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Jhansi News: हॉकी के जादूगर का बढ़ा रहीं मान... प्रतिभा के दम पर बेटियों ने कमाया नाम

Sat, 10 Feb 2024 02:53 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Feb 2024 02:53 AM IST
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The hockey magician is being respected... daughters earned name on the basis of talent
बसु जैन
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झांसी। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद उनके आदर्श हैं। मैदान पर उनके जैसा खेल खेलने के लिए बेटियां पूरे जोश से जुटी हैंं। कोई गेंद के जरिये गोल करने के लिए मशक्कत कर रही है तो कोई गोल रोककर अपनी प्रतिभा दिखा रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखा चुकीं इन बेटियों ने कड़े संघर्ष के बाद यह मुकाम हासिल किया है। झांसी में राष्ट्रीय प्रतियोगिता खेलने पहुंची अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की आंखों में सपने बहुत हैं, लेकिन गर्व है कि वे दद्दा की धरती पर खेल रही हैं।
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दद्दा के जैसा खेलना चाहती हैं सुजाता
एनसीओई कोलकाता टीम की मिड फील्डर खिलाड़ी सुजाता कुचुर मेजर ध्यानचंद को अपना आदर्श मानती हैं। वे कहती हैं कि दद्दा ध्यानचंद के खेल के वीडियो देखकर हॉकी सीखी है। ओडिशा की रहने वाली सुजाता दो बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। जूनियर भारतीय महिला हॉकी टीम में शामिल होकर उन्होंने एशिया कप और वर्ल्ड कप में मैच खेले हैं। सुजाता बताती हैं कि गांव में हॉकी की प्रैक्टिस होती थी। वहां मेजर ध्यानचंद के बारे में बताया जाता था। गांव से हॉकी खेलना शुरू किया और मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने तक का सफर तय किया। सुजाता के पिता दीना कुचुर गांव में खेती करते हैं।
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ओलंपिक खेलना चाहती हैं करिश्मा
हिम हॉकी अकादमी सोलन हिमाचल प्रदेश की खिलाड़ी करिश्मा का सपना ओलंपिक खेलने का है। इसके लिए वे 2009 से मैदान पर अपनी हॉकी के जरिए प्रतिभा दिखा रही हैं। ग्वालियर की रहने वाली करिश्मा अब तक एशिया कप समेत कई अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं। गोआ में हुए नेशनल गेम्स में उनको अवार्ड भी मिल चुका है। मिड फील्डर खिलाड़ी करिश्मा को मध्यप्रदेश सरकार 2015 में एकलव्य अवार्ड और 2020 में विक्रम अवार्ड से सम्मानित कर चुकी है। करिश्मा बताती हैं कि हॉकी अब काफी बदल रहा है। बेटियों को इस खेल में पूरा सहयोग और तरजीह मिल रही है।
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दिन में नौकरी, शाम को करती हैं अभ्यास
पूर्वाेत्तर रेलवे टीम की गोलकीपर खिलाड़ी स्वाति रेलवे में जूनियर अकाउंट असिस्टेंट हैं। वे दिन में नौकरी करती हैं और रोज शाम को एक घंटा हॉकी का अभ्यास करती हैं। हिसार के फतेहाबाद की रहने वाली स्वाति 2008 से विभिन्न टीमों में गोलकीपर हैं। उनको सीनियर नेशनल टूर्नामेंट में बेस्ट गाेलकीपर का अवार्ड भी मिल चुका है। वहीं स्वाति कोरिया और स्पेन में एशिया चैंपियन्स ट्रॉफी और एशिया कप में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। वे कहती हैं कि मन में चाह हो तो हर राह आसान होती है।

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सिमरन आयरलैंड में जमा चुकीं धाक
पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर की टीम में शामिल सिमरन सिंह आयरलैंड और बेलारूस में अपनी हॉकी के जरिये प्रतिभा दिखा चुकी हैं। मुरादाबाद की रहने वाली सिमरन नौ साल से हॉकी खेल रही हैं। इंडियन टीम में शामिल होकर दो अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच खेल चुकी हैं। डिफेंडर के तौर पर खेलने वाली सिमरन रेलवे में टीटीई हैं। वे कहती हैं कि घर के सामने मैदान में हॉकी खेला जाता था। भाई के साथ खेलना सीखा। परिवार के सहयोग से यहां तक पहुंची। झांसी हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कर्मभूमि रही है, यहां खेलना मेरे लिए गर्व की बात है। सिमरन इन दिनों दिल्ली के एनसीओई में ट्रेनिंग कर रही हैं।
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