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स्मार्ट सिटी के लिए बदलनी होगी सोच, देना होगा साथ

Sat, 11 Jan 2020 03:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jan 2020 03:06 AM IST
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thinking will have change for smart city
अमर उजाला के बिजनेस एकेडमिक सोशल एंटरप्रेन्योर (बेस) कार्यक्रम के तहत ‘झांसी को स्मार्ट सिटी बना?
झांसी। महानगर को स्मार्ट सिटी में तब्दील करना अकेले सरकार के बूते की बात नहीं है, बल्कि इसके लिए नगर के हर नागरिक को स्मार्ट होना होगा। लोगों को सरकारी तंत्र के साथ कदमताल करते हुए नगर को स्मार्ट सिटी की मंजिल पर पहुंचाना होगा। यह तब ही संभव है, जबकि स्मार्ट सिटी का स्वरूप तय करने में आम शहरी की भी भूमिका सुनिश्चित की जाए। यह बात अमर उजाला के बिजनेस एकेडमिक सोशल इंटरप्रेन्योर (बेस) कार्यक्रम के तहत ‘झांसी को स्मार्ट सिटी बनाने में जनसहभागिता की भूमिका’ विषय पर आयोजित संवाद में नगर के युवाओं ने कही। उत्साहित युवाओं ने कहा कि स्मार्ट सिटी में हमारा नगर साफ - सुथरा और हरा भरा हो। ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रखते हुए नगर का विकास किया जाएगा। इस दौरान नगर के युवाओं ने समस्याएं भी उठाईं और उनके समाधान के उपाय भी बताए।
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शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय पर आयोजित संवाद में युवाओं ने कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत नगर में सुविधाएं और संसाधन तो सरकार की ओर से विकसित कर दिए जाएंगे, लेकिन इन्हें सहेज कर रखने की जिम्मेदारी हर नागरिक की होगी। इसके लिए नगर निगम व अन्य सरकारी महकमों को लोगों को स्मार्ट सिटी में रहने के तौर-तरीके (सिटीजन चार्टर) भी बताने होंगे। इतना ही नहीं, स्मार्ट सिटी के तहत नगर में कराए जाने वाले कार्यों में आम लोगों के सुझाव भी शामिल किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि झांसी में अभी काम की बहुत गुंजाइश है और ये आसानी से संभव भी है। जरूरत तो सिर्फ योजनाबद्ध ढंग से आम आदमी की जरूरत के अनुसार काम करने भर की है। वहीं, अखबार को चाहिए कि वह जनता और प्रशासन के बीच सेतु की भूमिका निभाए।
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सही मायने में नगर तभी स्मार्ट होगा, जब यहां का हर एक नागरिक स्मार्ट सोच रखे। ये कोई कठिन काम भी नहीं है। कचरा हम निर्धारित जगह पर फेंके, गाड़ी पार्किंग में ही खड़ी करें, इस तरह के छोटे-छोटे उपायों से हम स्मार्ट हो सकते हैं और शहर को स्मार्ट बना सकते हैं।
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- वैशाली पुंशी, महानगर अध्यक्ष - उप्र उद्योग व्यापार मंडल
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ अच्छा माहौल भी विकसित करना होगा, ताकि नगर के लोगों की सेहत भी अच्छी रहे। साफ-सफाई के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम भी करने होंगे। सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं आम जनमानस के करीब ले जाना होगा।
- सोनम राठौर, रीजनल कोऑर्डिनेटर - सेंटर फॉर एडवोकेसी
जब पुलिस की सख्ती होती है, तब हम हेलमेट लगा लेते हैं, पुलिस का पहरा हटते ही फिर से हम पहले जैसे हो जाते हैं। इससे स्पष्ट है कि इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सरकार शहर को स्मार्ट तो बना देगी, परंतु हमारी सोच में बदलाव के बगैर ये इंफ्रास्ट्रक्चर भी हमें ज्यादा दिन तक स्मार्ट सुविधाएं नहीं दे पाएगा।
- उंजला सिद्दीकी, बैंक कर्मचारी
पुलिस हर गाड़ी के पीछे नहीं भाग सकती। यातायात नियमों का पालन करना हमें अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए। साथ ही ड्राइविंग लाइसेंस भी ऐसे लोगों को जारी करना चाहिए, जिसे गाड़ी चलाने के साथ-साथ ठीक ढंग से पार्क करना भी आता हो। इस प्रयास से शहर का यातायात स्मार्ट हो जाएगा।
- यश्तिका ओमर, एमबीबीएस छात्रा
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स्मार्ट सिटी में स्मार्ट अहसास होना भी जरूरी है। ये तब ही संभव है, जब समाज का माहौल बेहतर होगा। हम हर महिला को सोशल सिक्योरिटी प्रदान करें। इसके अलावा अपनी जिम्मेदारियों के प्रति खुद जागें और दूसरों को भी जागरूक करने का काम करें।
- शिल्पा मिश्रा, असिस्टेंट प्रोफेसर - बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
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जन समस्याएं आसानी से जिम्मेदार अफसरों तक पहुंचे और उनका त्वरित निस्तारण हो। स्मार्ट सिटी में ये व्यवस्था प्राथमिकता के साथ बनानी होगी। अन्यथा अनदेखी से समस्याएं विकराल हो जाती हैं और बाद में उनका हल करने में सरकारी पैसा और समय दोनों ही जाया होता है।
- आशीष अग्रवाल, सराफा कारोबारी
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स्मार्ट सिटी में हमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना होगा। सभी स्ट्रीट लाइट सौर ऊर्जा से जगमग हों। दफ्तरों में बिजली भी सौर ऊर्जा पर आधारित हो। इतना ही नहीं, सौर ऊर्जा को घर-घर में पहुंचाना होगा। इसके लिए जरूरी है कि इसके प्लांट सस्ते और आसानी से मिलें।
- संजय शर्मा, हाइडिलबर्ग सीमेंट कर्मचारी
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आमतौर पर देखने में आता है कि विकास के नाम पर बिल्डिंग तो बड़ी-बड़ी खड़ी कर दी जाती हैं, लेकिन बाद में उनकी देखरेख पर ध्यान नहीं दिया जाता है। स्मार्ट सिटी के तहत विकास के जो भी काम हों, उनकी नियमित रूप से देखभाल होती रहे, इसके भी इंतजाम होने चाहिए।

- संदीप अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर - बुंदेलखंड विश्वविद्यालय
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स्मार्ट सिटी में ई-रिक्शा बढ़ाने होंगे। वाहनों के लिए सीएनजी जैसे इंधन की उपलब्धता बढ़ानी होगी। सरकारी कामों में डिजिटलाइजेशन को बढ़ाना होगा। इसकी जानकारी हर नागरिक को देनी होगी, ताकि हर कोई इसका आसानी से इस्तेमाल कर सके।
- विवेक स्वामी, एडवोकेट
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