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ओवरब्रिज की जगह सेना ने सड़क के लिए दी सहमति
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:42 AM IST
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overbirj, jhansi news
- फोटो : demo
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ग्वालियर रोड से गुजरने वाले शिवपुरी - कानपुर फोर लेन पर सेना की आपत्ति की चलते दस साल से ओवरब्रिज का निर्माण अधूरा पड़ा है। सेना ने हवाई पट्टी के नजदीक होने की वजह से रोक लगाई थी। लेकिन, अब सेना ने यहां ब्रिज की जगह सड़क निर्माण की अनुमति दी है। अब इस पर एनएचएआई को फैसला लेना है।
स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत शिवपुरी-कानपुर फोर लेन पर फ्लाई ओवर निर्माण की योजना थी। यह फ्लाई ओवर ग्वालियर रोड के ऊपर पाल कालोनी के पास बनाया जाना था। एक दशक पूर्व एनएचएआई ने इसका निर्माण शुरू किया था, जिस पर दो करोड़ से अधिक की धनराशि भी खर्च कर दी गई, परंतु सेना की रोक के चलते 13 अक्तूबर 2006 को काम बंद कर दिया गया था। सेना ने ओवरब्रिज को हवाई पट्टी से उड़ान भरने वाले वायु यानों के लिए खतरा बताया था। इससे इसका निर्माण रोक दिया था। इसके बाद कागजी कार्यवाही चलती रही, परंतु मामला लटका ही रहा। लेकिन, अब जाकर सेना ने ओवरब्रिज की जगह सड़क निर्माण पर सहमति जता दी है, जिससे अधूरे पड़े निर्माण के पूरा होने की उम्मीद जग गई है। जाहिर कि अब ओवरब्रिज निर्माण में लगे दो करोड़ बेकार चले गए।
‘सेना ने ओवरब्रिज की जगह सड़क निर्माण की अनुमति दी है। अब यह मामला मुख्यालय में है। जल्द ही इस पर फैसला ले लिया जाएगा।’
- राजीव पाठक, परियोजना प्रबंधक - एनएचएआई
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स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत शिवपुरी-कानपुर फोर लेन पर फ्लाई ओवर निर्माण की योजना थी। यह फ्लाई ओवर ग्वालियर रोड के ऊपर पाल कालोनी के पास बनाया जाना था। एक दशक पूर्व एनएचएआई ने इसका निर्माण शुरू किया था, जिस पर दो करोड़ से अधिक की धनराशि भी खर्च कर दी गई, परंतु सेना की रोक के चलते 13 अक्तूबर 2006 को काम बंद कर दिया गया था। सेना ने ओवरब्रिज को हवाई पट्टी से उड़ान भरने वाले वायु यानों के लिए खतरा बताया था। इससे इसका निर्माण रोक दिया था। इसके बाद कागजी कार्यवाही चलती रही, परंतु मामला लटका ही रहा। लेकिन, अब जाकर सेना ने ओवरब्रिज की जगह सड़क निर्माण पर सहमति जता दी है, जिससे अधूरे पड़े निर्माण के पूरा होने की उम्मीद जग गई है। जाहिर कि अब ओवरब्रिज निर्माण में लगे दो करोड़ बेकार चले गए।
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‘सेना ने ओवरब्रिज की जगह सड़क निर्माण की अनुमति दी है। अब यह मामला मुख्यालय में है। जल्द ही इस पर फैसला ले लिया जाएगा।’
- राजीव पाठक, परियोजना प्रबंधक - एनएचएआई