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चिरगांव रियासत की सेना ने मार डाले थे बारह अंग्रेज सैनिक

Fri, 13 Aug 2021 01:36 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 01:36 AM IST
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Twelve British soldiers were killed by the army of the princely state of Chirgaon
झांसी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद बुंदेलखंड की कुछ रियासतों के राजाओं ने अंग्रेजों की अधीनता को स्वीकार कर लिया था तो कुछ राष्ट्रभक्त रजबाड़े अभी भी स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई की अलख जगाकर अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। झांसी के अलावा एक और रियासत थी चिरगांव, इस रियासत के राजा राव बखत सिंह अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ झंडा बुलंद किए हुए थे। बात अठारहवीं सदी की है अंग्रेजों की एक सैनिक टुकड़ी ने चिरगांव में कैंप लगा दिया तथा उत्पात करते हुए मांसाहार के लिए रियासत के बगीचे में पाली गई कई मोरों को मार डाला तो राजा ने अपने सैनिकों को हमले का आदेश दे दिया, फिर क्या था चिरगांव रियासत के सैनिकों ने फिरंगी टुकड़ी के बारह सैनिकों को मौके पर ही ढेर कर दिया। बाद में अंग्रेजी सेना ने किले पर हमला कर दिया । इसमें कई सैनिकों के अलावा राव बखत सिंह तथा उनके पुत्र भी शहीद हो गए थे तथा चिरगांव रियासत का कंपनी सरकार में विलय कर लिया गया था।
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चिरगांव निवासी इतिहासकार रामप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि बात अप्रैल 1841 की है चिरगांव में स्थित राजा के बाग के पास ही अंग्रेजों की एक टुकड़ी ने आकर डेरा डाल लिया। इसकी सूचना बाग के चौकीदार ने राजा को दी, उन्होंने अपनी फौज को सतर्क कर दिया। शाम का समय था खाना खाने के बाद अंग्रेजों के कैंप में फिरंगी सैनिक शराब पीकर मदमस्त हो चुके थे, इसी दौरान बाग में पली हुई मोरों की आवाजें उन्हें सुनाई दीं, उन्हीं में कुछ सैनिक अचानक बगीचे में पहुंच गए तथा मोरों का शिकार करने लगे, वहां मौजूद चौकीदार ने मना किया तो उन्होंने उसकी मारपीट शुरू कर दी, इसकी सूचना जैसे ही रियासत के राजा बखत सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने अपनी सेना के जवान भेज दिए तथा दोनों ओर से हुए युद्ध में अंग्रेजी सेना के बारह जवान मौके पर ही मार दिए गए। अंग्रेज अफसर बर्गर ने झांसी तथा कालपी से सेना बुलाकर चिरगांव किले पर हमला कर दिया। 18 से 21 अप्रैल तक दोनों ओर से जमकर युद्ध हुआ अंग्रेजी सेना ने चिरगांव के किले के कई हिस्सों को गोलाबारी करके ध्वस्त कर दिया। रावबखत सिंह अपने नाती रघुनाथ सिंह को ओरछा के जंगल छुपाकर स्वयं अपने पुत्र के साथ पनवाड़ी की ओर चले गए। इधर, अंग्रेजी हुकूमत ने राजा बखत सिंह को राजद्रोही घोषित करते हुए रियासत का कंपनी सरकार में विलय कर लिया था।
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रघुनाथ सिंह को दिया था मोहनगढ़ रियासत ने आश्रय
बुंदेलखंड के इतिहास के जानकार अजय द्विवेदी बताते हैं कि चिरगांव में किला ध्वस्त होने के बाद राजा राव बखत सिंह और उनके पुत्र पनवाड़ी जा रहे थे रास्ते में अंग्रेजी सेना ने उन पर हमला करके उन्हें शहीद कर दिया था। उनके नाती रघुनाथ सिंह बच गए थे, जिन्होंने टीकमगढ़ रियासत के मोहनगढ़ किले में शरण ली थी। बाद में जब अंग्रेजी हुकूमत को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने टीकमगढ़ रियासत को भी कड़ा पत्र लिखा था, पर रघुनाथ सिंह की परवरिश होती रही।
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