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तीन माह से गाय को खिलाने का नहीं मिला पैसा

Sat, 02 Jan 2021 02:08 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2021 02:08 AM IST
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three month payment not paid in bhusa
तीन माह से गाय को भूसा खिलाने का नहीं मिला पैसा
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हर माह करीब ढाई करोड़ रुपये का खर्च, पंद्रह करोड़ रुपये से अधिक रकम बकाया
निवर्तमान प्रधान अफसरों के काट रहे चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गोआश्रय स्थलों में बंद अन्ना जानवरों के भूसे के लिए सरकार पैसा नहीं दे रही। यहां बनी गोशालाओं में हर माह करीब ढाई करोड़ रुपये भूसे पर खर्च होता है लेकिन, तीन माह से सरकार फूटी कौड़ी नहीं दे रही। इसके पहले महज डेढ़ करोड़ ही दिए गए। भूसे के मद में करीब पंद्रह करोड़ रुपये से अधिक रकम बकाया हो चुकी।
बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों की समस्या देखते हुए सरकार ने पिछले वर्ष अस्थायी गोशालाएं बनवाईं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद की 196 अस्थायी गोशालाओं में करीब 25333 गोवंश रखे गए हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की है जबकि सरकार भूसा के लिए अलग से पैसा देती है। सिर्फ भूसा पर सालाना 26 करोड़ खर्च होते हैं लेकिन, सरकार अब पैसा देना करीब बंद कर चुकी। अफसरों का कहना है नौ माह में सिर्फ 4.73 करोड़ रुपये दिए गए। अक्तूबर में करीब डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए। अब करीब तीन माह बीतने के बाद कोई पैसा नहीं दिया गया।
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नियमित भुगतान न होने से गोशालाओं से जुड़ी सभी पंचायतों पर लाखों रुपये की देनदारी हो गई। भारी-भरकम देनदारी चुकाने का रास्ता भी अफसरों को नहीं सूझ रहा। उधर, पैसा न होने से गोशालाओं में भूसे का संकट पैदा हो रहा है। गोवंशों को नियमित खाना नहीं मिल रहा। अधिकांश गोआश्रय स्थलों में गोवंश भूखे रहने को मजबूर हैं। कई जगहों पर जानवर चोरी-छिपे बाहर हांक दिए गए। वहीं, अपर मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ.वाईके तोमर के मुताबिक जितना पैसा मिलता है वह ब्लॉकवार वितरित कर दिया जाता है। शेष धनराशि के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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इनसेट
प्रति गोवंश मिलती महज तीस रुपये की खुराक
गोशालाएं तो बनवाई गईं लेकिन, उनके रखरखाव को लेकर सरकार ने कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई। गोशाला बनते ही ग्राम पंचायतों को इसका जिम्मा दे दिया गया। सरकार ने भूसा देना तय किया लेकिन, खुराक में ही भारी-भरकम कटौती कर दी गई। एक गोवंश पर प्रतिदिन तीस रुपये की खुराक तय की गई है जबकि पशुचिकित्सकों के मुताबिक एक जानवर पर न्यूनतम 100-125 रुपये खर्च आता है लेकिन, सरकार तीस रुपये का भी नियमित भुगतान नहीं कर रही।

इनसेट
फंस गए निवर्तमान ग्राम प्रधान
गोशाला बनवाने को लेकर शुरुआत में ग्राम प्रधानों ने दिलचस्पी दिखाई लेकिन, अब अधिकांश निवर्तमान ग्राम प्रधानों को यह गले में फांस तरह महसूस हो रहा है। कार्यकाल के दौरान खुद की क्रेडिट लगाकर लाखों रुपये का भूसा गोशालाओं में भिजवाया लेकिन, अब तक भुगतान न होने से एजेंसी संचालक उनके पीछे पड़ गए। कई प्रधान अगला चुनाव भी लड़ना चाहते हैं, ऐसे में गोशाला चलाना भी उनकी मजबूरी है। ध्वानी, खिसनी बुर्जुग, दरबटयाऊ जैसी ग्राम पंचायतों का बीस लाख रुपये से अधिक का बकाया हो चुका।
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