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जलसंस्थान : विधायक ने लिखी मंडलायुक्त को चिट्ठी
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झांसी। जल संस्थान में चल रही खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। एक और पार्षद ने विधायक को पत्र लिखकर ट्यूबवेल संचालन को लेकर एक फर्म का आदेश दूसरी फर्म को जारी करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, सदर विधायक ने मंडलायुक्त को पत्र लिखकर महाप्रबंधक के वित्तीय अधिकार पर रोक लगाने को कहा है।
नगर निगम के पूर्व उपसभापति राजेश त्रिपाठी के बाद अब एक और पार्षद सुशीला दुबे ने सदर विधायक रवि शर्मा को पत्र लिखकर जलसंस्थान में ठेके पर संचालित ट्यूबवेल को लेकर पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि महाप्रबंधक कार्यालय द्वारा मांगे गए टेंडर में तीन ट्यूबवेल एक श्रमिक के द्वारा संचालित करने की दरें दी गई हैं और श्रमिकों का ईपीएफ, ईएसआई, प्रत्येक ट्यूबवेल पर सीसीटीवी कैमरे स्वीकृत की गईं। जबकि इससे पूर्व एक और ठेकेदार द्वारा 330 रुपये प्रति नलकूप, प्रति श्रमिक और प्रति माह कार्य कर रहा था। महाप्रबंधक की स्वीकृति की प्रत्याशा में एक जनवरी 21 से 18 मार्च 21 तक की अवधि में पूर्व दरों एवं शर्तों पर ठेकेदार के श्रमिक कार्य कर रहे थे।
दूसरी ओर इसी अवधि का कार्यादेश जलसंस्थान ने किसी और को दे दिया। ऐसे में यह आदेश उचित नहीं हैं। उन्होंने जांच कर आदेश जारी करने की मांग की है। पार्षद सुशीला दुबे ने पत्र की एक प्रति अपर आयुक्त राजस्व परिषद नंदकिशोर द्विवेदी को भी भेजी है।
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उधर, सदर विधायक रवि शर्मा ने मंडलायुक्त को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि महाप्रबंधक आगामी तीस जून को सेवानिवृत्त हो रही हैं। संज्ञान में आया है कि चार - पांच करोड़ के प्रस्ताव तैयार कर वित्त प्रबंध से स्वीकृति लेकर फर्जी कर्मचारियों के भुगतान की कार्रवाई की जानी है। शासन की गाइड लाइन है कि सेवानिवृत्ति से दो माह पूर्व समस्त वित्त पावर निरस्त कर दिए जाते हैं। जबकि महाप्रबंधक की सेवानिवृत्ति के लिए एक सप्ताह शेष है। अत: इनके द्वारा भुगतान के लिए वित्त अधिकार पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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नगर निगम के पूर्व उपसभापति राजेश त्रिपाठी के बाद अब एक और पार्षद सुशीला दुबे ने सदर विधायक रवि शर्मा को पत्र लिखकर जलसंस्थान में ठेके पर संचालित ट्यूबवेल को लेकर पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि महाप्रबंधक कार्यालय द्वारा मांगे गए टेंडर में तीन ट्यूबवेल एक श्रमिक के द्वारा संचालित करने की दरें दी गई हैं और श्रमिकों का ईपीएफ, ईएसआई, प्रत्येक ट्यूबवेल पर सीसीटीवी कैमरे स्वीकृत की गईं। जबकि इससे पूर्व एक और ठेकेदार द्वारा 330 रुपये प्रति नलकूप, प्रति श्रमिक और प्रति माह कार्य कर रहा था। महाप्रबंधक की स्वीकृति की प्रत्याशा में एक जनवरी 21 से 18 मार्च 21 तक की अवधि में पूर्व दरों एवं शर्तों पर ठेकेदार के श्रमिक कार्य कर रहे थे।
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दूसरी ओर इसी अवधि का कार्यादेश जलसंस्थान ने किसी और को दे दिया। ऐसे में यह आदेश उचित नहीं हैं। उन्होंने जांच कर आदेश जारी करने की मांग की है। पार्षद सुशीला दुबे ने पत्र की एक प्रति अपर आयुक्त राजस्व परिषद नंदकिशोर द्विवेदी को भी भेजी है।
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उधर, सदर विधायक रवि शर्मा ने मंडलायुक्त को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया कि महाप्रबंधक आगामी तीस जून को सेवानिवृत्त हो रही हैं। संज्ञान में आया है कि चार - पांच करोड़ के प्रस्ताव तैयार कर वित्त प्रबंध से स्वीकृति लेकर फर्जी कर्मचारियों के भुगतान की कार्रवाई की जानी है। शासन की गाइड लाइन है कि सेवानिवृत्ति से दो माह पूर्व समस्त वित्त पावर निरस्त कर दिए जाते हैं। जबकि महाप्रबंधक की सेवानिवृत्ति के लिए एक सप्ताह शेष है। अत: इनके द्वारा भुगतान के लिए वित्त अधिकार पर तत्काल रोक लगाई जाए।