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तीसरी लहर आई तो झांसी में फिर बेकाबू हो जाएंगे हालात

Mon, 27 Dec 2021 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 27 Dec 2021 12:39 AM IST
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The third wave came again in Jhansi will become uncontrollable.
झांसी। तीसरी लहर आई तो झांसी में फिर से हालात बेकाबू हो सकते हैं। बिना मास्क के बाजारों, मेलों में उमड़ने वाली भीड़ सुपर स्प्रेडर बन सकती है। क्योंकि, वैक्सीन लग जाने के बाद कइयों में कोरोना के लक्षण भी सामने नहीं आ रहे हैं। वहीं, तीन लाख लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई है। इन पर ये महामारी भारी पड़ सकती है।
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झांसी पर चौथा सप्ताह काफी भारी गुजर रहा है। 19 दिसंबर तक कोरोना से पूरी तरह मुक्त रहने वाले झांसी में अब नौ एक्टिव केस हो गए हैं। इसके बावजूद 90 फीसदी लोग अभी भी बाजारों, मेलों, शॉपिंग मॉल, सड़कों पर बिना मास्क घूम रहे हैं। ये हालात झांसी में कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन सकते हैं। जिले में 14.80 लाख लोगों को कोरोना का टीका लगना है, जबकि 11.80 लाख लोगों को ही कोरोना की वैक्सीन लगी है। जबकि, आठ लाख लोगों को कोविड की दूसरी वैक्सीन नहीं लग पाई है। ये आंकड़े झांसी के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। दूसरी लहर में हुई तबाही का मंजर सबने देखा है। ऐसे में यदि तीसरी लहर आती है तो फिर से हालात बद से बदतर हो सकते हैं।
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500 से ज्यादा जगहों पर होनी है न्यू इयर पार्टी
झांसी में होटलों से लेकर सार्वजनिक स्थानों तक में न्यू इयर पार्टी का आयोजन किया गया है। बताया गया कि छोटी-बड़ी लगभग 500 जगहों पर नव वर्ष को सेलीब्रेट किया जाना है। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ये पार्टियां भी झांसी में कोरोना के मामले बढ़ाने का कारण बन सकती हैं। पार्टियों में खानपान का इंतजाम होगा। ऐसे में खाना खाने के दौरान लोग मास्क जरूर उतारेंगे। पार्टी में एक भी कोरोना संक्रमित हुआ तो वो कइयों को अपनी चपेट में ले सकता है।
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कॉरपोरेशन से नहीं मिल पा रही दवाएं
शासन का निर्देश है कि सरकारी अस्पताल यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन से दवाओं की खरीद करें मगर पर्याप्त मात्रा में ये दवाओं की सप्लाई नहीं दे पा रहा है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि 70 फीसदी दवाएं कारपोरेशन से नहीं मिल पा रहीं हैं, जो मिल रही हैं, उनका भी मांग के अनुसार कम स्टाक आ रहा है। कॉलेज ने कुछ दिनों पहले मिथाइल प्रिडनीसोलोन, आईवीजी, ह्यूमन एल्बुमिन, मॉक्सी फ्लॉक्सासिन, लिवोफ्लॉक्सासिन, लिनजोलिड, टिकोप्लेनिन, वेनकोमाइसिन, मीरोपेनन इंजेक्शन, सिट्राजिन टैबलेट आदि दवाओं की मांग भेजी थी। इनमें से एक भी नहीं मिली। फिर ई-टेंडरिंग के जरिए खरीद की जा रही है।
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