{"_id":"60f095f68ebc3ec20451a3c7","slug":"transfer-of-secretaries-stuck-due-to-pressure-jhansi-news-jhs199631361","type":"story","status":"publish","title_hn":"दबाव के चलते अटका सचिवों का तबादला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दबाव के चलते अटका सचिवों का तबादला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। ब्लॉक में दस साल से भी अधिक समय गुजर चुके सचिवों के पांव अभी भी अंगद की तरह जमे हुए हैं। तमाम कोशिश के बावजूद इनका तबादला तय नहीं हो पा रहा। जो सूची तैयार हुई, वह तमाम हैवीवेटों के दबाव में फाइनल नहीं हो पा रही। इसके चलते अब 20 जुलाई तक नई तबादला सूची आने की बात कही जा रही है।
ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभाग के दो दर्जन से अधिक सचिव एक ब्लॉक में वर्षों से जमे हैं। करीब दस सचिव ऐसे हैं, जो एक ब्लॉक में दस से तेरह साल तक गुजार चुके जबकि अधिकतम तीन साल ही रहने की इजाजत है। गेटिंग-सेटिंग में माहिर होने से वह अपने पंसदीदा ब्लॉक को छोड़ने को राजी नहीं हो रहे। कोरोना के चलते पिछले वर्ष ट्रांसफर सत्र को शून्य कर दिया गया लेकिन, शासन ने इस वर्ष इजाजत दी है।
उधर, पंचायत चुनाव के बाद नए प्रधानों के हाथ बागडोर होने से वे पुराने सचिवों को हटाने की पैरवी कर रहे हैं। इन सब परिस्थितियों के बावजूद ऐसे सचिवों को हटाने में महकमे को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। बताया जा रहा पिछले सप्ताह एक सूची तैयार हुई लेकिन, उसमें शामिल सचिवों ने हैवीवेटों से पैरवी करानी शुरू कर दी। एक-एक सचिव के लिए राजनीतिक दिग्गजों से दबाव बनाना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
इसी के चलते यह सूची फाइनल नहीं हो सकी। अब इसे 20 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया गया। झांसी में कुल 117 सचिव 496 ग्राम पंचायतों का काम संभालते हैं। बबीना ब्लॉक में 12, बड़ागांव में 12, चिरगांव में 15, मोंठ में 15, गुरसराय में 16, बामौर में 16, मऊरानीपुर में 17 एवं बंगरा ब्लॉक में 15 सचिव तैनात किए गए हैं। ग्राम पंचायतों के काम में इन सचिवों का अहम रोल होता है। भुगतान संबंधी सारे कार्य इनके माध्यम से होते हैं। वहीं, डीपीआरओ जगदीश गौतम का कहना है कि बीस जुलाई तक अंतिम तिथि तय की गई है। तबादला सूची उसी दौरान जारी कर दी जाएगी।
विज्ञापन
ग्राम्य विकास एवं पंचायती राज विभाग के दो दर्जन से अधिक सचिव एक ब्लॉक में वर्षों से जमे हैं। करीब दस सचिव ऐसे हैं, जो एक ब्लॉक में दस से तेरह साल तक गुजार चुके जबकि अधिकतम तीन साल ही रहने की इजाजत है। गेटिंग-सेटिंग में माहिर होने से वह अपने पंसदीदा ब्लॉक को छोड़ने को राजी नहीं हो रहे। कोरोना के चलते पिछले वर्ष ट्रांसफर सत्र को शून्य कर दिया गया लेकिन, शासन ने इस वर्ष इजाजत दी है।
विज्ञापन
उधर, पंचायत चुनाव के बाद नए प्रधानों के हाथ बागडोर होने से वे पुराने सचिवों को हटाने की पैरवी कर रहे हैं। इन सब परिस्थितियों के बावजूद ऐसे सचिवों को हटाने में महकमे को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। बताया जा रहा पिछले सप्ताह एक सूची तैयार हुई लेकिन, उसमें शामिल सचिवों ने हैवीवेटों से पैरवी करानी शुरू कर दी। एक-एक सचिव के लिए राजनीतिक दिग्गजों से दबाव बनाना शुरू कर दिया।
विज्ञापन
इसी के चलते यह सूची फाइनल नहीं हो सकी। अब इसे 20 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया गया। झांसी में कुल 117 सचिव 496 ग्राम पंचायतों का काम संभालते हैं। बबीना ब्लॉक में 12, बड़ागांव में 12, चिरगांव में 15, मोंठ में 15, गुरसराय में 16, बामौर में 16, मऊरानीपुर में 17 एवं बंगरा ब्लॉक में 15 सचिव तैनात किए गए हैं। ग्राम पंचायतों के काम में इन सचिवों का अहम रोल होता है। भुगतान संबंधी सारे कार्य इनके माध्यम से होते हैं। वहीं, डीपीआरओ जगदीश गौतम का कहना है कि बीस जुलाई तक अंतिम तिथि तय की गई है। तबादला सूची उसी दौरान जारी कर दी जाएगी।