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घायल गाय की 12 साल से सेवा कर रहा परिहार परिवार, दे रहा दादी मां जैसा दुलार

Mon, 06 Jun 2022 01:00 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 01:00 AM IST
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umeed ki masal, pariwar kar raha sewa
झांसी। इस जमाने में जहां कई बच्चे अपने बूढ़े मां-बाप को घर से बेघर कर दो रोटी के लिए तरसा रहे हैं, वहीं झांसी शहर में एक परिवार ऐसा भी है जिसमें तकरीबन 12 साल पहले सड़क पर घायल पड़ी एक गाय को घर के सदस्य की तरह प्यार दुलार मिल रहा है। ये गाय यूं तो चलने-फिरने और उठने में लाचार है, लेकिन इस घर के बड़े और बच्चे उसे पलंग पर लिटाकर बिल्कुल अपनी दादी मां की तरह सेवा कर रहे हैं। घरवालों ने इस गाय का नाम लक्ष्मी रखा है।
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शहर के नारायण बाग स्थित शिवाजी नगर की नंदू कॉलोनी में एक परिहार परिवार रहता है। इस परिवार में रामस्वरूप सिंह परिहार और उनकी पत्नी सज्जन देवी के अलावा दो बेटे निखलेश और नीतेश हैं। बड़े बेटे निखलेश की पत्नी आरती सिंह और बच्चे आध्या, रान्या और अथर्व हैं। छोटे बेटे नीतेश की पत्नी रश्मी है। नीतेश बताते हैं कि वर्ष 2011 में वह लोग झांसी होटल के पास रहते थे। वहां आसपास अक्सर सड़क पर आवारा जानवर बैठे रहते थे। एक दिन सुबह वह साइकिल से स्कूल जा रहे थे। तभी एक प्राइवेट कॉलेज की बस सड़क पर बैठी एक बछिया (गाय का बच्चा) को कुचल कर चली गई। हादसा देख बाकी लोगों की तरह वह भी वहां से निकल गए। जब वह दोपहर में स्कूल से लौटे तो देखा कि बछिया अभी भी उसी जगह पड़ी तड़प रही थी। उसके शरीर में कई जगह से खून बह रहा था। वह उठ भी नहीं पा रही थी।
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नीतेश बताते हैं कि तब वह भी बच्चे थे सो उसकी हालत देख उन्हें रोना आ गया। वह साइकिल भगाकर सीधे घर पहुंचे और पापा व भाई को बछिया के बारे में बताया। वह लोग भी दौड़े और लोडर से बछिया को उठाकर जानवरों के डॉक्टर के पास ले गए और उसका इलाज कराया। कुछ दिन के लिए घर ले गए। धीरे-धीरे उसके जख्म ठीक हो गए। लेकिन वह उठकर खड़ी नहीं हो पा रही थी। आसपास के लोगों ने कहा कि उसे किसी गोशाला में छोड़ दो, इस पर कई गोशालाएं देखीं लेकिन पापा और भाई वहां जानवरों की हालत देख वापस लौट आए।
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नीतेश बताते हैं कि बड़ी हो रही बछिया करवट तक नहीं ले पा रही थी, उसकी हालत देख मम्मी-पापा ने उसे घर में रखने का फैसला किया। उन्होंने अपना किराए का घर बदला तो उसे भी लोडर से साथ ले गए। इसके बाद गाय को ठीक करने के लिए कई बार जानवरों के अस्पताल ले-लेकर गए। डॉक्टर, वैद्य, हकीम सब बुलाए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। गांव के एक वैद्य ने बताया कि गाय का कमर का हिस्सा काम नहीं कर रहा है। गाय हादसे के दिन से ही उनके परिवार के साथ रह रही है। अब बच्चों तक को उससे इतना लगाव हो गया है कि कोई झूठ ही उसे गोशाला भेजने को कह दे तो वह रोने लगते हैं।
अलग कमरे में पलंग पर लिटाते हैं, कूलर और सुरक्षा के लिए कैमरे की है व्यवस्था
झांसी। रामस्वरूप परिहार और सज्जन देवी बताते हैं कि घर के परिसर में ही गाय के लिए एक कमरा बना है। गाय चूंकि चल-फिर नहीं पाती। इसलिए करवट से लेटी रहती है। उसे दर्द न हो इसलिए पलंग पर अलग बिस्तर डाल कर उसे लिटाया जाता है। हर रोज बच्चे मिलकर गाय को दूसरी साइड करवट देकर लिटाते हैं। कमरे में गर्मी में कूलर और सर्दी में आग की व्यवस्था की जाती है। कमरे में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है। घर के लोग दिन-रात सीसीटीवी पर नजर रखते हैं। गर्मी में उसे कमरे में पानी डालकर नहलाते हैं और सर्दियों में कई लोग मिलकर बाहर निकालकर नहलाते हैं ताकि शरीर में धूप लग जाए।

सभी लोग मिलकर करते हैं देखभाल
झांसी। नीतेश ने बताया कि गाय खाने में चोकर, भूसा और हरी सब्जियां खाती है। बताया कि वह दोनों भाई एक प्राइवेट संस्था में अकाउंटेंट हैं। पापा भी पहले एक कंपनी में प्राइवेट नौकरी करते थे। अब उन्होंने नौकरी छोड़ दी है। घर में सभी मिलकर गाय की सेवा करते हैं।
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