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छोटी लाइन को मिली बड़ी राहत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Nov 2016 01:05 AM IST
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train, jhansi news
- फोटो : demo
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ग्वालियर और श्योपुर कला के बीच बिछी दो सौ किलोमीटर लंबी छोटी लाइन पर अब रेल का संचालन बंद नहीं होगा। वैगन मरम्मत कारखाना के विशेषज्ञों के प्रयास से इस लाइन पर दौड़ने वाली ट्रेनों के कोच की मरम्मत की समस्या का समाधान हो गया है। यहां की ट्रेन के पहियों को वैगन मरम्मत कारखाने में ही असेम्बल किया जा रहा है। इससे अब रेल प्रशासन ने ट्रेन को बंद करने इरादा बदल दिया गया है।
रेल मंडल के ग्वालियर-श्योपुर कला स्टेशनों के बीच दो सौ किलोमीटर दूरी के दरम्यान बीस स्टेशन पड़ते हैं। यह दूरी तय करने के लिए यहां नैरोगेज (छोटी लाइन) लाइन बिछी हुई है। अभी तक एक दिन में इस लाइन पर तीन आने और तीन जाने के लिए कुल छह ट्रेनें दौड़ती थी। एक ट्रेन में अधिकतम आठ कोच होते हैं। मगर, मेंटेनेंस न हो पाने के कारण वर्तमान में अप और डाउन में चार ट्रेनें ही चल पा रही हैं और इन गाड़ियों में सात-सात कोच लगकर ही चल रहे हैं। बाकी कोच ग्वालियर स्टेशन की साइडिंग में खड़े हुए हैं।
दरअसल, मंडल रेल प्रशासन के पास इन ट्रेनों में जोड़ने के लिए 52 कोच हैं। इन गाड़ियों के पहिये जल्दी घिसते हैं और पहिये का पूरा सेट बदलने का कोई इंतजाम मंडल रेल प्रशासन के पास नहीं है। इस कारण पहिये घिसने के बाद जो कोच चलने की स्थिति में नहीं थे, उनको एक-एक कर इन ट्रेनों से हटाने का काम लगातार चल रहा था। इस कारण जुलाई माह में रेल प्रशासन ने नैरोगेज लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद करने का निर्णय लिया था। मगर, क्षेत्र के लोग इसके विरोध में आ गए थे, जिससे रेलवे के सामने असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई थी। इस समस्या का समाधान झांसी के वैगन मरम्मत कारखाने ने निकाल दिया। कोलकाता के चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स कारखाने से आने वाले छोटी रेल लाइन के कोचों के पहियों को असेम्बल करने का काम वैगन मरम्मत कारखाने में शुरू हो गया है। अभी तक कारखाने में 80 व्हील सेट तैयार होकर साइडिंग में खड़े कोचों में लगा दिए हैं, इससे बीस कोच दुरुस्त हो गए हैं।
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‘छोटी रेल लाइन के डिब्बों के व्हील सेट सफलता पूर्वक बनाए जा रहे हैं। यह काम लगातार जारी है, इससे छोटी रेल लाइन पर ट्रेनें बंद करने का जो इरादा था, वह बदल दिया गया है। अगले माह से तीसरी ट्रेन का संचालन भी दुबारा शुरू होने की उम्मीद है।’
अतुल्य सिन्हा, मुख्य कारखाना प्रबंधक।
12 घंटे का है सफर
ग्वालियर- श्योपुर कला नैरोगेज लाइन की लंबाई 200 किलोमीटर है, लेकिन इस दूरी को तय करने में 12 घंटे लग जाते हैं। इस रूट पर ट्रेन अधिकतम तीस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ पाती है।
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रेल मंडल के ग्वालियर-श्योपुर कला स्टेशनों के बीच दो सौ किलोमीटर दूरी के दरम्यान बीस स्टेशन पड़ते हैं। यह दूरी तय करने के लिए यहां नैरोगेज (छोटी लाइन) लाइन बिछी हुई है। अभी तक एक दिन में इस लाइन पर तीन आने और तीन जाने के लिए कुल छह ट्रेनें दौड़ती थी। एक ट्रेन में अधिकतम आठ कोच होते हैं। मगर, मेंटेनेंस न हो पाने के कारण वर्तमान में अप और डाउन में चार ट्रेनें ही चल पा रही हैं और इन गाड़ियों में सात-सात कोच लगकर ही चल रहे हैं। बाकी कोच ग्वालियर स्टेशन की साइडिंग में खड़े हुए हैं।
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दरअसल, मंडल रेल प्रशासन के पास इन ट्रेनों में जोड़ने के लिए 52 कोच हैं। इन गाड़ियों के पहिये जल्दी घिसते हैं और पहिये का पूरा सेट बदलने का कोई इंतजाम मंडल रेल प्रशासन के पास नहीं है। इस कारण पहिये घिसने के बाद जो कोच चलने की स्थिति में नहीं थे, उनको एक-एक कर इन ट्रेनों से हटाने का काम लगातार चल रहा था। इस कारण जुलाई माह में रेल प्रशासन ने नैरोगेज लाइन पर ट्रेनों का संचालन बंद करने का निर्णय लिया था। मगर, क्षेत्र के लोग इसके विरोध में आ गए थे, जिससे रेलवे के सामने असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई थी। इस समस्या का समाधान झांसी के वैगन मरम्मत कारखाने ने निकाल दिया। कोलकाता के चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स कारखाने से आने वाले छोटी रेल लाइन के कोचों के पहियों को असेम्बल करने का काम वैगन मरम्मत कारखाने में शुरू हो गया है। अभी तक कारखाने में 80 व्हील सेट तैयार होकर साइडिंग में खड़े कोचों में लगा दिए हैं, इससे बीस कोच दुरुस्त हो गए हैं।
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‘छोटी रेल लाइन के डिब्बों के व्हील सेट सफलता पूर्वक बनाए जा रहे हैं। यह काम लगातार जारी है, इससे छोटी रेल लाइन पर ट्रेनें बंद करने का जो इरादा था, वह बदल दिया गया है। अगले माह से तीसरी ट्रेन का संचालन भी दुबारा शुरू होने की उम्मीद है।’
अतुल्य सिन्हा, मुख्य कारखाना प्रबंधक।
12 घंटे का है सफर
ग्वालियर- श्योपुर कला नैरोगेज लाइन की लंबाई 200 किलोमीटर है, लेकिन इस दूरी को तय करने में 12 घंटे लग जाते हैं। इस रूट पर ट्रेन अधिकतम तीस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ पाती है।