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दो दर्जन किसानों की मौत के बाद जागी सरकार
झांसी न्यूज
Updated Thu, 05 Nov 2015 01:13 AM IST
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झांसी। सूखे की विभिषिका में झुलस रहे बुंदेलखंड में किसानों की मौत का आंकड़ा दो दर्जन के पार हो गया है, तब केंद्र सरकार की नींद टूटी है। बृहस्पतिवार (आज) को केंद्रीय दल झांसी आएगा। दो दिवसीय दौरे में दल छह जनपदों का भ्रमण कर हकीकत का पता लगाएगा। इस दौरान अधिकारियों के साथ बैठक भी होगी।
बारिश न होने से खरीफ की फसल बुरी तरह से बर्बाद हो गई है। दाने-दाने को मोहताज अन्नदाता मौत को गले लगा रहे हैं। बुंदेलखंड में दो दर्जन से अधिक किसानों की जान जा चुकी है। अकेले झांसी में ही सात किसान दम तोड़ चुके हैं। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार को एक और किसान की मौत की खबर आई है। बर्बादी के इस मंजर के अपने विकराल स्वरूप में पहुंचने के बाद सरकार की नींद टूटी है। हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है और अब केंद्रीय दल सूखे का आंकलन करने झांसी आ रहा है। भारत सरकार के आपदा प्रबंधन, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के निदेशक आलोक अग्रवाल के नेतृत्व में केंद्रीय दल बृहस्पतिवार को शताब्दी एक्सप्रेस से झांसी आएगा। यहां से टीम सड़क मार्ग से जालौन के लिए रवाना हो जाएगी। इसके बाद हमीरपुर व बांदा पहुंचेगी। बांदा में रात्रि विश्राम के बाद अगले शुक्रवार को बांदा व चित्रकूट के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। तदुपरांत, टीम महोबा होते हुए झांसी पहुंचेगी। यहां झांसी व ललितपुर जिले के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। सायंकाल शताब्दी से टीम दिल्ली के लिए रवाना हो जाएगी।
जिले में सिर्फ 65 करोड़ का नुकसान!
झांसी। गांव -गांव में बर्बादी का मंजर पसरा हुआ है। खेत-खलिहान सूखे पड़े हुए हैं। किसानों में हाहाकार की स्थिति है। इसके बावजूद प्रशासन सूखे से जिले में सिर्फ लगभग 65 करोड़ रुपये का ही नुकसान मान रहा है। यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जबकि, किसान नेता गौरीशंकर बिदुआ के अनुसार सूखे से दलहनी फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। झांसी जनपद में ही एक अरब से अधिक की क्षति हुई है। प्रशासन क्षति को कमतर दिखा रहा है।
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बारिश न होने से खरीफ की फसल बुरी तरह से बर्बाद हो गई है। दाने-दाने को मोहताज अन्नदाता मौत को गले लगा रहे हैं। बुंदेलखंड में दो दर्जन से अधिक किसानों की जान जा चुकी है। अकेले झांसी में ही सात किसान दम तोड़ चुके हैं। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार को एक और किसान की मौत की खबर आई है। बर्बादी के इस मंजर के अपने विकराल स्वरूप में पहुंचने के बाद सरकार की नींद टूटी है। हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है और अब केंद्रीय दल सूखे का आंकलन करने झांसी आ रहा है। भारत सरकार के आपदा प्रबंधन, कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के निदेशक आलोक अग्रवाल के नेतृत्व में केंद्रीय दल बृहस्पतिवार को शताब्दी एक्सप्रेस से झांसी आएगा। यहां से टीम सड़क मार्ग से जालौन के लिए रवाना हो जाएगी। इसके बाद हमीरपुर व बांदा पहुंचेगी। बांदा में रात्रि विश्राम के बाद अगले शुक्रवार को बांदा व चित्रकूट के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। तदुपरांत, टीम महोबा होते हुए झांसी पहुंचेगी। यहां झांसी व ललितपुर जिले के अधिकारियों के साथ बैठक होगी। सायंकाल शताब्दी से टीम दिल्ली के लिए रवाना हो जाएगी।
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जिले में सिर्फ 65 करोड़ का नुकसान!
झांसी। गांव -गांव में बर्बादी का मंजर पसरा हुआ है। खेत-खलिहान सूखे पड़े हुए हैं। किसानों में हाहाकार की स्थिति है। इसके बावजूद प्रशासन सूखे से जिले में सिर्फ लगभग 65 करोड़ रुपये का ही नुकसान मान रहा है। यह रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जबकि, किसान नेता गौरीशंकर बिदुआ के अनुसार सूखे से दलहनी फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। झांसी जनपद में ही एक अरब से अधिक की क्षति हुई है। प्रशासन क्षति को कमतर दिखा रहा है।
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