कंपनी को दिया गया था, मगर कंपनी द्वारा रेट ज्यादा डाले जाने के कारण बात नहीं बन सकी और टेंडर को निरस्त कर दिया गया। जल निगम मुख्यालय के आदेश पर दूसरी दफा पहले चरण के काम को पांच भागों में बांट दिया गया। 14 जुलाई को दोबारा टेंडर डाले गए थे। इस बार बांदा, चित्रकूट, आगरा, कानपुर, लखनऊ और मेरठ की नौ कंपनियों ने टेंडर डाले थे। बाद में इस प्रक्रिया को भी लेकर सवाल खड़े होने लगे। इस कारण मुख्य सचिव ने इस प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए है कि पहले चरण के काम के लिए एक ही कंपनी को ठेका दिया जाए। नई प्रक्रिया के लिए टेंडर नोटिस जारी कर दिया गया है। पहले 16 अक्तूबर को टेंडर डलने थे। मगर, अब इस तिथि को बढ़ाकर 27 अक्तूबर कर दिया गया है। हालांकि, नए सिरे से प्रक्रिया शुरू होने से यह योजना छह महीने और पीछे चली गई है।
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टेंडर खुलने के बाद की अब आगे की स्थिति साफ हो गई है। नई टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम छह माह का वक्त तो लग की जाएगा। इसके बाद ही योजना पर काम शुरू हो सकेगा।
एपी यादव, अधिशासी अभियंता, जल निगम।
अभी सिर्फ पहले चरण को मंजूरी
अभी केवल पहले चरण के काम को मंजूरी मिली है। दूसरे चरण के काम स्टेट लेवल कमेटी ने तो स्वीकृति दे दी है, लेकिन व्यय वित्त समिति ने मंजूरी नहीं है। तीसरे चरण के लिए अभी फाइल ही आगे नहीं बढ़ी है। अगर तीनों चरणों के काम एक साथ शुरू नहीं हुए तो इस योजना को पूरा होने में दस साल लग सकते हैं।
इन क्षेत्रों में जबरदस्त संकट
महानगर मेें सबसे प्रभावित सिलवटगंज, गढ़ियागांव, लहरगिर्द, आईटीआई, सिद्धेश्वर नगर, करगुवांजी, पिछोर, गुमनावारा, महाराणा प्रतापनगर, मयूर विहार कॉलोनी सराय, डड़ियापुरा, मद्रासी कॉलोनी, सत्यम कॉलोनी, भगवंतपुरा, कोछाभांवर, सिमरधा, वीरांगना नगर, पाल कॉलोनी, अलीगोल, मेवातीपुरा, बाहर उन्नाव गेट, मुकरयाना, मैला की टौरिया, मसीहागंज, लहरगिर्द, करारी, राजपूत नगर क्षेत्र में पानी का जबरदस्त संकट है।