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बारिश से उफनाए नदी-नाले, दो की मौत
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झांसी। भारी बारिश ने बुंदेलखंड में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कुदरत की यह तल्खी अब जानलेवा साबित होने लगी है। बुधवार को बेतवा नदी में डूबकर एक युवक की मौत हो गई, जबकि नदी में बहे एक वृद्ध का दो दिन बाद भी पता नहीं चल पाया है। इसके अलावा चार लोग बेतवा नदी के उफान के बीच टापू पर फंसकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। पानी ने गांव-गांव में कोहराम मचा रखा है, जिसके मद्देनजर प्रशासन की ओर अलर्ट जारी किया किया गया है।
चिरगांव के खड़ेसर गांव निवासी हरी (40), भूरे (17), अशोक (21) तथा मनीराम (40) छह दिन पहले मछलियों का शिकार करने के लिए बेतवा नदी के टापू पर गए हुए थे। इसी बीच बेतवा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इन लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बुधवार को अचानक बेतवा में उफान आ गया। नदी का जल खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया रफ्तार भी बेहद तेज हो गई। इससे चारों घबरा गए। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। लेकिन, देर रात तक उन्हें टापू से निकाला नहीं जा सका।
वहीं, पूंछ में एक वृद्ध नाले में डूब गया। अब तक उसका पता नहीं चल पाया है। ग्राम परैछा निवासी नेकसाई पाल (72) मंगलवार को भैंस चराने गए हुए थे। शाम को वह भैंसों के साथ पड़रा नाले से होते हुए वापस लौट रहे थे। बेतवा नदी के पानी का वेग अधिक होने की वजह से नाला उफान पर था। उसमें 18 से 20 फीट तक पानी चल रहा था। वे भैंस की पूंछ पकड़कर नाला पार करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन, तेज बहाव की वजह से बीच नाले में उनके हाथ से भैंस की पूंछ छूट गई, जिससे वे बह गए। जबकि, भैंसें नाला पार कर गांव में वापस आ गईं। पानी में उनकी तलाश दो दिनों से लगातार जारी है। एनडीआरएफ की टीम भी इस काम में जुटी हुई हैं। लेकिन, बुधवार की देर रात तक उनका पता नहीं चल सका।
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उधर, ललितपुर के तालबेहट में बेतवा नदी में डूबने से एक युवक की मौत हो गई। ग्राम बनगुवांकला निवासी प्रमोद (35) बुधवार की सुबह आठ बजे घर से निकले थे। वे थानागांव और माताटीला के बीच बेतवा नदी पर बनी पुलिया को पार कर रहे थे। इसी बीच अचानक उनकी साइकिल फिसल गई वे नदी के तेज बहाव में बह गए। ग्रामीणों के खोजबीन करने पर काफी दूर उनका शव नदी में उतराता हुआ मिला।
सावधान: हल्के में न लें पानी के बहाव को
झांसी। पानी ने गांव-गांव में तबाही मचा रखी है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर रखा है। बावजूद, नदी के उफान के बीच टापू पर फंसने व नदी-नालों में बहने की एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रहीं हैं। जबकि, यह समय बेहद सावधानी बरतने का है। नदी में पानी न होने के बाद भी उसमें उतरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, पीछे आने वाले पानी के तेज बहाव का एकदम नजदीक आने पर ही पता चल पाता है। तब तक संभलने तक का समय नहीं बचता था। जिन्हें तैरना आता है, उनके लिए भी यह वक्त पानी से दूरी बनाए रखने का है। इतना ही नहीं, शहरी इलाकों में भी जल भराव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार पानी भरा होने की वजह से छोेटे-छोटे गड्ढे भी गहरे हो जाते हैं, जो जल भराव में नजर नहीं आते। ऐसे में जानलेवा साबित हो सकते हैं।
मंडल में यह हैं हालात
- झांसी: बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से पीछे चल रहा है। लेकिन, नदियां उफान पर हैं। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश का पानी बेतवा में छोड़ा जा रहा है, जिससे ये नदी अपने पूरे वेग से चल रही है। नदी का पानी इसके आसपास के गांवों तक पहुंच गया है।
- ललितपुर: झांसी के मुकाबले ललितपुर में कहीं अच्छी बारिश हो चुकी है। यहां बने बांध लबालब भरे हुए हैं। बेतवा का भी जल स्तर बढ़ा हुआ है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के बेतवा से जुड़े सभी नाले भी नदियों से होड़ करते नजर आ रहे हैं। नदी के किनारे के कई इलाके जलमग्न हैं।
- जालौन: ललितपुर और उसके बाद झांसी में रफ्तार पकड़ने के बाद बेतवा अपने पूरे वेग के साथ जालौन पहुंच रही है। बेतवा से सटे गांवों में खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी का पानी खेतों में भर जाने की वजह से कई गांवों में खरीफ की फसल के चौपट होने की भी आशंका जताई जा रही है।
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चिरगांव के खड़ेसर गांव निवासी हरी (40), भूरे (17), अशोक (21) तथा मनीराम (40) छह दिन पहले मछलियों का शिकार करने के लिए बेतवा नदी के टापू पर गए हुए थे। इसी बीच बेतवा का जल स्तर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इन लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। बुधवार को अचानक बेतवा में उफान आ गया। नदी का जल खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया रफ्तार भी बेहद तेज हो गई। इससे चारों घबरा गए। परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस और प्रशासन को दी। लेकिन, देर रात तक उन्हें टापू से निकाला नहीं जा सका।
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वहीं, पूंछ में एक वृद्ध नाले में डूब गया। अब तक उसका पता नहीं चल पाया है। ग्राम परैछा निवासी नेकसाई पाल (72) मंगलवार को भैंस चराने गए हुए थे। शाम को वह भैंसों के साथ पड़रा नाले से होते हुए वापस लौट रहे थे। बेतवा नदी के पानी का वेग अधिक होने की वजह से नाला उफान पर था। उसमें 18 से 20 फीट तक पानी चल रहा था। वे भैंस की पूंछ पकड़कर नाला पार करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन, तेज बहाव की वजह से बीच नाले में उनके हाथ से भैंस की पूंछ छूट गई, जिससे वे बह गए। जबकि, भैंसें नाला पार कर गांव में वापस आ गईं। पानी में उनकी तलाश दो दिनों से लगातार जारी है। एनडीआरएफ की टीम भी इस काम में जुटी हुई हैं। लेकिन, बुधवार की देर रात तक उनका पता नहीं चल सका।
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उधर, ललितपुर के तालबेहट में बेतवा नदी में डूबने से एक युवक की मौत हो गई। ग्राम बनगुवांकला निवासी प्रमोद (35) बुधवार की सुबह आठ बजे घर से निकले थे। वे थानागांव और माताटीला के बीच बेतवा नदी पर बनी पुलिया को पार कर रहे थे। इसी बीच अचानक उनकी साइकिल फिसल गई वे नदी के तेज बहाव में बह गए। ग्रामीणों के खोजबीन करने पर काफी दूर उनका शव नदी में उतराता हुआ मिला।
सावधान: हल्के में न लें पानी के बहाव को
झांसी। पानी ने गांव-गांव में तबाही मचा रखी है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर रखा है। बावजूद, नदी के उफान के बीच टापू पर फंसने व नदी-नालों में बहने की एक के बाद एक घटनाएं सामने आ रहीं हैं। जबकि, यह समय बेहद सावधानी बरतने का है। नदी में पानी न होने के बाद भी उसमें उतरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि, पीछे आने वाले पानी के तेज बहाव का एकदम नजदीक आने पर ही पता चल पाता है। तब तक संभलने तक का समय नहीं बचता था। जिन्हें तैरना आता है, उनके लिए भी यह वक्त पानी से दूरी बनाए रखने का है। इतना ही नहीं, शहरी इलाकों में भी जल भराव के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। लगातार पानी भरा होने की वजह से छोेटे-छोटे गड्ढे भी गहरे हो जाते हैं, जो जल भराव में नजर नहीं आते। ऐसे में जानलेवा साबित हो सकते हैं।
मंडल में यह हैं हालात
- झांसी: बारिश का आंकड़ा भले ही सामान्य से पीछे चल रहा है। लेकिन, नदियां उफान पर हैं। मध्य प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश का पानी बेतवा में छोड़ा जा रहा है, जिससे ये नदी अपने पूरे वेग से चल रही है। नदी का पानी इसके आसपास के गांवों तक पहुंच गया है।
- ललितपुर: झांसी के मुकाबले ललितपुर में कहीं अच्छी बारिश हो चुकी है। यहां बने बांध लबालब भरे हुए हैं। बेतवा का भी जल स्तर बढ़ा हुआ है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के बेतवा से जुड़े सभी नाले भी नदियों से होड़ करते नजर आ रहे हैं। नदी के किनारे के कई इलाके जलमग्न हैं।
- जालौन: ललितपुर और उसके बाद झांसी में रफ्तार पकड़ने के बाद बेतवा अपने पूरे वेग के साथ जालौन पहुंच रही है। बेतवा से सटे गांवों में खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी का पानी खेतों में भर जाने की वजह से कई गांवों में खरीफ की फसल के चौपट होने की भी आशंका जताई जा रही है।