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दो नई रेल लाइनों को नहीं मिला फंड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Feb 2017 12:25 AM IST
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दो नई रेल लाइनों को नहीं मिला फंड
- फोटो : demo
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बुंदेलखंड में रेल का जाल बिछाने के लिए पिछले रेल बजट में उरई- राठ- महोबा के बीच और कोंच- लहार- भिंड के बीच नई रेल लाइन डालने की घोषणा की गई थी, लेकिन इनके लिए न तो पिछले और न ही इस बजट कोई फंड दिया गया है।
2016 के रेल बजट में उरई-महोबा व भिंड-लहार-कोंच नई रेल लाइन बिछाने की घोषणा की गई थी। उरई-महोबा के मध्य 90 किलोमीटर दूरी की इस नई लाइन के लिए 1800 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया, जबकि भिंड-लहार-कोंच के मध्य अस्सी किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए 1600 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। मोदी सरकार की नई नीति के तहत उक्त रेल लाइनों के लिए जिस बजट की स्वीकृति दी गई है, उसमें भी 51 फीसदी राशि संबंधित प्रदेश सरकार को देना है। बाकी 49 फीसदी बजट रेलवे को देना है। लेकिन इस बार के बजट में कोई भी फंड उक्त रेल लाइनों के लिए नहीं दी गई है। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि फंड मिलने पर ही इन योजनाओं को गति मिल सकेगी।
वर्षों से इंतजार
आजादी के बाद से अब तक उरई-महोबा के मध्य पड़ने वाले क्षेत्रों के लाखों लोग रेल सेवा से वंचित हैं। यह क्षेत्र बुंदेलखंड के अति पिछड़े इलाकों में आता है। यहां के लोगों को सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। यहां अच्छी सड़कें भी नहीं हैं। रात में यह रास्ता यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है। इस नई रेल लाइन के बनने से उरई से महोबा के मध्य पड़ने वाले सभी क्षेत्रों के लोग सीधा झांसी व कानपुर मुख्य ट्रैक से जुड़ सकेंगे।
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2016 के रेल बजट में उरई-महोबा व भिंड-लहार-कोंच नई रेल लाइन बिछाने की घोषणा की गई थी। उरई-महोबा के मध्य 90 किलोमीटर दूरी की इस नई लाइन के लिए 1800 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया, जबकि भिंड-लहार-कोंच के मध्य अस्सी किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए 1600 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। मोदी सरकार की नई नीति के तहत उक्त रेल लाइनों के लिए जिस बजट की स्वीकृति दी गई है, उसमें भी 51 फीसदी राशि संबंधित प्रदेश सरकार को देना है। बाकी 49 फीसदी बजट रेलवे को देना है। लेकिन इस बार के बजट में कोई भी फंड उक्त रेल लाइनों के लिए नहीं दी गई है। पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि फंड मिलने पर ही इन योजनाओं को गति मिल सकेगी।
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वर्षों से इंतजार
आजादी के बाद से अब तक उरई-महोबा के मध्य पड़ने वाले क्षेत्रों के लाखों लोग रेल सेवा से वंचित हैं। यह क्षेत्र बुंदेलखंड के अति पिछड़े इलाकों में आता है। यहां के लोगों को सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। यहां अच्छी सड़कें भी नहीं हैं। रात में यह रास्ता यात्रियों के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता है। इस नई रेल लाइन के बनने से उरई से महोबा के मध्य पड़ने वाले सभी क्षेत्रों के लोग सीधा झांसी व कानपुर मुख्य ट्रैक से जुड़ सकेंगे।
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