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यूक्रेन से लौटे छात्रों को पोलैंड, हंगरी, जर्मनी से ऑनलाइन पढ़ा रहे शिक्षक
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झांसी। रूस के साथ चल रहे युद्ध में यूक्रेन के कई शहर बुरी तरह बर्बाद हो गए हैं। कई शिक्षण संस्थान भी तबाह हुए हैं। झांसी लौटे छात्रों ने बताया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले कई शिक्षकों ने परिवार के साथ पोलैंड, हंगरी, जर्मनी समेत अन्य यूरोपियन देशों में शरण ले ली है। वहीं से ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। जबकि, कुछ अभी भी यूक्रेन से पढ़ा रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में कई दिक्कतें आने से उनका कोर्स प्रभावित हुआ है।
यूक्रेन में झांसी के लगभग 25 छात्र-छात्राएं मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। रूस से जंग छिड़ने के बाद मार्च के पहले सप्ताह तक सभी विद्यार्थी झांसी लौट आए थे। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से यूक्रेन फ्लाइट भेजी गई थीं। जैसे-जैसे युद्ध बढ़ता गया, वैसे-वैसे यूक्रेन में हालात बिगड़ते चले गए। छात्रों ने बताया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र के कॉलेज, यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले कई शिक्षक यूक्रेन के नजदीकी देशों में चले गए हैं। जिन इलाकों में अभी युद्ध नहीं चल रहा है, वहां के शिक्षक अभी यूक्रेन में ही हैं। हालांकि, इनमें से कई शहरी इलाकों को छोड़कर गांवों में चले गए हैं। विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई जरूर चल रही है लेकिन इसमें कइयों को परेशानी हो रही है। छात्रों के मुताबिक किसी की दो दिन पढ़ाई चलती है तो किसी की पांच दिन। युद्ध का अलार्म बजने पर यूक्रेन में रहने वाले शिक्षक ऑनलाइन क्लास छोड़कर बंकर में चले जाते हैं। वहीं, उनके प्रैक्टिकल भी ऑनलाइन ही चल रहे हैं। जिससे ज्यादा कुछ सीखने को नहीं मिलता है। बताया कि अब जून में ऑनलाइन ही परीक्षाएं होंगी। डिग्री कब तक मिलेगी ये भी तय नहीं है। यदि अंतिम वर्ष के छात्रों को दिसंबर के बाद डिग्री मिलती है तो छात्र-छात्राएं फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन एंट्रेंस (एफएमजीई) टेस्ट नहीं दे पाएंगे। इससे उनके छह महीने बर्बाद हो जाएगा, क्योंकि अगली परीक्षा जून 2023 में होगी।
ये बोले छात्र
...तो एफएफजीई टेस्ट नहीं दे पाऊंगा
यूक्रेन की उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूं। जून के पहले सप्ताह में अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। 70 फीसदी शिक्षक अब यूक्रेन छोड़कर पोलैंड, हंगरी, जर्मनी आदि देशों से ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। जो अभी भी यूक्रेन में हैं, वो युद्ध का सायरन बजने पर बंकर में चले जाते हैं। इससे क्लास अधूरी रह जाती है। हर बार जुलाई में डिग्री मिल जाती थी। अब पता नहीं कब मिलेगी। दिसंबर तक नहीं मिली तो एफएफजीई टेस्ट नहीं दे पाऊंगा। - अक्षेंद्र बादल, आशिक चौराहे।
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अब दूसरे देश में ट्रांसफर करा लूंगा
विनिटसिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में द्वितीय वर्ष का छात्र हूं। अभी पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। सुबह साढ़े 11 बजे से शाम सात बजे तक क्लास चलती है। विनिटसिया शहर पर रूस का हमला न होने से अभी ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही। जून में परीक्षाएं शुरू होनी हैं। मगर परीक्षा के बाद किस देश की डिग्री मिलेगी, इसको लेकर संशय बना हुआ है। मैंने तो मन बना लिया है कि अब यूक्रेन लौटकर नहीं जाऊंगा। यूरोप के ही किसी देश में ट्रांसफर कराकर एडमिशन ले लूंगा। - अखिल सिंह, इलाहाबाद बैंक चौराहा।
सप्ताह में दो दिन होती ऑनलाइन पढ़ाई
मैं खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहा हूं। इस साल पांचवां वर्ष है। इस शहर में युद्ध के दौरान भीषण तबाही हुई है। ठीक बगल की वीएन कराजिना यूनिवर्सिटी हमले में क्षतिग्रस्त हो चुकी है। मेरी यूनिवर्सिटी के 50 फीसदी शिक्षक यूक्रेन छोड़कर दूसरे यूरोपियन देशों में चले गए हैं। वहां से ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं। सप्ताह में दो दिन क्लास होती है। इससे पढ़ाई पर बहुत असर पड़ा है। कोर्स भी पूरा नहीं हुआ। अब पोलैंड में अगले साल की पढ़ाई के लिए प्रवेश लूंगा। - विभु प्रजापति, डिफेंस कॉलोनी।
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यूक्रेन में झांसी के लगभग 25 छात्र-छात्राएं मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। रूस से जंग छिड़ने के बाद मार्च के पहले सप्ताह तक सभी विद्यार्थी झांसी लौट आए थे। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से यूक्रेन फ्लाइट भेजी गई थीं। जैसे-जैसे युद्ध बढ़ता गया, वैसे-वैसे यूक्रेन में हालात बिगड़ते चले गए। छात्रों ने बताया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र के कॉलेज, यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले कई शिक्षक यूक्रेन के नजदीकी देशों में चले गए हैं। जिन इलाकों में अभी युद्ध नहीं चल रहा है, वहां के शिक्षक अभी यूक्रेन में ही हैं। हालांकि, इनमें से कई शहरी इलाकों को छोड़कर गांवों में चले गए हैं। विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई जरूर चल रही है लेकिन इसमें कइयों को परेशानी हो रही है। छात्रों के मुताबिक किसी की दो दिन पढ़ाई चलती है तो किसी की पांच दिन। युद्ध का अलार्म बजने पर यूक्रेन में रहने वाले शिक्षक ऑनलाइन क्लास छोड़कर बंकर में चले जाते हैं। वहीं, उनके प्रैक्टिकल भी ऑनलाइन ही चल रहे हैं। जिससे ज्यादा कुछ सीखने को नहीं मिलता है। बताया कि अब जून में ऑनलाइन ही परीक्षाएं होंगी। डिग्री कब तक मिलेगी ये भी तय नहीं है। यदि अंतिम वर्ष के छात्रों को दिसंबर के बाद डिग्री मिलती है तो छात्र-छात्राएं फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन एंट्रेंस (एफएमजीई) टेस्ट नहीं दे पाएंगे। इससे उनके छह महीने बर्बाद हो जाएगा, क्योंकि अगली परीक्षा जून 2023 में होगी।
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ये बोले छात्र
...तो एफएफजीई टेस्ट नहीं दे पाऊंगा
यूक्रेन की उजहोरोड नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा हूं। जून के पहले सप्ताह में अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। 70 फीसदी शिक्षक अब यूक्रेन छोड़कर पोलैंड, हंगरी, जर्मनी आदि देशों से ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं। जो अभी भी यूक्रेन में हैं, वो युद्ध का सायरन बजने पर बंकर में चले जाते हैं। इससे क्लास अधूरी रह जाती है। हर बार जुलाई में डिग्री मिल जाती थी। अब पता नहीं कब मिलेगी। दिसंबर तक नहीं मिली तो एफएफजीई टेस्ट नहीं दे पाऊंगा। - अक्षेंद्र बादल, आशिक चौराहे।
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अब दूसरे देश में ट्रांसफर करा लूंगा
विनिटसिया नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में द्वितीय वर्ष का छात्र हूं। अभी पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। सुबह साढ़े 11 बजे से शाम सात बजे तक क्लास चलती है। विनिटसिया शहर पर रूस का हमला न होने से अभी ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही। जून में परीक्षाएं शुरू होनी हैं। मगर परीक्षा के बाद किस देश की डिग्री मिलेगी, इसको लेकर संशय बना हुआ है। मैंने तो मन बना लिया है कि अब यूक्रेन लौटकर नहीं जाऊंगा। यूरोप के ही किसी देश में ट्रांसफर कराकर एडमिशन ले लूंगा। - अखिल सिंह, इलाहाबाद बैंक चौराहा।
सप्ताह में दो दिन होती ऑनलाइन पढ़ाई
मैं खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई कर रहा हूं। इस साल पांचवां वर्ष है। इस शहर में युद्ध के दौरान भीषण तबाही हुई है। ठीक बगल की वीएन कराजिना यूनिवर्सिटी हमले में क्षतिग्रस्त हो चुकी है। मेरी यूनिवर्सिटी के 50 फीसदी शिक्षक यूक्रेन छोड़कर दूसरे यूरोपियन देशों में चले गए हैं। वहां से ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं। सप्ताह में दो दिन क्लास होती है। इससे पढ़ाई पर बहुत असर पड़ा है। कोर्स भी पूरा नहीं हुआ। अब पोलैंड में अगले साल की पढ़ाई के लिए प्रवेश लूंगा। - विभु प्रजापति, डिफेंस कॉलोनी।