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दो कंपनियों में लड़ाई की भेंट चढ़ी स्मार्ट रोड
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झांसी। स्मार्ट रोड बनाने को लेकर दो कंपनियों की लड़ाई शहरवासियों को भारी पड़ गई। काम शुरू होने में ही अत्याधिक विलंब होने से यह प्रोजेक्ट लटक गया। अब शहर में कोई भी सड़क स्मार्ट रोड में तब्दील नहीं की जाएगी।
स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलमेंट) इलाके में 102 करोड़ रुपये खर्च करके रेलवे स्टेशन से चित्रा चौराहा, चित्रा चौराहा से बीकेडी चौराहा, चित्रा चौराहा से एमबी चौक, रेलवे स्टेशन से दंडी मार्च चौराहा, दंडी मार्च चौराहा से करमा बाई प्रतिमा, करमा बाई प्रतिमा से एमबी तिराहा, एमबी तिराहा से इलाहट चौराहा, इलाइट चौराहा से जीवनशाह तिराहा, जीवनशाह तिराहा से झलकारी बाई प्रतिमा, झलकारी बाई प्रतिमा से मिनर्वा चौराहा, झलकारी बाई चौराहे से खंडेराव गेट, जीवना शाह तिराहे से बीकेडी चौराहा एवं बीकेडी से खंडेराव गेट के बीच स्मार्ट रोड बनाई जानी थी। इसमें सड़क चौड़ीकरण के साथ ही फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, सेंट्रल लाइटिंग, अंडरग्राउंड केबलिंग आदि कार्य कराए जाने थे। वर्ष 2019 की शुरूआत में ही करोड़ों रुपए खर्च करके डीपीआर तैयार कराया गया लेकिन, टेंडर कराने में निगम अफसरों के पसीने छूट गए। कई कोशिशों के बाद किसी तरह वर्ष 2020 में मुंबई की लैंडमार्क कंपनी को काम मिला। कंपनी काम शुरू कर पाती, उसके पहले ही निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए दूसरी कंपनी कोर्ट पहुंच गई। दोनों कंपनियां कोर्ट में उलझ गईं। उधर, काम शुरू न होने से प्रोजेक्ट की लागत एवं समय का बढ़ना तय हो गया। समय बढ़ने से प्रोजेक्ट का अंदरखाने राजनीतिक विरोध होने लगा। इन सभी वजहों से आखिरकार प्रोजेक्ट ड्रॉप कर दिया गया। वहीं, प्रभारी अधिकारी का कहना है इस संबंध में बोर्ड ने सर्वसम्मति से फैसला लिया। इतनी लागत के अब दूसरे काम कराए जाएंगे।
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स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलमेंट) इलाके में 102 करोड़ रुपये खर्च करके रेलवे स्टेशन से चित्रा चौराहा, चित्रा चौराहा से बीकेडी चौराहा, चित्रा चौराहा से एमबी चौक, रेलवे स्टेशन से दंडी मार्च चौराहा, दंडी मार्च चौराहा से करमा बाई प्रतिमा, करमा बाई प्रतिमा से एमबी तिराहा, एमबी तिराहा से इलाहट चौराहा, इलाइट चौराहा से जीवनशाह तिराहा, जीवनशाह तिराहा से झलकारी बाई प्रतिमा, झलकारी बाई प्रतिमा से मिनर्वा चौराहा, झलकारी बाई चौराहे से खंडेराव गेट, जीवना शाह तिराहे से बीकेडी चौराहा एवं बीकेडी से खंडेराव गेट के बीच स्मार्ट रोड बनाई जानी थी। इसमें सड़क चौड़ीकरण के साथ ही फुटपाथ, साइकिल ट्रैक, सेंट्रल लाइटिंग, अंडरग्राउंड केबलिंग आदि कार्य कराए जाने थे। वर्ष 2019 की शुरूआत में ही करोड़ों रुपए खर्च करके डीपीआर तैयार कराया गया लेकिन, टेंडर कराने में निगम अफसरों के पसीने छूट गए। कई कोशिशों के बाद किसी तरह वर्ष 2020 में मुंबई की लैंडमार्क कंपनी को काम मिला। कंपनी काम शुरू कर पाती, उसके पहले ही निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए दूसरी कंपनी कोर्ट पहुंच गई। दोनों कंपनियां कोर्ट में उलझ गईं। उधर, काम शुरू न होने से प्रोजेक्ट की लागत एवं समय का बढ़ना तय हो गया। समय बढ़ने से प्रोजेक्ट का अंदरखाने राजनीतिक विरोध होने लगा। इन सभी वजहों से आखिरकार प्रोजेक्ट ड्रॉप कर दिया गया। वहीं, प्रभारी अधिकारी का कहना है इस संबंध में बोर्ड ने सर्वसम्मति से फैसला लिया। इतनी लागत के अब दूसरे काम कराए जाएंगे।
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