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किसान आंदोलन: पुतला दहन के दौरान झुलसे दो सपा कार्यकर्ता, कृषि कानून के विरोध में कर रहे थे प्रदर्शन

Mon, 07 Dec 2020 10:21 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर
अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 07 Dec 2020 10:21 PM IST
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Two Samajwadi Party workers burnt during effigy burning in Jhansi
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
समाजवादी पार्टी द्वारा कृषि कानून के विरोध में किए गए धरना- प्रदर्शन और पुतला दहन के दौरान पार्टी के दो कार्यकर्ता झुलस गए। पार्टी जिलाध्यक्ष ने कहा कि महिला नेता को मामूली आंच लगी है। झुलसने जैसी कोई घटना नहीं हुई। वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं, जबकि दूसरे कार्यकर्ता का जूता जला है।
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सोमवार को घंटाघर पर प्रदर्शन के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर किसानों को समर्थन दिया है। कार्यकर्ताओं ने धरना- प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। 
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इसी दौरान कुछ कार्यकर्ता टैक्सी से केंद्र सरकार का पुतला लाए और जल्दबाजी में पुतले में आग लगा दी। लेकिन, पुतले से निकली आग की लपटों की चपेट में दो कार्यकर्ता आ गए। पूर्व में रहे पार्टी पदाधिकारी महेंद्र यादव और गीता मिश्रा झुलस गए। इनमें महेंद्र यादव का जूता जल गया, जबकि महिला नेत्री गीता
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मिश्रा को हल्की आंच लग गईं। 

पार्टी जिलाध्यक्ष तिलक यादव ने बताया कि पुतले से निकली आग की लपटों के पास खड़ी होने के कारण गीता मिश्रा झुलसी नहीं थीं, बल्कि आग की आंच लग गई थी, जबकि महेंद्र यादव का जूता जल गया था। दोनों कार्यकर्ता पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

कृषि कानून के विरोध में सपाइयों ने शासन का पुतला फूंका

आपको बता दें कि सोमवार को घंटाघर पर समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानून को लेकर चल रहे किसानों के धरना प्रदर्शन का समर्थन किया। इस दौरान सपाइयों ने प्रदर्शन और नारेबाजी कर शासन का पुतला दहन किया। साथ ही व्यापारियों से भारत बंद समर्थन की अपील की। 

इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कृषि कानून को वापस लेने की मांग को लेकर राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा। राज्यपाल के माध्यम से सपाइयों ने केंद्र सरकार से मांग उठाई कि हाल ही में लागू किए गए किसान विरोधी तीनों कृषि बिलों को तत्काल वापस लिया जाए, अन्यथा की स्थिति में समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरने एवं आंदोलन करने को बाध्य होगी।
 
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