Jhansi: न दिन में चैन है न रात को आराम, डिप्रेशन में घिर रहे पुलिस वाले
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीष के अनुसार पुलिसकर्मी सबसे अधिक अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं। वह बताते हैं कि नौकरी के दौरान उनका तबादला दूसरे शहरों में हो जाता है। ऐसे में उन्हें घर से दूर जाना पड़ता है। इस दौरान बच्चे बेफ्रिक होकर पढ़ाई और कॅरियर पर ध्यान नहीं देते।
विस्तार
दूसरों की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाली पुलिस तनाव से जूझ रही है। काम का स्ट्रेस और कई-कई महीनों तक परिवार व बच्चों से दूर रहना उनके पारिवारिक रिश्तों में खटास पैदा कर रहा है। स्थिति यहां तक आ गई है कि अब उनकी स्ट्रेस सहने की क्षमता भी घटने लगी है। मनोवैज्ञानिक बता रहे हैं कि उनके पास महीने में तकरीबन ऐसे 40 केस आ रहे हैं। जिसमें महिला-पुरुष कर्मी मानसिक रूप से घर-परिवार की जिम्मेदारियों के लेकर परेशान हैं।
मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र के मनोवैज्ञानिक डॉ. मनीष के अनुसार पुलिसकर्मी सबसे अधिक अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं। वह बताते हैं कि नौकरी के दौरान उनका तबादला दूसरे शहरों में हो जाता है। ऐसे में उन्हें घर से दूर जाना पड़ता है। इस दौरान बच्चे बेफ्रिक होकर पढ़ाई और कॅरियर पर ध्यान नहीं देते। वह भी महीनों उनसे मिल नहीं पाते, इससे बच्चों का कॅरियर बिगड़ जाता है। वहीं घर-गृहस्थी की बातों पर ध्यान न देने से परिवार और पत्नी से भी रिश्तों में दूरी बढ़ जाती है। वहीं, जो परिवार के साथ रह रहे हैं वह भी उन्हें समय नहीं दे पा रहे हैं इससे उनके रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कई पुलिसकर्मी समय से काउंसलिंग भी नहीं ले पाते हैं। ऐसे में उनके लिए कई बार स्पेशल शेड्यूल बनाकर काउंसलिंग दी जाती है। केंद्र में महीने में छह-सात केस आ ही जाते हैं। वहीं मनोवैज्ञानिक डॉ. अर्जित ने बताया कि उनकी क्लीनिक में हर महीने 15 से 20 केस आते हैं।
केस-1
शहर के एक थाने में तैनात दरोगा घर और बच्चों को समय न देने पाने के कारण लंबे समय से स्ट्रेस महसूस कर रहे थे। इस पर काम का तनाव उन्हें चिड़चिड़ा बना रहा था। घर से कोई फोन भी आ जाए तो गुस्सा आ जाता था। किसी ने मनोविज्ञान केंद्र जाने की सलाह दी। केंद्र में उनकी काउंसलिंग की गई जिसमें सामने आया कि बड़े होते बच्चों के कॅरियर और परिवार की जिम्मेदारी को लेकर वह मानसिक रूप से परेशान हैं। मनोवैज्ञानिक उनकी काउंसलिंग कर रहे हैं।
केस-2
मूल रूप से इटावा में तैनात झांसी निवासी एक महिला पुलिसकर्मी की बेटी का बढ़िया पैकेज पर फॉरेन की कंपनी में जॉब लगा तो उन्हें बेटी के तमाम कागजात आदि जमा करने के लिए बार-बार झांसी आना पड़ रहा था। इस बीच छुट्टी न मिल पाना, काम का दबाव और बेटी के कॅरियर का स्ट्रेस उन्हें लगातार परेशान कर रहा था। वह तनाव महसूस करने लगीं। उन्होंने मनोविज्ञान केंद्र में काउंसलिंग ली तो स्थितियों में सुधार आया।
ऐसे करते हैं काउंसलिंग
- नौकरी के दौरान जब भी समय मिले घरवालों से बात करें, वीडियो कॉल करें।
- घर से बाहर पोस्टिंग हो तो बच्चों से हफ्ते में कम से कम एक बार पूरे सप्ताह के शेड्यूल की जानकारी लें।
- बच्चों के स्कूल-कॉलेज, ट्यूशन व शिक्षक से हाल-चाल लेते रहें, ताकि बच्चे बेफ्रिक न हों।
- घर का माहौल खुशनुमा हो और आपकी टेंशन कम हो, इसके लिए ड्यूटी के बाद का समय परिवार को दें।
- महीने में कम से कम एक बार अपने दोस्तों से जरूर मिलें, जिससे मिलकर मन हल्का हो, उससे बातचीत करें।
तनाव परिवार को समय न दे पाने का मुख्य कारण
पुलिस वालों के महीने में छह-सात केस आ ही जाते हैं। काउंसलिंग के जरिए उनका तनाव दूर किया जा रहा है। इनमें महिला पुलिस भी शामिल हैं। महिलाएं हों या पुरुष सभी में अधिकतर घर-परिवार के माहौल से दूर रहने और परिवार को समय न दे पाना मुख्य कारण मिलता है। वहीं कई बताते हैं कि काम के तनाव और परिवार से दूरी के कारण उनके रिश्ते भी बिगड़ रहे हैं।
तनाव के कारण स्ट्रेस सहने की क्षमता प्रभावित हो रही
मेरे पास महीने में 12 से 15 केस आ रहे हैं। पुलिसकर्मी बताते हैं कि तनाव के चलते उन्हें नींद तक नहीं आ रही। नौकरी और परिवार का तनाव उनकी स्ट्रेस सहने की क्षमता को भी प्रभावित कर रहा है। परिवार के साथ तीज-त्योहार नहीं मना पाते, फैमिली प्रोग्राम में नहीं जा पाते हैं। बच्चों और पत्नी से महीनों नहीं मिल पाते हैं, ये सब बातें उनके रिश्ते में खटास पैदा कर रही हैं। कई तो तनाव में नशा भी कर लेते हैं। काउंसलिंग के जरिए उनका स्ट्रेस कम किया जाता है।
- डॉ. अर्जित गौरव-मनोवैज्ञानिक