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रोडवेज में स्मार्ट कार्ड से यात्रा का था ख्वाब....5 हजार लोगों के फंसे 20 लाख
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झांसी। यूपी परिवहन निगम ने अपने यात्रियों को कैशलेस यात्रा कराने के लिए स्मार्ट कार्ड योजना शुरू की थी। इस योजना के अंतर्गत किसी भी डिपो में जाकर आधार कार्ड और 550 रुपये देकर स्मार्ट कार्ड बनवाया जा सकता था। बुंदेलखंड के जालौन, ललितपुर और झांसी के करीब 5000 लोगों ने स्मार्ट कार्ड लिया था लेकिन 2020 में विभाग ने इस योजना को खामोशी के साथ बंद कर दिया। अब यह लोग कार्ड में जो रुपये शेष हैं वह वापस लेने के लिए भटक रहे हैं। विभाग भरोसा दे रहा है कि एक दो महीने में कार्ड को दोबारा से शुरू किया जाएगा।
दरअसल इस योजना से वह लोग ज्यादा जुड़े थे जो डेली पैसेंजर थे। इसमें भी सबसे बड़ी संख्या अध्यापकों की थी। साथ ही झांसी और आसपास के जनपदों में सर्विस करने वालों ने स्मार्ट कार्ड बनवा लिया था। इस कार्ड में लोगों ने रिचार्ज करवाया। किसी ने एक हजार का रिचार्ज कराया था तो किसी ने 2000 का। लेकिन यह योजना बंद कर दी गई। अब पांच हजार लोगों के कार्ड में पैसा शेष है। यह पैसा कैसे मिलेगा। कौन देगा इसका जवाब लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
केस-1
बबीना कैंट में अध्यापक के पद पर तैनात सावित्री उपाध्याय ने बताया कि रोडवेज की स्मार्ट योजना के तहत कार्ड बनवाया था। एक साल तक कार्ड का प्रयोग किया। इसके बाद अचानक कार्ड ने काम करना बंद कर दिया। इसके पहले ही कार्ड में पहले एक हजार फिर दो हजार रुपये डलवाए थे। जो वापस नहीं मिले।
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केस- 2
शिवाजी नगर में रहने अध्यापक नीरज कुमार ने बताया कि स्मार्ट कार्ड में पांच हजार रुपये फंसे हैं लेकिन विभागीय अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। दो साल से डिपो के चक्कर काट रहा हूं। लेकिन धनराशि वापस नहीं मिली। हमारे जैसे ऐसे ही तकरीबन और भी पांच हजार यात्री हैं, जिनके रुपये स्मार्ट कार्ड में फंसे हैं।
केस -3
गरौठा के रहने वाले कौशलेंद्र ने बताया कि वह कचहरी में बैठते हैं। पेशे से वकील हैं, इसलिए गरौठा से झांसी मुख्यालय प्रतिदिन आना होता है। इसलिए स्मार्ट कार्ड बनवाया था। शुरू में तो बहुत लाभ लिया। इसके बाद अचानक से बंद होने के कारण स्मार्ट कार्ड में तीन हजार रुपये आज भी फंसे हैं। कई बार डिपो के चक्कर लगाया। इसके बाद जाना ही छोड़ दिया।
केस - 4
चिरगांव के रहने वाले राजू अग्रवाल ने बताया कि व्यापार के कारण प्रतिदिन झांसी मुख्यालय आना जाना होता था। इसलिए स्मार्ट कार्ड बनवाया था। कार्ड में पांच हजार रुपये का जल्द ही रिचार्ज करवाया था। लेकिन स्मार्ट कार्ड के अचानक बंद होने के कारण पैसे फंस गए।
स्मार्ट कार्ड से ऐसे बनता है टिकट
स्मार्ट कार्ड को ईटीएम में लगाते ही निर्धारित दूरी के टिकट की धनराशि भरने पर स्मार्ट कार्ड से रुपये कट जाएंगे। इसका मैसेज संबंधित व्यक्ति के रजिस्टर्ड मोबाइल पर तुरंत आ जाएगा। कार्ड से कम से कम और अधिक से अधिक कितनी भी दूरी की यात्रा की जा सकती है।
यात्रियों की सुविधा के लिए स्मार्ट कार्ड योजना शुरू की गई थी, जिससे बस में खुले पैसे देने की परेशानी से यात्रियों को बचाया जा सके। दोबारा से बहुत जल्द ही यह योजना चालू कर दी जाएगी। जिन यात्रियों के रुपये फंसे हैं, उनको जल्द ही वापस कर दिया जाएगा। - संदीप अग्रवाल, आरएम
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दरअसल इस योजना से वह लोग ज्यादा जुड़े थे जो डेली पैसेंजर थे। इसमें भी सबसे बड़ी संख्या अध्यापकों की थी। साथ ही झांसी और आसपास के जनपदों में सर्विस करने वालों ने स्मार्ट कार्ड बनवा लिया था। इस कार्ड में लोगों ने रिचार्ज करवाया। किसी ने एक हजार का रिचार्ज कराया था तो किसी ने 2000 का। लेकिन यह योजना बंद कर दी गई। अब पांच हजार लोगों के कार्ड में पैसा शेष है। यह पैसा कैसे मिलेगा। कौन देगा इसका जवाब लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
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केस-1
बबीना कैंट में अध्यापक के पद पर तैनात सावित्री उपाध्याय ने बताया कि रोडवेज की स्मार्ट योजना के तहत कार्ड बनवाया था। एक साल तक कार्ड का प्रयोग किया। इसके बाद अचानक कार्ड ने काम करना बंद कर दिया। इसके पहले ही कार्ड में पहले एक हजार फिर दो हजार रुपये डलवाए थे। जो वापस नहीं मिले।
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केस- 2
शिवाजी नगर में रहने अध्यापक नीरज कुमार ने बताया कि स्मार्ट कार्ड में पांच हजार रुपये फंसे हैं लेकिन विभागीय अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। दो साल से डिपो के चक्कर काट रहा हूं। लेकिन धनराशि वापस नहीं मिली। हमारे जैसे ऐसे ही तकरीबन और भी पांच हजार यात्री हैं, जिनके रुपये स्मार्ट कार्ड में फंसे हैं।
केस -3
गरौठा के रहने वाले कौशलेंद्र ने बताया कि वह कचहरी में बैठते हैं। पेशे से वकील हैं, इसलिए गरौठा से झांसी मुख्यालय प्रतिदिन आना होता है। इसलिए स्मार्ट कार्ड बनवाया था। शुरू में तो बहुत लाभ लिया। इसके बाद अचानक से बंद होने के कारण स्मार्ट कार्ड में तीन हजार रुपये आज भी फंसे हैं। कई बार डिपो के चक्कर लगाया। इसके बाद जाना ही छोड़ दिया।
केस - 4
चिरगांव के रहने वाले राजू अग्रवाल ने बताया कि व्यापार के कारण प्रतिदिन झांसी मुख्यालय आना जाना होता था। इसलिए स्मार्ट कार्ड बनवाया था। कार्ड में पांच हजार रुपये का जल्द ही रिचार्ज करवाया था। लेकिन स्मार्ट कार्ड के अचानक बंद होने के कारण पैसे फंस गए।
स्मार्ट कार्ड से ऐसे बनता है टिकट
स्मार्ट कार्ड को ईटीएम में लगाते ही निर्धारित दूरी के टिकट की धनराशि भरने पर स्मार्ट कार्ड से रुपये कट जाएंगे। इसका मैसेज संबंधित व्यक्ति के रजिस्टर्ड मोबाइल पर तुरंत आ जाएगा। कार्ड से कम से कम और अधिक से अधिक कितनी भी दूरी की यात्रा की जा सकती है।
यात्रियों की सुविधा के लिए स्मार्ट कार्ड योजना शुरू की गई थी, जिससे बस में खुले पैसे देने की परेशानी से यात्रियों को बचाया जा सके। दोबारा से बहुत जल्द ही यह योजना चालू कर दी जाएगी। जिन यात्रियों के रुपये फंसे हैं, उनको जल्द ही वापस कर दिया जाएगा। - संदीप अग्रवाल, आरएम