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मानसून आने के एक महीने बाद तक उत्पात मचाएंगी टिड्डियां

Tue, 16 Jun 2020 11:31 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2020 11:31 PM IST
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tiddi dal in mansoon
tiddi - फोटो : tiddi
झांसी। मानसून आने के एक महीने बाद तक टिड्डियां उत्पात मचाएंगी। केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार ने बताया कि मानसून सीजन शुरू होते ही टिड्डियां सक्रिय होती हैं। इसके बाद जुलाई तक इनका प्रकोप ज्यादा रहता है। इसी समय उड़द, मूंग और तिल की फसल बोई जाती है। ऐसे में टिड्डियां इन फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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झांसी और उसके समीपवर्ती जिलों में लगातार टिड्डियों का डर सता रहा है। जब झांसी से यह दल गुजरा था, तब सब्जी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद से यह दल इलाहाबाद, चित्रकूट, महोबा, जालौन, के साथ-साथ उत्तर प्रदेश से सटे समीपवर्ती मध्य प्रदेश के जिलों जैसे कि निवाड़ी, शिवपुरी, गुना, पन्ना, छतरपुर आदि में घूम रहा है। हाल फिलहाल टिड्डियों का आतंक थमने वाला नहीं है।
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केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ने बताया कि मानसून सीजन में टिड्डियां एक्टिव होती हैं। मानसूनी हवाएं चलनी शुरू होते ही इनका विकास शुरू हो जाता है लेकिन इस बार यह पहले आ गई हैं। ऐसे में जुलाई तक झांसी और आसपास के जिलों में समस्या रहेगी। उन्होंने बताया कि दक्षिण-पूर्वी मानसून उत्तर-पूर्व की तरफ जाएगा। झांसी समेत बुंदेलखंड में जून के अंत तक मानसून आ पाता है। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड में जून-जुलाई में उड़द, मूंग और तिल बोई जाती है। ऐसे में इन फसलों को टिड्डियां चट कर सकती हैं।
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बचाव के लिए यह करें किसान
टिड्डियों से फसलों के बचाव के लिए कुलपति ने कुछ सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने बताया कि देसी तरीका अपनाकर किसान अपनी फसलों को टिड्डियों के नुकसान से बचा सकते हैं। बताया कि टिड्डियों के अलग-अलग दल होते हैं। एक के बाद दूसरा और फिर तीसरा आता है। एक दल की लंबाई दो-तीन किलोमीटर से लेकर आठ-दस किलोमीटर तक हो सकती है। ऐसे में टिड्डियों से फसल को बचाने के लिए नीम की निबोली को पीसकर पाउडर बना लें। इसको पानी में मिलाकर अधिक क्षेत्र में छिड़काव करें। इसकी दुर्गंध से टिड्डियों फसलों पर नहीं बैठती हैं। एक बार छिड़काव करने पर सात दिन तक दुर्गंध रहती है।
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