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Jhansi News: 13 घंटा और 20 मिनट का होगा रमजान का पहला रोजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। चांद का दीदार होने पर 12 अथवा 13 मार्च को रमजान का पहला रोजा होगा। रमजान का पहला रोजा 13 घंटा और 20 मिनट का होगा। जबकि इस बार आखिरी रोजा 13 घंटा और 52 मिनट का होगा। इस तरह पहले और आखिरी रोजे में 32 मिनट का ही फर्क होगा।
रमजान के चांद का दीदार होते ही इबादतों का सिलसिला शुरू होगा। आसमान में रमजान का चांद नजर आते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा होगी। इसके साथ ही सहरी और इफ्तार का सिलसिला भी शुरू होगा। रमजान के टाइम टेबल कैलेंडर के मुताबिक पहली सहरी का वक्त सुबह पांच बजकर पांच मिनट पर खत्म होगा। वहीं इफ्तार शाम छह बजकर 25 मिनट पर होगा। जबकि आखिरी रोजे की सहरी चार बजकर 32 मिनट पर खत्म होगी और इफ्तार छह बजकर चालीस मिनट पर होगा। रमजान का पाक महीना नजदीक आते ही मुस्लिम घरों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाने लगा है। इसके साथ ही सहरी और इफ्तार में उपयोग में आने वाले खाद्य उत्पादाें की खरीदारी भी शुरू कर दी गई है। वहीं घरों और मस्जिदों में साफ सफाई का दौर भी शुरू हो गया है। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया की रमजान के रोजे का वक्त कम हो या ज्यादा इससे सबाव पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। रोजा सेहत को तंदुरुस्ती अता करता है। इसके साथ ही एक फर्ज भी अदा हो जाता है। राेजा बेहतरीन इबादतों में शुमार है। रोजेदार रोजा रखकर ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। रोजेदार की दुआ जाया नहीं जाती है।
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झांसी। चांद का दीदार होने पर 12 अथवा 13 मार्च को रमजान का पहला रोजा होगा। रमजान का पहला रोजा 13 घंटा और 20 मिनट का होगा। जबकि इस बार आखिरी रोजा 13 घंटा और 52 मिनट का होगा। इस तरह पहले और आखिरी रोजे में 32 मिनट का ही फर्क होगा।
रमजान के चांद का दीदार होते ही इबादतों का सिलसिला शुरू होगा। आसमान में रमजान का चांद नजर आते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा होगी। इसके साथ ही सहरी और इफ्तार का सिलसिला भी शुरू होगा। रमजान के टाइम टेबल कैलेंडर के मुताबिक पहली सहरी का वक्त सुबह पांच बजकर पांच मिनट पर खत्म होगा। वहीं इफ्तार शाम छह बजकर 25 मिनट पर होगा। जबकि आखिरी रोजे की सहरी चार बजकर 32 मिनट पर खत्म होगी और इफ्तार छह बजकर चालीस मिनट पर होगा। रमजान का पाक महीना नजदीक आते ही मुस्लिम घरों में तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाने लगा है। इसके साथ ही सहरी और इफ्तार में उपयोग में आने वाले खाद्य उत्पादाें की खरीदारी भी शुरू कर दी गई है। वहीं घरों और मस्जिदों में साफ सफाई का दौर भी शुरू हो गया है। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया की रमजान के रोजे का वक्त कम हो या ज्यादा इससे सबाव पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। रोजा सेहत को तंदुरुस्ती अता करता है। इसके साथ ही एक फर्ज भी अदा हो जाता है। राेजा बेहतरीन इबादतों में शुमार है। रोजेदार रोजा रखकर ज्यादा से ज्यादा इबादत करें। रोजेदार की दुआ जाया नहीं जाती है।
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