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हॉर्न से ज्यादा बजती हैं बसें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:34 AM IST
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roadways, jhansi news
- फोटो : demo
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जिले के तमाम रूट पर दौड़ने वाली रोडवेज की बसों के हॉर्न से भले ही न बजे, उसका ढांचा लगातार बजता रहता है। कई बसों के गियर लीवर गायब हैं, शीशे जाम तो फर्श में छेद है। ऐसे में बुंदेलखंड के लोगों को खटारा बसों में खतरे भरा सफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
कानपुर और गरौठा रूट पर दौड़ रहीं रोडवेज की बसें बेहद पुरानी हो गई हैं। इनमें से कई बसों में हार्न, कोहरा से बचाव के लिए फाग लाइट नहीं है। सीटें पहले की तहर फटी है। इनकी धुलाई भी नहीं होती है। इन बसों की सर्विस कब हुई, चालक - परिचालक को पता नहीं होता है। सफाई और धुलाई भी मात्र औपचारिक है। कुछ चालक - परिचालकों के मुताबिक जो बस उन्हें मिलती है। उसमें कई बार अपने रुपयों से काम कराना पड़ता है। वहीं यात्रियों के मुताबिक किराया उनसे पूरा वसूला जाता है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर है।
हाइवे से होकर निकल जाती हैं
रोडवेज की बसें हाइवे से होकर निकल जाती है। जबकि इनका चिरगांव में स्टापेज है। बसों के न रुकने से बुजुर्ग और विकलांग यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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अक्षय निवासी चिरगांव
सीनियर सिटीजन का लाभ नहीं
सीनियर सिटीजन का प्रमाण कई बार दिखाते है, लेकिन उसके बावजूद भी हम बुजुर्ग यात्रियों से किराया पूरा वसूला जाता है। रोडवेज को इसकी शिकायत भी की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
गोविंद दास निवासी जालौन
तमाम समस्याएं हैं
रोडवेज की कई बसें पुरानी है। लकड़ी का फर्श टूटा पड़ा है। सीटों पर धूल भरी हैं। शीशे जाम है। सफाई भी शायद नहीं होती है। इन बसों में यात्रा करना परेशानी भरा है।
गुलाब निवासी दतिया
तीन घंटे की जगह लगते है चार घंटे
उरई तीन घंटे का रास्ता है। लेकिन चार से पांच घंटे लग जाते है। ऐसी कई जगह है, जहां बसों को रोका जाता है। जहां स्टापेज नहीं है। इसके अलावा बसों के चलने पर शीशों की आवाज भी आती है।
ओम प्रकाश निवासी उरई
बाक्स
फटी सीट ठीक होंगी
एक-दो बसों में सीट फटी हो सकती है, जिसे ठीक करा दिया जाएगा, जिस बस के फर्श में छेद है, उसे भी चलाने से रोका जाएगा। इसके अलावा अगर किसी भी यात्री को कोई समस्या है, तो वह बसों में लिखे अधिकारियों के नंबर पर संपर्क करें। अमरनाथ मेहता, सेवा प्रबंधक रोडवेज।
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कानपुर और गरौठा रूट पर दौड़ रहीं रोडवेज की बसें बेहद पुरानी हो गई हैं। इनमें से कई बसों में हार्न, कोहरा से बचाव के लिए फाग लाइट नहीं है। सीटें पहले की तहर फटी है। इनकी धुलाई भी नहीं होती है। इन बसों की सर्विस कब हुई, चालक - परिचालक को पता नहीं होता है। सफाई और धुलाई भी मात्र औपचारिक है। कुछ चालक - परिचालकों के मुताबिक जो बस उन्हें मिलती है। उसमें कई बार अपने रुपयों से काम कराना पड़ता है। वहीं यात्रियों के मुताबिक किराया उनसे पूरा वसूला जाता है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर है।
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हाइवे से होकर निकल जाती हैं
रोडवेज की बसें हाइवे से होकर निकल जाती है। जबकि इनका चिरगांव में स्टापेज है। बसों के न रुकने से बुजुर्ग और विकलांग यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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अक्षय निवासी चिरगांव
सीनियर सिटीजन का लाभ नहीं
सीनियर सिटीजन का प्रमाण कई बार दिखाते है, लेकिन उसके बावजूद भी हम बुजुर्ग यात्रियों से किराया पूरा वसूला जाता है। रोडवेज को इसकी शिकायत भी की, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
गोविंद दास निवासी जालौन
तमाम समस्याएं हैं
रोडवेज की कई बसें पुरानी है। लकड़ी का फर्श टूटा पड़ा है। सीटों पर धूल भरी हैं। शीशे जाम है। सफाई भी शायद नहीं होती है। इन बसों में यात्रा करना परेशानी भरा है।
गुलाब निवासी दतिया
तीन घंटे की जगह लगते है चार घंटे
उरई तीन घंटे का रास्ता है। लेकिन चार से पांच घंटे लग जाते है। ऐसी कई जगह है, जहां बसों को रोका जाता है। जहां स्टापेज नहीं है। इसके अलावा बसों के चलने पर शीशों की आवाज भी आती है।
ओम प्रकाश निवासी उरई
बाक्स
फटी सीट ठीक होंगी
एक-दो बसों में सीट फटी हो सकती है, जिसे ठीक करा दिया जाएगा, जिस बस के फर्श में छेद है, उसे भी चलाने से रोका जाएगा। इसके अलावा अगर किसी भी यात्री को कोई समस्या है, तो वह बसों में लिखे अधिकारियों के नंबर पर संपर्क करें। अमरनाथ मेहता, सेवा प्रबंधक रोडवेज।