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अलविदा की नमाज में नम हुईं आंखें
Sat, 01 Jun 2019 01:11 AM IST
देवेंद्र कुमार
jhansi
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sat, 01 Jun 2019 01:11 AM IST
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ramzan
- फोटो : amarujala
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झांसी। रमजानुल मुबारक के अलविदा जुमा की नमाज में रोजेदारों की आंखें नम हो गईं। सभी को यह एहसास हुआ कि अब जल्द ही यह बाबरकत महीना रुखसत हो जाएगा। जुमा की नमाज के लिए लोग पहले से ही मस्जिद पहुंच गए थे। लोगों की भीड़ को देखते हुए मस्जिद की कमेटियों ने मस्जिदों के आसपास भी नमाज की व्यवस्था की थी। इतना ही नहीं बाहर नमाजियों के वजू के लिए भी व्यवस्था की गई थी। इसके लिए नगर निगम से पानी के टैंकर भी मंगवाए गए थे। नमाज से पहले इमामों ने तकरीर में कहा कि अब चंद दिनों बाद रमजान का महीना खत्म हो जाएगा। इसलिए जिन्होंने अभी भी रोजा नहीं रखा वह रोजा रखकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी के लिए दुआ करें।
अगर मंगलवार को ईद का चांद निकला तो बुधवार को ईद मनाई जाएगी लेकिन मंगलवार को चांद की तस्दीक न होने पर बृहस्पतिवार को ईद होगी। इसलिए अगला जुमा रमजान के बाद ही पड़ेगा। रमजान में नमाजियों की तादाद काफी बढ़ जाती है। मुस्लिम बहुल इलाकों में रमजान में माहौल की अलग नजर आता है। जुमे की नमाज के वक्त से पहले ही लोग मस्जिदों में इकट्ठा होना शुरू हो गए जिससे पहली सफ में जगह मिल सके। शहर की मरकजी मस्जिद, बिसाती बाजार की मस्जिद, जामा मस्जिद, मस्जिद नवाब, प्रेम नगर जामा मस्जिद, माई साहब की मस्जिद, चार खंभा की मस्जिद, मीनार बाली मस्जिद, बिसाती खाना के इमामबाड़ा, सराय स्थित मस्जिद नब्बी, इतबारी गंज की मंसूरयान मस्जिद, दरीगरान की मस्जिद, मुकरयाना की छोटी व बड़ी मस्जिद के अलावा शहर की सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा की गई।
इस दौरान बिसाती बाजार की मस्जिद में मुफ्ती साबिर कासमी ने तकरीर में कहा कि रोजे का मकसद तकवा करना है। तकवा का मतलब अल्लाह का खौफ है। हम सभी को माहे रमजान की तरह हमेशा ही बुरे व गलत कामों से बचना चाहिए। जिस तरह से रमजान में लोग अल्लाह की इबादत करते हैं, ऐसा हमेशा ही बरकरार रखना है। रमजान को विदा होने में चंद दिन और बचे हैं। इस महीने के जाने से पहले हमको अल्लाह पाक से तौबा करना है। तौबा हमारे गुनाहों को मिटा देती है। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर सबसे अधिक पड़ोसी का हक होता है। ईद मनाने से पहले यह देखना है कि पड़ोसी के यहां ईद मनाई जा रही है कि नहीं। हम सभी को हर हाल में पड़ोसियों का खयाल रखना है चाहे वो किसी भी मजहब का हो। जुमे की तकरीर में इमामों ने माहे रमजान की फजीलत बयां कीं। नमाज के बाद रहमत और बरकतों के लिए दुआ मांगी गई। नमाज के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बादल छाए रहने से नमाज अदा करने वालों को कड़ी धूप का सामना नहीं करना पड़ा। इस पर भी नमाजियों ने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया।
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अगर मंगलवार को ईद का चांद निकला तो बुधवार को ईद मनाई जाएगी लेकिन मंगलवार को चांद की तस्दीक न होने पर बृहस्पतिवार को ईद होगी। इसलिए अगला जुमा रमजान के बाद ही पड़ेगा। रमजान में नमाजियों की तादाद काफी बढ़ जाती है। मुस्लिम बहुल इलाकों में रमजान में माहौल की अलग नजर आता है। जुमे की नमाज के वक्त से पहले ही लोग मस्जिदों में इकट्ठा होना शुरू हो गए जिससे पहली सफ में जगह मिल सके। शहर की मरकजी मस्जिद, बिसाती बाजार की मस्जिद, जामा मस्जिद, मस्जिद नवाब, प्रेम नगर जामा मस्जिद, माई साहब की मस्जिद, चार खंभा की मस्जिद, मीनार बाली मस्जिद, बिसाती खाना के इमामबाड़ा, सराय स्थित मस्जिद नब्बी, इतबारी गंज की मंसूरयान मस्जिद, दरीगरान की मस्जिद, मुकरयाना की छोटी व बड़ी मस्जिद के अलावा शहर की सभी मस्जिदों में जुमे की नमाज अदा की गई।
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इस दौरान बिसाती बाजार की मस्जिद में मुफ्ती साबिर कासमी ने तकरीर में कहा कि रोजे का मकसद तकवा करना है। तकवा का मतलब अल्लाह का खौफ है। हम सभी को माहे रमजान की तरह हमेशा ही बुरे व गलत कामों से बचना चाहिए। जिस तरह से रमजान में लोग अल्लाह की इबादत करते हैं, ऐसा हमेशा ही बरकरार रखना है। रमजान को विदा होने में चंद दिन और बचे हैं। इस महीने के जाने से पहले हमको अल्लाह पाक से तौबा करना है। तौबा हमारे गुनाहों को मिटा देती है। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर सबसे अधिक पड़ोसी का हक होता है। ईद मनाने से पहले यह देखना है कि पड़ोसी के यहां ईद मनाई जा रही है कि नहीं। हम सभी को हर हाल में पड़ोसियों का खयाल रखना है चाहे वो किसी भी मजहब का हो। जुमे की तकरीर में इमामों ने माहे रमजान की फजीलत बयां कीं। नमाज के बाद रहमत और बरकतों के लिए दुआ मांगी गई। नमाज के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बादल छाए रहने से नमाज अदा करने वालों को कड़ी धूप का सामना नहीं करना पड़ा। इस पर भी नमाजियों ने अल्लाह का शुक्रिया अदा किया।
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