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वैक्सीन तो आ गई, जिंदगी पटरी पर नहीं आई

Wed, 20 Jan 2021 01:20 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jan 2021 01:20 AM IST
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Vacseen come than life is not safe
झांसी। कोरोना वायरस के खात्मे के लिए वैक्सीन तो आ गई मगर बेपटरी हुई कइयों की जिंदगी फिर से पटरी पर नहीं लौट पाई है। लॉकडाउन के कारण हुई आर्थिक समस्याओं से अभी भी कई लोग दो-चार हो रहे हैं। इस कारण पारिवारिक तनाव, अवसाद, गृह कलह, नशे का आदी होना, घरेलू हिंसाओं के मामलों में भी इजाफा हुआ है। यही नहीं, आत्महत्या के प्रयास के मामलों भी बढ़ गए हैं। लगातार इस तरह के मामले मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। बीमारी गंभीर स्थिति में पहुंचने पर उन्हें कई-कई दिन इलाज के लिए भर्ती तक करना पड़ रहा है।
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कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में लॉकडाउन की घोषणा की गई। लगभग तीन महीने तक चले लॉकडाउन के कारण लोगों के कामधंधे चौपट हो गए। कइयों को नौकरी से हाथ तक धोना पड़ गया। रोजनदारी पर काम करने वालों, फेरी लगाने वालों, मध्यम और निम्न वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले कई लोगों की जिंदगी बेपटरी हो गई। अब कोरोना वैक्सीन आने के बाद जरूर जनजीवन पहले की तरह हो रहा है।
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मगर कोरोना काल में जिनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई, वो अब तक सुधर नहीं पाई है। इन विपरीत परिस्थितियों में लोग बीमार पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन ने बताया कि कोरोना काल में डिप्रेशन और एंजाइटी के मरीजों में 40 से 50 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। इसके अलावा आत्महत्या के प्रयास में 15 फीसदी, नशा में 30 प्रतिशत और घरेलू हिंसा के मामले भी 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
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केस-1
गर्भवती हुई तो बन गई डिप्रेशन का शिकार
जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक के पास एक गर्भवती महिला इलाज कराने पहुंची। उसने बताया कि दो बेटियां पहले से ही हैं। उसका पति फेरी लगाता है। कोविड काल में परिवार की स्थिति बहुत खराब हो गई। अब तीसरा बच्चा होने के बाद लालन-पोषण को लेकर चिंता सताती रहती है। वह दिन भर बच्चों के बारे में सोचती रहती है। इसी वजह से वह डिप्रेशन का शिकार हो गई। इलाज के बाद अब उसकी स्थिति सुधर रही है।
केस-2
डॉक्टर के पास पहुंचते ही रोने लगा व्यवसायी
कोरोना काल में शहर के एक बड़े व्यवसायी को भी काफी नुकसान हो गया। उन्हें अपने यहां के कई कर्मचारियों को भी निकालना पड़ गया। मन में यह सोच घर कर गई कि अब वह कभी पहले की तरह व्यवसाय खड़ा नहीं कर पाएंगे। परिजन उन्हें मनोचिकित्सक के पास अवसाद का इलाज कराने के लिए लेकर पहुंचे तो वह फूट-फूटकर रोने लगे। उन्हें इलाज के लिए भर्ती तक करना पड़ा। तीन दिन बाद स्थिति सुधरी तो घर भेजा। अभी भी इलाज जारी है।

केस-3
रियल स्टेट का धंधा हुआ चौपट तो नशे में डूबे
महानगर का एक रियल स्टेट कारोबारी धंधा चौपट होने के कारण नशे का आदी हो गया। कोरोना काल के पहले कारोबारी ने जमीन में बड़ा निवेश किया। प्लांटिंग करके वह जमीन बेचाना चाहते थे, मगर तभी लॉकडाउन हो गया। पैसा फंस गया तो वह चिंता करते-करते नशे के लती हो गए। पहले कभी नशा नहीं करते थे, एकदम से इसके आदी होने पर परिजन मनोचिकित्सक के पास लेकर पहुंचे। अभी उनका इलाज चल रहा है।
ये हैं आंकड़े
.................
बीमारी बढ़े मामले
अवसाद, एंजाइटी 45 फीसदी
आत्महत्या का प्रयास 15 प्रतिशत
नशा की लत 30 फीसदी
घरेलू हिंसा 50 फीसदी
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