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Jhansi News: नेत्र बैंक के लिए नौ को आएगी शासन की टीम
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बुंदेलखंड का बनेगा पहला नेत्र बैंक, टीम की रिपोर्ट पर मिलेगा अंग प्रत्यारोपण अधिनियम प्रमाणपत्र
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक खोलने के लिए शासन से गठित टीम नौ दिसंबर को आ रही है। टीम 500 बेड अस्पताल में नेत्र बैंक की चिह्नित जगह व ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थियेटर (ओटी) देखेगी। इसके चलते, बृहस्पतिवार को नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने ओटी का निरीक्षण करके जरूरी व्यवस्थाएं देखीं। टीम 15 दिसंबर तक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
2012 से मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक बनाने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। 500 बेड के अस्पताल की अत्याधुनिक बिल्डिंग बनने पर फिर से प्रस्ताव भेजा गया तो शासन ने गंभीरता से लिया। इसके साथ ही शासन ने नेत्र बैंक के लिए जरूरी उपकरणों की सूची का ब्योरा तलब किया। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र ने शासन को करीब 1.50 करोड़ रुपये के उपकरण का प्रस्ताव भेजा, जो स्वीकार कर लिया गया है।
इसके साथ ही मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत नेत्र बैंक को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए टीम गठित कर दी गई। इसमें डॉ. राजनाथ सिंह कुशवाहा आचार्य नेत्र विभाग राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन और डॉ. अंजू सिंह सहायक आचार्य नेत्र विभाग स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एटा को शामिल किया गया है। विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि शासन से गठित टीम नौ दिसंबर को निरीक्षण करने के लिए कॉलेज में आ रही है। टीम की रिपोर्ट सकारात्मक होने पर नेत्र बैंक की स्थापना जल्द हो जाएगी।
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0- ये उपकरण चाहिए बैंक को
नेत्र प्रत्यारोपण के लिए बैंक के पास 60 लाख का स्पेक्युलर माइक्रोस्कोप, 40 लाख का ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप होना जरूरी है। इसके अलावा, वातानुकूलित एंबुलेंस होना चाहिए ताकि नेत्र को बैंक तक सुरक्षित लाया जा सके।
0- बैंक बना तो कइयों की जिंदगी में होगा उजाला
डॉ. जितेंद्र बताते हैं कि नेत्र बैंक बनने के बाद देखने में अक्षम लोगों की जिंदगी में उजाला हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मृत्यु के छह घंटे में आई बॉल (आंख) निकाली जाती है। बैंक न होने पर छह घंटे में निकाली गई आंख का कार्निया प्रत्यारोपित करना होता है। यदि बैंक होता है तो निकाली गई आंख को सुरक्षित रखकर 72 घंटे में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक खोलने के लिए शासन से गठित टीम नौ दिसंबर को आ रही है। टीम 500 बेड अस्पताल में नेत्र बैंक की चिह्नित जगह व ट्रांसप्लांट के लिए ऑपरेशन थियेटर (ओटी) देखेगी। इसके चलते, बृहस्पतिवार को नेत्र रोग विभागाध्यक्ष ने ओटी का निरीक्षण करके जरूरी व्यवस्थाएं देखीं। टीम 15 दिसंबर तक जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
2012 से मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक बनाने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं। 500 बेड के अस्पताल की अत्याधुनिक बिल्डिंग बनने पर फिर से प्रस्ताव भेजा गया तो शासन ने गंभीरता से लिया। इसके साथ ही शासन ने नेत्र बैंक के लिए जरूरी उपकरणों की सूची का ब्योरा तलब किया। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र ने शासन को करीब 1.50 करोड़ रुपये के उपकरण का प्रस्ताव भेजा, जो स्वीकार कर लिया गया है।
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इसके साथ ही मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत नेत्र बैंक को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करने के लिए टीम गठित कर दी गई। इसमें डॉ. राजनाथ सिंह कुशवाहा आचार्य नेत्र विभाग राजकीय मेडिकल कॉलेज जालौन और डॉ. अंजू सिंह सहायक आचार्य नेत्र विभाग स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एटा को शामिल किया गया है। विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने कहा कि शासन से गठित टीम नौ दिसंबर को निरीक्षण करने के लिए कॉलेज में आ रही है। टीम की रिपोर्ट सकारात्मक होने पर नेत्र बैंक की स्थापना जल्द हो जाएगी।
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0- ये उपकरण चाहिए बैंक को
नेत्र प्रत्यारोपण के लिए बैंक के पास 60 लाख का स्पेक्युलर माइक्रोस्कोप, 40 लाख का ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप होना जरूरी है। इसके अलावा, वातानुकूलित एंबुलेंस होना चाहिए ताकि नेत्र को बैंक तक सुरक्षित लाया जा सके।
0- बैंक बना तो कइयों की जिंदगी में होगा उजाला
डॉ. जितेंद्र बताते हैं कि नेत्र बैंक बनने के बाद देखने में अक्षम लोगों की जिंदगी में उजाला हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मृत्यु के छह घंटे में आई बॉल (आंख) निकाली जाती है। बैंक न होने पर छह घंटे में निकाली गई आंख का कार्निया प्रत्यारोपित करना होता है। यदि बैंक होता है तो निकाली गई आंख को सुरक्षित रखकर 72 घंटे में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।